आजादी के 79 वें वर्ष में हम एक नये भारत की परिकल्पना में संलग्न हैं. कोई संदेह नहीं कि इसमें डिजिटल की महत्वपूर्ण भूमिका है. ‘डिजिटल भारत’ (Digital India) एक ऐसा सपना है जो भारत को एक आधुनिक, सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में अग्रसर है. यह पहल भारत सरकार द्वारा 1 जुलाई 2015 को शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों को डिजिटल तकनीक से जोड़कर सुशासन, पारदर्शिता और समावेशी विकास को बढ़ावा देना है. आजादी के बाद भारत ने अनेक क्षेत्रों में प्रगति की, लेकिन डिजिटल क्षेत्र में यह क्रांति एक ‘नए स्वतंत्र भारत’ की नींव रखती है. जहां जानकारी और सेवाएं हर नागरिक की पहुंच में हैं. आजादी की 79वीं वर्षगांठ पर आइये बात करते हैं डिजिटल भारत यानी एक स्वतंत्र भारत की यह भी पढ़ें : Balaram Jayanti 2025 Wishes: बलराम जयंती के इन मनमोहक HD Images, WhatsApp Status, GIF Greetings और Wallpapers के जरिए दें बधाई
डिजिटल भारत की प्रमुख विशेषताएं:
सभी तक डिजिटल पहुंच: हर गांव हर कस्बों तक इंटरनेट सुविधा पहुंचाना, जिससे शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और सरकारी सेवाएं डिजिटल रूप से सुलभ हो सकें. आज भारत के 97.65 प्रतिशत गांवों में मोबाइल कनेक्टिविटी है, और करीब 96.80 प्रतिशत गांवों में 4G सुविधा उपलब्ध है. 2 लाख 14 हजार 325 ग्राम पंचायतें ब्रॉडबैंड सेवाओं के लिए तैयार हैं.
डिजिटल भारत और स्वतंत्रता का संबंध: आजादी केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी होना चाहिए. डिजिटल भारत नागरिकों को जानकारी का अधिकार, सेवाओं तक सीधी पहुंच तथा आत्मनिर्भर बनने का साधन देता है. एक किसान भी अब मोबाइल से मंडी के दाम जान सकता है, एक छात्र गांव से ही ऑनलाइन कोर्स कर सकता है, और एक महिला घर बैठे अपना व्यवसाय चला सकती है. सच्चे अर्थों में ‘नए स्वतंत्र भारत’ की यही पहचान है.
ई-गवर्नेंस: ई- भारत में 22 हजार से अधिक ई-सेवाएं उपलब्ध हैं, जो नेशनल ई-गवर्नेंस सर्विस डिलीवरी असेसमेंट (NeSDA) फ्रेमवर्क के अंतर्गत दर्ज की गई हैं. ई-गवर्नेंस से नागरिकों को सरकारी सेवाओं तक ऑनलाइन पहुंच मिली है, जिससे समय और धन की बचत हुई है. इससे पारदर्शिता और दक्षता में भी वृद्धि हुई है और सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन करके भ्रष्टाचार में कमी पारदर्शिता को बढ़ावा मिला है, जैसे डिजिलॉकर, उमंग ऐप, और आधार आधारित सेवाएं आदि.
डिजिटल शिक्षा: डिजिटल शिक्षा में भारत की प्रगति, विशेष रूप से कोविड-19 महामारी के बाद, काफी उल्लेखनीय रही है. भारत सरकार ने डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए कई पहलें की हैं, जैसे स्वयं (SWAYAM), दीक्षा (DIKSHA), और ई-पाठशाला जैसे प्लेटफॉर्म. इन माध्यमों से, छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच प्राप्त हो रही है, जिसमें दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले छात्र भी शामिल हैं.
डिजिटल भुगतान प्रणाली: UPI, BHIM ऐप, और अन्य ऑनलाइन भुगतान माध्यमों से कैशलेस अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना.
रोजगार और स्टार्टअप को बढ़ावा: डिजिटल माध्यम से युवाओं को नए रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, साथ ही स्टार्टअप इंडिया और डिजिटल इंडिया मिलकर एक नया उद्यमिता माहौल बना रहे हैं.
डिजिटल भारत, आजाद भारत के विकास का आधुनिक स्वरूप है. यह न केवल तकनीकी प्रगति है, बल्कि सामाजिक समानता, पारदर्शिता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है. यदि इसे सही दिशा में लागू किया जाए, तो यह पहल आने वाले वर्षों में भारत को विश्व मंच पर एक डिजिटल महाशक्ति बना सकती है.













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