Bank Loan Fraud Case: सीबीआई अदालत ने बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में महिला को सजा सुनाई
सीबीआई कोर्ट, गाजियाबाद के विशेष न्यायाधीश ने बुधवार को एक निजी व्यक्ति मनीषा देवी को बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले में दोषी ठहराया. जांच एजेंसी ने 50,000 रुपए के जुर्माने के साथ तीन साल, पांच महीने और 15 दिन की कैद की सजा सुनाई. सीबीआई के अनुसार, उसने 13 सितंबर, 2017 को आरोपी मनीषा देवी और उनके पति, सह-आरोपी कपिल कुमार के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने का मामला दर्ज किया था.
नई दिल्ली, 24 सितंबर : सीबीआई कोर्ट (CBI Court), गाजियाबाद के विशेष न्यायाधीश ने बुधवार को एक निजी व्यक्ति मनीषा देवी को बैंक ऋण धोखाधड़ी मामले (Bank Loan Fraud Case) में दोषी ठहराया. जांच एजेंसी ने 50,000 रुपए के जुर्माने के साथ तीन साल, पांच महीने और 15 दिन की कैद की सजा सुनाई. सीबीआई के अनुसार, उसने 13 सितंबर, 2017 को आरोपी मनीषा देवी और उनके पति, सह-आरोपी कपिल कुमार के खिलाफ आपराधिक साजिश रचने का मामला दर्ज किया था.
सीबीआई ने एक प्रेस बयान में कहा, "आरोपी मनीषा देवी पर सह-आरोपी के साथ मिलकर पूरे दस्तावेजों के बिना ऋण के लिए आवेदन करने और अपने नाम पर 99 लाख रुपए का ऋण स्वीकृत कराने और उनके पति, सह-आरोपी कपिल कुमार पर जाली दस्तावेजों के आधार पर एक प्लॉट खरीदने, खाते से 96 लाख रुपए निकालने और ऋण की शर्तों के विरुद्ध ऋण राशि का दुरुपयोग करने का आपराधिक षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया गया है." यह भी पढ़ें : तमिलनाडु के वेल्लोर में दिनदहाड़े बच्चा किडनैप, CCTV में कैद हुई पूरी घटना
इस प्रकार, सह-आरोपी के साथ मिलीभगत करके, केनरा बैंक (पूर्ववर्ती सिंडिकेट बैंक), गाजियाबाद के साथ धोखाधड़ी करके मनीषा देवी ने बैंक को 11,766,950 रुपए का गलत नुकसान पहुंचाया." इसमें आगे कहा गया है कि मनीषा देवी और अन्य सरकारी व निजी व्यक्तियों के खिलाफ 23 दिसंबर, 2021 को आरोप पत्र दायर किया गया था. आरोपी ने 9 सितंबर, 2025 को विशेष न्यायाधीश, सीबीआई भ्रष्टाचार निरोधक न्यायालय संख्या 1, गाजियाबाद की अदालत में अपना अपराध स्वीकार करते हुए अपना अपराध स्वीकार कर लिया. सीबीआई अदालत ने बुधवार को मनीषा देवी की दोषसिद्धि की अर्जी स्वीकार कर ली और उसे दोषी करार देते हुए सजा सुनाई.
यह मामला इस बात पर प्रकाश डालता है कि इस मामले में लगभग आठ साल लगने के बावजूद, सीबीआई कोई कसर नहीं छोड़ेगी और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने की पूरी कोशिश करेगी. बता दें कि लखनऊ की एक विशेष सीबीआई अदालत ने मंगलवार को एक बैंक अधिकारी और दो अन्य को 6.80 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के मामले में तीन साल की कैद और 1.25-1.25 लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई थी. सीबीआई अदालत ने बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत पर 2008 में दर्ज एक मामले में बैंक ऑफ इंडिया के उप मुख्य प्रबंधक पंकज खरे और दो निजी व्यक्तियों, राजेश खन्ना और शमशुल हक सिद्दीकी, को दोषी ठहराया और सजा सुनाई. तीनों को 2004-06 के दौरान हुई धोखाधड़ी के लिए तीन-तीन साल की कैद और 1.25 लाख रुपए के जुर्माने की सजा सुनाई गई.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 25, 2025 08:32 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

