Savitribai Phule Jayanti 2026: 'शिक्षा ही सामाजिक परिवर्तन का सबसे शक्तिशाली अस्त्र', पीएम मोदी और अमित शाह ने क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले को दी श्रद्धांजलि
सावित्रीबाई फुले, पीएम मोदी (Photo Credits: File Image)

Savitribai Phule Jayanti 2026: आज यानी 3 जनवरी 2026 को देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती (Savitribai Phule Jayanti) मनाई जा रही है. 3 जनवरी को मनाई जाने वाली सावित्रीबाई फुले जयंती 2026 सिर्फ श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं है, बल्कि उनके काम से मिले मूल्यों की सराहना करने का भी दिन है. समाज के पिछड़े तबकों के लिए शिक्षा के दरवाज़ खोलने वाली, महिलाओं की शिक्षा के लिए बिना थके काम करने वाली और अन्याय के खिलाफ निडर होकर खड़ी रहने वाली सावित्रीबाई (Savitribai Phule) की विरासत आज भी उतनी ही ज़रूरी है, जितनी तब थी. इस बेहद खास अवसर पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने महान समाज सुधारक और आधुनिक भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की.

पीएम मोदी ने समाज के उत्थान और विशेष रूप से शिक्षा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान को याद करते हुए कहा कि सावित्रीबाई फुले का जीवन सेवा और शिक्षा के माध्यम से समाज को बदलने के लिए समर्पित था. यह भी पढ़ें: Savitribai Phule Quotes: सावित्रीबाई फुले की जयंती पर ये उनके ये अनमोल विचार भेजकर करें उन्हें याद

प्रधानमंत्री ने बताया 'सामाजिक परिवर्तन की प्रेरणा'

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी ने सावित्रीबाई फुले के सिद्धांतों को याद किया. उन्होंने लिखा, ‘क्रांतिज्योति सावित्रीबाई फुले की जन्मजयंती पर हम एक ऐसी अग्रणी व्यक्तित्व को याद करते हैं, जिनका जीवन सेवा और शिक्षा के माध्यम से समाज के परिवर्तन के लिए समर्पित था. वे समानता, न्याय और करुणा के सिद्धांतों के प्रति प्रतिबद्ध थीं.’

पीएम ने आगे कहा कि सावित्रीबाई का मानना था कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे शक्तिशाली उपकरण है. उन्होंने ज्ञान के जरिए लोगों के जीवन को बदलने पर ध्यान केंद्रित किया.  इसके साथ ही वंचितों की देखभाल के लिए उनके द्वारा किए गए कार्य आज भी अनुकरणीय हैं.

पीएम मोदी ने सावित्रीबाई फुले के सिद्धांतों को किया याद

गृह मंत्री अमित शाह और योगी आदित्यनाथ ने किया नमन

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सावित्रीबाई फुले को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा बताया. उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई जी ने महिला सशक्तिकरण को शिक्षा के मौलिक अधिकार से जोड़कर एक नई दिशा दी. सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष करते हुए उन्होंने देश का पहला बालिका स्कूल स्थापित किया और समाज को सुधार के प्रति जागरूक किया.

अमित शाह ने सावित्रीबाई फुले को राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा बताया

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें 'क्रांतिज्योति' बताते हुए कहा कि उनके साहस और दूरदर्शिता ने समाज में शिक्षा, समानता और महिला अधिकारों की अलख जगाई. योगी ने उन्हें मानवीय गरिमा और सामाजिक बदलाव का प्रतीक बताया.

सीएम योगी आदित्यनाथ से सावित्रीबाई फुले को दी श्रद्धांजलि

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और योगदान

1831 में महाराष्ट्र में जन्मी सावित्रीबाई फुले का विवाह मात्र 10 वर्ष की आयु में समाज सुधारक ज्योतिराव फुले से हो गया था. उस दौर की रूढ़िवादी विचारधारा और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने महिला शिक्षा के प्रति अपने संकल्प को डगमगाने नहीं दिया.

  • पहला बालिका स्कूल: उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर पुणे में लड़कियों के लिए देश का पहला स्कूल खोला.
  • सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार: छुआछूत, लिंगभेद और सामाजिक असमानता के खिलाफ उनका संघर्ष भारतीय इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है.
  • महिला सशक्तिकरण: उन्होंने विधवा विवाह और महिलाओं के अधिकारों के लिए कई आंदोलनों का नेतृत्व किया.

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की श्रद्धांजलि

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वंचितों और शोषितों को शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाने में सावित्रीबाई जी का योगदान अद्वितीय है. उनका त्याग और सामाजिक परिवर्तन की यात्रा आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करती रहेगी.