उत्तराखंड: सूर्य ग्रहण समाप्त होने के बाद बद्रीनाथ मंदिर के कपाट खोल दिए गए हैं. मंदिर परिसद को पंचतत्व हवन और गौमुत्र जैसी पुरानी प्रक्रियाओं का पालन कर मंदिर को शुद्ध किया जा रहा है.


 

साल 2020 का पहला सूर्य ग्रहण दोपहर 3.04 बजे समाप्त हो गया है. इसके साथ ही सूतक काल भी खत्म हो गया है. ग्रहण सुबह 9.15 बजे से शुरु हुआ था और दोपहर 12.10 बजे ग्रहण चरम पर था. 

नेपाल के काठमांडू में साल 2020 का पहला सूर्य ग्रहण दिखाई दिया. नेपाल के बीपी कोइराला स्मारक, तारामंडल वेधशाला और विज्ञान संग्रहालय विकास बोर्ड के अनुसार यहां सूर्य ग्रहण सुबह 10:52 बजे से दोपहर 2:32 बजे तक दिखाई देगा.


 

पाकिस्तान के कराची में साल 2020 के पहले सूर्य ग्रहण का नजारा दिखाई दिया. पाकिस्तान मौसम विभाग के अनुसार, यहां सूर्य ग्रहण सुबह 8:46 बजे शुरू हुआ और दोपहर 2:34 बजे खत्म होगा.


 

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Surya Grahan 2020: कोरोना वायरस महामारी (Coronavirus Pandemic) के बीच साल 2020 का पहला सूर्य ग्रहण (Surya Grahan) शुरू हो चुका है. आज (21 जून 2020) को हो रही इस अद्भुत खगोलीय घटना के दौरान सूर्य एक चमकती हुई अंगूठी की तरह नजर आएगा, जिसे रिंग ऑफ फायर  (Ring Of Fire) कहा जा रहा है. साल का पहला सूर्य ग्रहण कुंडलाकार (वलयाकार) सूर्य ग्रहण (Annular Solar Eclipse) है. भारत के अधिकांश हिस्से इस खगोलीय घटना के गवाह बनेंगे. यह ग्रहण उत्तर भारत के अलावा राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड, कुरुक्षेत्र, चमौली, सिरसा, सूरतगढ़ में दिखाई देगा. सबसे खास बात तो यह है कि यह सूर्य ग्रहण साल के सबसे बड़े दिन लग रहा है, इसके अलावा यह खगोलीय घटना रविवार को घट रही है, जिसे सूर्य देव का दिन माना जाता है.

भारतीय समयानुसार सूर्य ग्रहण सुबह 09.15 बजे (03:45 GMT) से शुरू हो चुका है, जो दोपहर 12:10 बजे (06:40 GMT) चरम पर होगा और दोपहर 15:04 बजे (09:34 GMT) ग्रहण खत्म होगा. इस तरह से साल का पहला कुंडलाकार सूर्य ग्रहण की अवधि करीब 6 घंटे की होगी. सूर्य ग्रहण के 12 घंटे पहले सूतक शुरू हो जाता है, इस दौरान तमाम मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं, ताकि भगवान पर ग्रहण की छाया न पड़ सके. ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर परिसरों की साफ-सफाई करके पूजा अर्चना की जाती है और फिर से मंदिर के कपाट खोले जाते हैं.

सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन तब घटित होता है, जब चंद्रमा और पृथ्वी के बीच सूर्य आ जाता है और ये तीनों एक ही सीध में होते हैं. सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा की छाया धरती पर पड़ती है और जिस जगह पर चंद्रमा की छाया पड़ती है, वहां आंशिक रूप से अंधेरा छा जाता है. कुंडलाकार यानी रिंग ऑफ फायर का नजारा तब दिखता है, जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ढंक नहीं पाता है और सूर्य के बाहरी किनारे प्रकाशित होते हैं, जिससे सूर्य एक अंगूठी की तरह दिखाई देता है.