VIDEO: 'हमें ज्ञान न दें'...UN में गरजे विदेश मंत्री जयशंकर, अमेरिका को सुनाई खरी-खरी, पश्चिमी देशों को दिखाया आईना
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जी-20 बैठक में रूस से तेल खरीदने पर भारत का बचाव करते हुए पश्चिमी देशों के "दोहरे मापदंड" की कड़ी आलोचना की. उन्होंने साफ कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा और किसी भी तरह के दबाव के आगे नहीं झुकेगा. साथ ही, उन्होंने आतंकवाद पर जीरो-टॉलरेंस और युद्ध से विकासशील देशों पर पड़ रहे आर्थिक बोझ का मुद्दा भी ज़ोर-शोर से उठाया.
न्यूयॉर्क: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में जी-20 देशों की एक बड़ी बैठक में हिस्सा लिया. इस दौरान उन्होंने अमेरिका समेत उन सभी पश्चिमी देशों को कड़ा संदेश दिया, जो रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर सवाल उठाते रहे हैं. जयशंकर ने साफ शब्दों में कहा कि दुनिया में "दोहरे मापदंड" साफ दिख रहे हैं और ये ठीक नहीं है.
अमेरिका पर सीधा निशाना
जब से यूक्रेन और रूस की लड़ाई शुरू हुई है, अमेरिका और यूरोप के कई देश भारत पर दबाव बना रहे हैं कि वह रूस से सस्ता तेल न खरीदे. इसी बात पर जयशंकर ने बिना किसी का नाम लिए कहा कि जब दुनिया में तनाव का माहौल हो, तो गरीब और विकासशील देशों के लिए ऊर्जा (पेट्रोल-डीजल) और बाकी ज़रूरी चीज़ों की सप्लाई को मुश्किल बनाना किसी के हित में नहीं है.
उन्होंने कहा, "शांति से ही विकास होता है, लेकिन विकास को खतरे में डालकर शांति नहीं लाई जा सकती." उनका इशारा साफ था कि एक तरफ पश्चिमी देश खुद रूस से किसी न किसी रूप में व्यापार कर रहे हैं, लेकिन भारत जैसे देशों को अपनी ऊर्जा ज़रूरतों को पूरा करने से रोक रहे हैं. इसी को उन्होंने "दोहरा मापदंड" कहा.
My remarks at the G20 Foreign Ministers’ Meeting in New York. #UNGA80
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) September 25, 2025
आतंकवाद पर भी दिया कड़ा संदेश
जयशंकर ने आतंकवाद को दुनिया की शांति और विकास के लिए सबसे बड़ा खतरा बताया. उन्होंने कहा कि यह बहुत ज़रूरी है कि दुनिया आतंकवाद और इसे बढ़ावा देने वालों के प्रति कोई नरमी न बरते और न ही उन्हें किसी भी तरह की मदद दे.
'ग्लोबल साउथ' की उठाई आवाज़
विदेश मंत्री ने यूक्रेन और गाजा में चल रही लड़ाइयों का ज़िक्र करते हुए कहा कि इन संघर्षों की सबसे भारी कीमत 'ग्लोबल साउथ' यानी दुनिया के विकासशील और गरीब देशों को चुकानी पड़ रही है. इन लड़ाइयों की वजह से खाने-पीने की चीज़ें, खाद और पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे इन देशों पर बहुत बड़ा आर्थिक दबाव बन गया है.
उन्होंने यह भी कहा कि आज के दौर में संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठन उतने असरदार नहीं रह गए हैं, जितने होने चाहिए. इसलिए अब इनमें सुधार की बहुत ज़्यादा ज़रूरत है.
बातचीत ही एकमात्र रास्ता
अंत में, उन्होंने शांति की अपील करते हुए कहा कि दुनिया को बातचीत और कूटनीति के रास्ते पर लौटना चाहिए, न कि और ज़्यादा मुश्किलें पैदा करनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि भारत जैसे कुछ देश हैं जो लड़ाई में शामिल दोनों पक्षों से बात कर सकते हैं. दुनिया को ऐसे देशों की मदद लेनी चाहिए ताकि शांति कायम हो सके.
(The above story first appeared on LatestLY on Sep 26, 2025 08:12 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

