Chairman Tara Chand on Asim Munir: बलूच नेता तारा चंद ने मुनीर को बताया फर्जी फील्ड मार्शल, परमाणु धमकी की निंदा की

वाशिंगटन, 13 अगस्त : बलूच अमेरिकन कांग्रेस के अध्यक्ष तारा चंद ने बुधवार को पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की परमाणु धमकी की कड़ी निंदा करते हुए उन्हें "फर्जी फील्ड मार्शल" और "इंसानों का दुश्मन" करार दिया. तारा चंद ने कहा कि अमेरिका दौरे के दौरान मुनीर ने चेतावनी दी थी कि पाकिस्तान कभी भी भारत को सिंधु नदी को रोकने की अनुमति नहीं देगा और अपने जल अधिकारों की रक्षा के लिए भारत द्वारा बनाए जाने वाले किसी भी बांध को नष्ट कर देगा.

तारा चंद ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “पाकिस्तान का फर्जी फील्ड मार्शल असीम मुनीर, जिसने अमेरिका में धमकी दी कि वह भारत और दुनिया को अपने परमाणु बमों से तबाह कर देगा, उसे शर्म आनी चाहिए. वह इस्लाम के नाम पर धार्मिक कट्टरता की सनक से ग्रसित होकर भारत के साथ पूरी दुनिया को नष्ट करना चाहता है.” इसे विश्व नेताओं के लिए एक चेतावनी बताते हुए तारा चंद ने पाकिस्तान के सभी परमाणु हथियार वापस लेने और देश पर आर्थिक, राजनीतिक और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाने की मांग की. उन्होंने कहा कि धार्मिक रूप से प्रेरित पाकिस्तान और उसकी नेतृत्व क्षमता को अपने विनाशकारी इरादों पर अमल करने से पहले ही उसके परमाणु हथियार छीन लिए जाने चाहिए, ताकि वह दुनिया को नुकसान न पहुंचा सके. यह भी पढ़ें : US India Trade Talks: भारत थोड़ा अड़ियल रवैया अपना रहा है, ट्रेड डील पर बोले अमेरिकी वित्त मंत्री

बता दें कि मुनीर ने अमेरिका के दो शहरों का दौरा किया और रविवार को बेल्जियम रवाना हो गए. यह पिछले दो महीनों में उनका अमेरिका का दूसरा दौरा था. इससे पहले मई में तारा चंद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सिंधु जल संधि को निलंबित रखने के भारत के फैसले की सराहना की थी. उन्होंने नई दिल्ली से ‘आजाद बलूचिस्तान’ आंदोलन को समर्थन देने की अपील भी की थी. उन्होंने कहा था, “आपका लाल किले से भाषण में बलूचिस्तान का जिक्र करना दुनिया भर के बलूचों के लिए नैतिक समर्थन का संकेत था. इससे मेरे बलोच लोगों में बड़ी उम्मीद जगी.” तारा चंद ने पाकिस्तान द्वारा 1948 में बलोचिस्तान पर कब्जे के बाद से वहां के लोगों पर हो रहे दमन, जबरन गायब करने और हत्याओं की निंदा की. उन्होंने कहा कि यह सब इस्लामाबाद की उस रणनीति का हिस्सा है जिसके जरिए बलोचिस्तान की आजादी की लड़ाई को कुचला जा रहा है.