Use Of Live Python On Stage: ओडिशा जात्रा एक्टर साई सत्यजीत पांडा को मंच पर जीवित अजगर का उपयोग करने के लिए समन, वन विभाग ने शुरु की जांच
ओडिशा के जाजपुर जिले में एक लोकप्रिय जात्रा मंडली द्वारा किए गए अभ्यास के वीडियो में अभिनेता साई सत्यजीत पांडा को मंच पर एक जीवित अफ्रीकी बॉल पाइथन को संभालते हुए दिखाए जाने के बाद वन्यजीव कानून की जांच शुरू हो गई है.
Use Of Live Python On Stage: ओडिशा (Odisha) के जाजपुर जिले (Jajpur District) में एक लोकप्रिय जात्रा मंडली द्वारा किए गए अभ्यास के वीडियो में अभिनेता साई सत्यजीत पांडा (Sai Satyajit Panda) को मंच पर एक जीवित अफ्रीकी बॉल पाइथन को संभालते हुए दिखाए जाने के बाद वन्यजीव कानून की जांच शुरू हो गई है. बताया जा रहा है कि तुलसी गणनाट्य मंडली (Tulasi Gananatya Troupe) द्वारा चंदिखोले में प्रस्तुत नाटक 'एई बोधे शेष देखा' (Ei Bodhe Sesha Dekha) का मंगलवार को रिहर्सल किया गया. वायरल फुटेज ने भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (India’s Wildlife Protection Act, 1972) के तहत प्रतिबंधित लाइव प्रदर्शनों में जंगली जानवरों के अवैध उपयोग को लेकर जनता की तीखी प्रतिक्रिया और चिंताएं पैदा कर दीं.
विवाद के जवाब में, बैरी वन रेंज कार्यालय (Bairi Forest Range Office) ने पांडा को स्पष्टीकरण के लिए तलब किया. बुधवार को वह अधिकारियों के सामने पेश हुए और स्पष्ट किया कि जिस अजगर (Python) की बात हो रही है, वह एक गैर-विषैला, विदेशी अफ्रीकी बॉल पाइथन (Exotic African Ball python) है. यह एक ऐसी प्रजाति है जो भारतीय वन्यजीव अनुसूचियों के तहत संरक्षित नहीं है.
इस प्रस्तुति में वन रेंजर की भूमिका निभाने वाले पांडा ने दावा किया कि इस सरीसृप का इस्तेमाल किसी सार्वजनिक शो में नहीं, बल्कि एक निजी रिहर्सल के दौरान किया गया था. उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी वन्यजीव कानून का जानबूझकर उल्लंघन नहीं किया गया और यह कृत्य एक चरित्र चित्रण (Character Portrayal) का हिस्सा था. यह भी पढ़ें: VIDEO: रील नहीं Real लाइफ में भी हीरो है सोनू सूद! सोसाइटी में घुस आया सांप, एक्टर ने हाथों से पकड़कर किया रेस्क्यू, वीडियो आया सामने
रेंज अधिकारी अद्वित कुमार प्रधान ने पांडा के दिखाई देने की पुष्टि की और कहा कि हालांकि अभी तक कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है, विभाग इस बात की जांच कर रहा है कि क्या अजगर का इस्तेमाल करने के लिए (भले ही वह विदेशी और पालतू जानवर के रूप में वैध हो) प्रदर्शनकारी पशु और पर्यावरणीय दिशानिर्देशों के तहत पूर्व अनुमति की आवश्यकता है. वन विभाग ने आगे कोई टिप्पणी जारी नहीं की है, लेकिन संकेत दिया है कि मामले की गहन जांच जारी है.
वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत, उपयुक्त प्राधिकारी की अनुमति के बिना जंगली या विदेशी जानवरों का सार्वजनिक प्रदर्शन या उपयोग कानूनी परिणामों को आमंत्रित कर सकता है, चाहे वह प्रजाति देशी हो या आयातित. इस घटना ने पारंपरिक प्रदर्शन कलाओं, विशेष रूप से जात्रा जैसे ग्रामीण नाट्य प्रारूपों में, नैतिक सीमाओं पर बहस को फिर से छेड़ दिया है. यह मामला भविष्य में सार्वजनिक प्रदर्शनों में विदेशी पालतू जानवरों के नियमन के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है.
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 24, 2025 09:52 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

