त्योहार

Chhath Puja 2019: आखिर क्यों देते हैं सूर्यदेव को ही अर्घ्य! छठ पर्व पर क्या है सूर्य का महात्म्य!

सूर्य और चंद्रमा को पृथ्वी का सबसे साक्षात देवता माना गया है, जो अपने दिव्य स्वरूप में साक्षात दर्शन देते हैं. वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है. वैदिक काल से भारत में सूर्योपासना का प्रचलन रहा है. सूर्योपासना से ही संबद्ध है छठ पूजा. त्रेतायुग से छठपूजा का प्रचलन चला आ रहा है. क्या सूर्य का महात्म्य इतना दिव्य है?

Chhath Puja 2019: आखिर क्यों देते हैं सूर्यदेव को ही अर्घ्य! छठ पर्व पर क्या है सूर्य का महात्म्य!
छठ पूजा (Photo Credits: PTI)

Chhath Puja 2019 सूर्य और चंद्रमा को पृथ्वी का सबसे साक्षात देवता माना गया है, जो अपने दिव्य स्वरूप में साक्षात दर्शन देते हैं. वेदों में सूर्य को जगत की आत्मा कहा गया है. वैदिक काल से भारत (India) में सूर्योपासना का प्रचलन रहा है. सूर्योपासना से ही संबद्ध है छठ पूजा (Chhath Puja). त्रेतायुग से छठपूजा का प्रचलन चला आ रहा है. किंवदंतियां हैं कि माता सीता ने भी छठ का व्रत कर सूर्योपासना किया था. क्या सूर्य का महात्म्य इतना दिव्य है? आइये जानें छठ मइया के व्रत में सूर्यदेव की पूजा क्यों की जाती है? आखिर क्या है सूर्य का महात्म्य?

हिंदू धर्म में छठ पूजा का बहुत महत्व है. दीपावली के छठे दिन मनाया जानेवाले इस त्योहार में सूर्योदय एव सूर्यास्त को अर्घ्य देने के साथ-साथ छठ मइया की पूजा का विधान है. बिहार एवं झारखंड (Bihar and Jharkhand) के इस राजकीय पर्व की परंपराओं को अब देश भर में मनाया जाता है. विशेषकर हिंदीभाषी प्रदेशों में इस पर्व का ज्यादा प्रचलन है. वैसे तो लोग उगते हुए सूर्य को ही प्रणाम करते हैं, लेकिन छठ पूजा की शुरुआत ही डूबते सूर्य की आराधना से होती है. कार्तिक मास की चतुर्थी से शुरू होकर सप्तमी तक मनाया जाने वाला ये पर्व चार दिनों तक चलता है. सूर्य को अर्घ्य देने का क्या आशय है.

यह भी पढ़ें : Chhath Puja 2019: प्रकृति-प्रेम का प्रतीक है छठ पूजा, दुनिया का अकेला पर्व जहां पुत्री-रत्न की कामना की जाती है- जानें और भी रोचक बातें

भगवान सूर्य (Lord Surya) को अर्घ्य देने का क्या अर्थ हो सकता है? क्या सूर्य को जल के रूप में अर्घ्य देने से जल सूर्य के पास पहुंच जाएगा? शायद नहीं, इसका मूल एवं दार्शनिक अर्थ है -जीवन और पृथ्वी का आधार सूर्यदेव ही हैं. वस्तुत यह सूर्य को आभार व्यक्त करने की एक संस्कृति है एक परम्परा है. प्राचीनकाल में ऋषि-मुनि नित्य सूर्य को अर्घ्य अन्य पूजा की शुरुआत करते थे.

इस त्योहार का उद्देश्य सूर्य से अपनेपन और निकटता को महसूस करना है. सूर्य को जल अर्पित करने का अर्थ है कि हे सूर्य देवता, हम सच्चे हृदय से आपके आभारी हैं और यह भावना प्रेम से उत्पन्न हुई है. छठ पूजा की परंपरा में सूर्य को दूध से भी अर्घ्य देने की परंपरा है. दरअसल दूध पवित्रता का प्रतीक है. दूध में जल मिलाकर अर्घ्य देना, यह दर्शाता है कि हमारा मन और हृदय दोनों पवित्र बने रहें.

नवग्रहों के राजा हैं सूर्य देवता

सूर्य इस धरा पर सभी आहार का मुख्य स्रोत है. सूर्य के प्रताप से ही समस्त ऋतुएं आती जाती रहती हैं, सूर्य के कारण ही वर्षा आती है. सूर्य पृथ्वी जीवन का निर्वाहक हैं. छठ पूजा में सूर्य के प्रति कृतज्ञता की भावना के तहत ही सब्जियों, मिठाइयों और विभिन्न खाद्य पदार्थ यह कहते हुए सूर्य को अर्पित करते हैं, कि हे सूर्य देवता, ‘यह सब आपका ही है. यहां मेरा कुछ भी नहीं है. वेदों की ऋचाओं में भी अनेक स्थानों पर सूर्य देव की स्तुति की गई है. पुराणों में सूर्य की उत्पत्ति,प्रभाव,स्तुति, मन्त्र इत्यादि विस्तार से मिलते हैं. ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों में सूर्य को राजा का पद प्राप्त है.

वैज्ञानिक मान्यता

सूर्यास्त और सूर्योदय के समय पूरा परिवार सूर्य को अर्घ्य देने के लिए पानी में उतरता है. जल हथेलियों में रखा जाता है और सूरज को देखते हुए, जल को धीरे-धीरे अर्पित किया जाता है. सुबह और शाम के समय सूर्य को देखने का महत्व पूरे विश्व में बताया गया है और विज्ञान यह मानता है कि यह शरीर में विटामिन डी उत्पन्न करने के लिए सूर्य आवश्यक है. सुबह और शाम के समय सूर्य का अवलोकन करने से शरीर में सूर्य की ऊर्जा अवशोषित करने में मदद मिलती है. यह बुद्धि को तीक्ष्ण और सबल करता है. कुछ ऐसे भी हैं, जो बिना खाना खाए भी अपनी पूरी जिंदगी सूर्य की ऊर्जा पर टिके रहते हैं.

सूर्य को आभार प्रकट करने का महोत्सव है छठ

प्रतिदिन सूर्यदेव को अर्घ्य देने से शरीर अतिरिक्त ऊर्जा ग्रहण करती है. जीवन देनेवाले सूर्य को सच्चे मन से आभार व्यक्त करना ही छठ पूजा पूजा का परम उद्देश्य है. सूर्योपासना का यह व्रत जाति, पंथ और धन की सीमाओं से परे सभी लोग इस अर्थपूर्ण पर्व को मनाने के लिए एकत्रित होते हैं. सूर्य को जगत की आत्मा माना जाता है. छठ का पावन पर्व इन्हीं जीवनदायी सूर्य देव को आभार प्रकट करने का महापर्व है, जिसमें हर कोई बिना किसी भेदभाव के सामूहिक रूप से उनकी आराधना करता है.

(The above story first appeared on LatestLY on Nov 01, 2019 11:10 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).