इतालवी गीत 'बेला चाओ': रहस्यमय आरम्भ से लेकर आंदोलनों तक
बेला चाओ किसी को अंतिम विदाई देने के लिए लिखा गया कोई गाना नहीं.
बेला चाओ किसी को अंतिम विदाई देने के लिए लिखा गया कोई गाना नहीं. यह इतालवी गीत है जिसका मतलब होता है, 'गुडबाय ब्यूटीफुल.’ यह गीत दमन और अत्याचार से विरोध का प्रतीक है.'बेला चाओ' किसी को अंतिम विदाई देने के लिए लिखा गया कोई गाना नहीं. यह इतालवी गीत है जिसका मतलब होता है, 'गुडबाय ब्यूटीफुल.' यह गीत दमन और अत्याचार से विरोध का प्रतीक है.
सितंबर 2025 में अमेरिका के कंजर्वेटिव युवा नेता चार्ली कर्क की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. जांचकर्ताओं को घटनास्थल पर गोली के खोखे मिले. इन खोखों पर अलग-अलग संदेश खुदे हुए थे. यह उस व्यक्ति से जुड़ा था, जिस पर चार्ली कर्क की हत्या का आरोप था. उनमें से एक संदेश था, 'बेला चाओ.'
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ये शब्द लगभग सौ साल पुराने इतालवी विरोध गीत से लिए गए हैं. यह लंबे समय से दुनिया भर में प्रतिरोध और संघर्ष की धुन माना जाता रहा है. इस घटना के बाद यह गीत एक बार फिर राजनीतिक आंदोलनों से होते हुए पॉप कल्चर तक अपनी मौजूदगी दर्ज करा रहा है.
गाने की उत्पत्ति को लेकर कई कहानियां
व्यापक रूप से फासीवाद विरोधी गीत के रूप में विख्यात ‘बेला चाओ' को हर साल 25 अप्रैल को इटली के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर गाया जाता है. यह बेनितो मुसोलिनी की फासीवादी तानाशाही और इटली में नाजी कब्जे के अंत का प्रतीक है. इसके सबसे प्रचलित संस्करण में एक ऐसे समर्थक की कहानी बताई गई है, जिसकी राजनीतिक विचारधारा स्पष्ट नहीं है, जो स्वतंत्रता के लिए लड़ते हुए शहीद हो जाता है और सुंदर फूल की छांव में दफन होने की इच्छा व्यक्त करता है.
यह स्पष्ट नहीं कि इस गाने की शुरुआत कहां से हुई. कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इसकी धुन (बिना शब्दों के) साल 1919 में बनी एक रिकॉर्डिंग से आई हो सकती है. यह रिकॉर्डिंग ओडेसा में जन्मे क्लेजमर अकॉर्डियन वादक, मिश्का जिगानोफ ने बनाई थी.
वहीं कुछ लोग मानते हैं कि यह एक इतालवी लोकगीत है, जिसकी जड़ें उत्तर इटली के धान के खेतों से जुड़ी हैं. इसे कठोर परिस्थितियों में काम करने वाली महिला मजदूर या मोंडीने विरोध करने के लिए गाती थीं. हालांकि इस संस्करण का नाम भी ‘बेला चाओ' है, लेकिन इसका किसी पार्टी के समर्थक या सैनिकों के गीत से सीधा संबंध नहीं है. दोनों में समानता केवल नाम तक सीमित है.
आज जो संस्करण प्रचलित है, वह 1960 के दशक की शुरुआत में सामने आया. इसे खास तौर पर इटली में जन्मे फ्रांसीसी अभिनेता इव मोंटां के गाए संस्करण से पहचान मिली. उत्रेष्ट यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों डानिएले सालेर्नो और मारित वॉन डे वारेनबुर्ग ने साल 2023 में अपने अध्ययन में बताया कि इस गीत की ताकत इसके जन्म में नहीं, बल्कि इसकी हर दौर और हालात के अनुसार ढलने की क्षमता में है. उन्होंने बेला चाओ को एक 'पोर्टेबल मॉन्युमेंट' बताया है. यानी एक ऐसा सांस्कृतिक प्रतीक जो समय और जगह के पार यादें ले जाता है. अध्ययन में लिखा है, "बेला चाओ को लगातार नए संदर्भों व मीडिया में, और कई कारणों से फिर से लिखा, उपयोग और स्थानांतरित किया जा रहा है."
प्रतिरोध से रीमिक्स तक
यह गीत दूसरे विश्व युद्ध के दौरान उतना प्रचलित नहीं हुआ. लेकिन युद्ध के बाद इटली के लोगों ने फासीवाद का विरोध करने के लिए इसका इस्तेमाल किया. दशकों से इस गीत को यूरोप और अन्य देशों में वामपंथी आंदोलनों में अपनाया गया.
इस साल जनवरी में, जर्मनी में वामपंथी कार्यकर्ताओं ने धुर दक्षिणपंथी पार्टी एएफडी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान इस गीत को गाया था.
साल 2024 में, यूरोपीय संसद के वामपंथी सदस्यों ने हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान की नीतियों के विरोध में इसे गाया. इसके बाद संसद की अध्यक्ष रोबर्टा मेट्सोला ने चुटकी लेते हुए कहा, "यह यूरोविजन नहीं है."
साल 2021 में, येरूशलम में प्रदर्शनकारियों ने नेतन्याहू के सत्ता में बने रहने के खिलाफ 'बीबी चाओ' गाया. उस समय उन पर अभियोग और भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे. 'बीबी' नेतन्याहू का ही नाम है और यह गीत उनके इस्तीफे की उम्मीद में गाया गया था.
कार्लो पेस्टेली 'बेला चाओ: द सॉन्ग ऑफ फ्रीडम' के लेखक हैं. उन्होंने साल 2022 में एएफपी को बताया कि इस गाने की अपील इसकी अडाप्टिबिलिटी और आसान धुन में है. वह कहते हैं, "यह कोई कम्युनिस्ट गीत नहीं, बल्कि आजादी की घोषणा है. यह उन अराजनीतिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करता है जिन्हें हर कोई समझ सकता है और साझा कर सकता है. यह गाना गाने में भी आसान है. जिनको इतालवी नहीं आती, वे भी इसका कोरस आसानी से गा सकते हैं.”
नारीवादी प्रदर्शनों से लेकर बालकनी पर गाए गए गीत तक
नारीवादी कार्यकर्ताओं ने भी इस लोकप्रिय गीत को अपने आंदोलनों में इस्तेमाल किया. साल 2018 में अर्जेंटीना और साल 2020 में पोलैंड में प्रो-चॉइस कार्यकर्ताओं ने इस गीत को अपनाया और अपने-अपने देशों की सरकारों पर महिलाओं के अधिकारों के खिलाफ कानून बनाने की आलोचना की.
साल 2022 में 16 सितंबर को, 22 वर्षीय जिना महसा अमीनी की ईरान की मॉरल पुलिस द्वारा हिजाब से सिर न ढंकने के आरोप में गिरफ्तारी के बाद मौत हो गई. इसके बाद उसकी बहनें सैमिन और बेहिन बोलौरी ने सोशल मीडिया पर बेला चाओ का फारसी संस्करण गाया, जो जल्दी ही वायरल हो गया.
इस स्थानीय अडॉप्शन को ही सालेर्नो और वारेनबुर्ग ने 'ट्रांसनेशनल एक्टिविज्म' कहा है. इस गीत को ‘ऑक्युपाइ वॉल स्ट्रीट' और ‘फ्राइडे फॉर फ्यूचर' मूवमेंट में भी गाया गया था. अब सब इसे अपने अनुसार अपना रहे हैं. यह नए आंदोलनों का प्रतीक बन गया है. लेकिन इसने अबतक अपनी ऐतिहासिक अहमियत को नहीं खोया है.
इसका असर सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रहा. कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान इटली में लोग इसे बैलकनी से गाते थे. इसे सॉकर फैंस ने भी अपने क्लबों का समर्थन करने के लिए नया रूप दिया.
डिजिटल रीवर्किंग
बेला चाओ नेटफ्लिक्स पर मशहूर स्पेनिश क्राइम ड्रामा 'ला कासा डी पापेल' या 'मनी हाइस्ट' में इस्तेमाल हुआ. जिसके बाद से यह दुनिया भर में मशहूर हो गया.
इस सीरीज के लिए इस गाने को इलेक्ट्रॉनिक डांस म्यूजिक प्रोड्यूसर्स एल प्रोफेसर और हूगल ने रीमिक्स किया. गाने के इस संस्करण को यूट्यूब पर 20 करोड़ से अधिक बार देखा जा चुका है. इसका इंडी और अन्य कई संस्करण स्पॉटिफाई पर भी उपलब्ध हैं. इस गीत को गेमिंग कल्चर में भी अपनाया गया है. फॉर क्राई 6 और कॉल ऑफ ड्यूटी में इसका इस्तेमाल हुआ है.
विचारधाराओं से परे एक विरासत
फासीवाद विरोधी और नारीवादी कार्यकर्ताओं से लेकर जलवायु आंदोलनों और पॉप कल्चर क्रिएटर्स तक, बेला चाओ का इस्तेमाल दुनिया भर के आंदोलनों और विचारधाराओं में किया गया है. विरोध, एकजुटता और स्मरण के लिए इस गीत को आजतक अपनाया जाता है.
चाहे इसे प्रदर्शन में गाया जाए, ऑनलाइन रीमिक्स किया जाए, या गोली के खोखे पर संदेश के रूप में लिखा जाए, 'बेला चाओ' एक संदेश है. यह किसी विशेष विचारधारा का नहीं, बल्कि विरोध और प्रतिरोध की भावना का प्रतीक है.
(The above story first appeared on LatestLY on Dec 25, 2025 06:00 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

