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योगी सरकार ने सामूहिक विवाह योजना के तहत साढ़े 3 लाख नवदंपतियों को दहेज से बचाया

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार सामूहिक विवाह योजना की नई इबारत लिखने में जुटी है. सरकार का दावा है कि उसकी इस योजना ने न सिर्फ सामाजिक सद्भाव को बढ़ाया है, बल्कि अब तक तकरीबन साढ़े तीन लाख गरीब दंपतियों को दहेज रूपी दानव से बचाया भी है. ज्ञातव्य है कि 24,318 जोड़ों का विवाह संपन्न कराने पर कुल 124़ 0218 करोड़ रुपये की धनराशि अनुदान में खर्च की गई.

योगी सरकार ने सामूहिक विवाह योजना के तहत साढ़े 3 लाख नवदंपतियों को दहेज से बचाया
सीएम योगी (Photo Credits: IANS)

उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की योगी सरकार सामूहिक विवाह योजना की नई इबारत लिखने में जुटी है. सरकार का दावा है कि उसकी इस योजना ने न सिर्फ सामाजिक सद्भाव को बढ़ाया है, बल्कि अब तक तकरीबन साढ़े तीन लाख गरीब दंपतियों को दहेज रूपी दानव से बचाया भी है. मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने शनिवार को आईएएनएस को बताया कि विवाह संस्कार में अनावश्यक प्रदर्शन एवं अपव्यय को रोकने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने अक्टूबर, 2017 में मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना शुरू की थी.

विवाह के लिए 35,000 रुपये अनुदान की व्यवस्था हुई. अब यह अनुदान बढ़ाकर 51,000 रुपये कर दिया गया है. गरीब परिवारों को भी सरकार द्वारा व्यक्तिगत तौर पर अनुदान दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि योगी सरकार ने अब तक 3 लाख 49 हजार 414 जोड़ों के विवाह पर 973़ 90 करोड़ रुपये अनुदान दे चुकी है. योगी सरकार ने अब तक 96 हजार से ज्यादा जोड़ों का विवाह संपन्न करवाया है. योजना के तहत अब तक 467़ 4049 करोड़ रुपये सरकार की तरफ से अनुदान दिया जा चुका है.

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मुख्यमंत्री के सलाहकार ने बताया कि अनुसूचित जाति एवं सामान्य वर्ग के गरीब व्यक्तियों की पुत्रियों की शादी के लिए व्यक्तिगत तौर पर सरकार ने 2,53,250 परिवारों की आर्थिक मदद की है. 506़50 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं. मृत्युंजय ने बताया कि कुल मिलाकर अब तक 3,49,414 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ है. इसके लिए सरकार ने 973़ 90 करोड़ रुपये अनुदान दिए हैं. शुरू में गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वालों की पुत्रियों की शादी के लिए 35,000 रुपये अनुदान की व्यवस्था की गई थी.

उन्होंने बताया कि सामाजिक आवश्यकता के मुताबिक, आय सीमा में 8 अगस्त, 2018 से वृद्धि हुई. अब 2 लाख रुपये वार्षिक आय सीमा कर दी गई. इतना ही नहीं, विवाहोपरांत नवदंपति के गृहस्थी बसाने एवं वैवाहिक आवश्यक सामग्री को देखते हुए अनुदान की यह राशि 6 फरवरी, 2019 को बढ़ाकर 51,000 रुपये कर दी गई. इसमें 35,000 रुपये कन्या के लिए उसके खाते में, 10,000 रुपये विवाह संस्कार में समान खरीदारी में होने वाले संभावित खर्च में लिए और 6000 रुपये प्रत्येक जोड़े के विवाह आयोजन पर खर्च करने की व्यवस्था की गई है.

मृत्युंजय ने कहा कि योजना में अब तक 96,164 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ है. इसमें अल्पसंख्यक वर्ग के 11,840 जोड़े, अन्य पिछड़ा वर्ग के 31,294 जोड़े, अनुसूचित जाति व जनजाति के 48,672 जोड़े शामिल हैं. सामान्य वर्ग के 4,358 जोड़े भी वैवाहिक बंधन में बंधे हैं.

उन्होंने आगे कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में एक ही दिन 14 नवंबर को 21,000 जोड़ों के सामूहिक विवाह के लक्ष्य के सापेक्ष 24,318 जोड़ों का विवाह संपन्न करवा कर अपनी दृढ़-इच्छाशक्ति का परिचय दिया. इसमें अल्पसंख्यक वर्ग के 3,020 जोड़े, अन्य पिछड़ा वर्ग के 7,810 जोड़े अनुसूचित जाति- जन जाति के 12,487 जोड़े एवं सामान्य वर्ग के 1,001 जोड़े सम्मिलित रहे. ज्ञातव्य है कि 24,318 जोड़ों का विवाह संपन्न कराने पर कुल 124़ 0218 करोड़ रुपये की धनराशि अनुदान में खर्च की गई.

(The above story first appeared on LatestLY on Nov 23, 2019 04:50 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).