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Udaipur News: राजस्थान के उदयपुर ADJ कोर्ट का बड़ा फैसला, पत्नी के काले रंग पर ज़िंदा जलाने वाले पति को सुनाई फांसी की सज़ा

राजस्थान के उदयपुर की एडीजे कोर्ट ने एक जघन्य हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पत्नी की हत्या के दोषी पति को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है। यह मामला वल्लभनगर थाना क्षेत्र में दर्ज हुआ था, जिसमें मृतका लक्ष्मी की निर्मम हत्या के लिए उसके पति किशनदास को दोषी ठहराया गया.

Udaipur News: राजस्थान के उदयपुर ADJ कोर्ट का बड़ा फैसला, पत्नी के काले रंग पर ज़िंदा जलाने वाले पति को सुनाई फांसी की सज़ा
प्रतिकात्मक तस्वीर (Photo Credits : X)

Udaipur News: राजस्थान के उदयपुर की एडीजे कोर्ट ने एक जघन्य हत्या के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पत्नी की हत्या के दोषी पति को मृत्युदंड (फांसी) की सजा सुनाई है। यह मामला वल्लभनगर थाना क्षेत्र में दर्ज हुआ था, जिसमें मृतका लक्ष्मी की निर्मम हत्या के लिए उसके पति किशनदास को दोषी ठहराया गया.

जानें पूरा मामला

घटना कुछ साल पहले की है. एक दिन आरोपी किशनदास ने अपनी पत्नी लक्ष्मी को एक रसायन लाकर दिया, यह कहते हुए कि इससे उसका रंग निखरेगा. रसायन से एसिड जैसी तीखी गंध आ रही थी, जिससे लक्ष्मी को संदेह हुआ, लेकिन उसने पति पर भरोसा कर लिया. इसके बाद किशनदास ने वह रसायन लक्ष्मी के पेट पर डाल दिया और क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए अगरबत्ती जलाकर उस स्थान पर रख दी, जिससे लक्ष्मी आग की चपेट में आ गई और बुरी तरह झुलस गई. यह भी पढ़े: Supreme Court Stray Dogs Verdict: वैक्सीनेशन के बाद अब आवारा कुत्तों को उनके मूल इलाकों में छोड़ा जाएगा’, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

मौके पर ही मौत!

इतना ही नहीं, जब लक्ष्मी जल रही थी, तब किशन ने उस पर बोतल में बचा हुआ रसायन भी डाल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई.

कोर्ट ने सुनाई फांसी की सजा

एडीजे कोर्ट ने अपने फैसले में इस मामले को अत्यंत अमानवीय और दुर्लभतम अपराध की श्रेणी में रखते हुए कहा कि ऐसे अपराधों पर कड़ा संदेश देना जरूरी है, ताकि समाज में भय और न्याय व्यवस्था का विश्वास बना रहे.कोर्ट ने कहा कि यह अपराध सिर्फ एक महिला के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज और मानवता के विरुद्ध है. इसलिए दोषी को मृत्युदंड देना ही न्यायोचित है.

अब ऊपरी अदालत में अपील का विकल्प

हालांकि, आरोपी किशन को उच्च न्यायालय में अपील करने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है. संभव है कि उसे ऊपरी अदालत से कोई राहत मिले, लेकिन निचली अदालत ने इस अपराध को अक्षम्य और क्रूरता की पराकाष्ठा बताते हुए कहा है कि ऐसे मामलों में कोई नरमी नहीं बरती जा सकती.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 31, 2025 12:19 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).