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ट्रंप और पुतिन की मुलाकात पर भारत सहित पूरी दुनिया की नजर, टैरिफ पर बन जाएगी बात?

शुक्रवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) की अलास्का में होने वाली बैठक सिर्फ वॉशिंगटन और मॉस्को तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यूरोप, यूक्रेन और भारत भी इस पर कड़ी नजर रखेंगे.

ट्रंप और पुतिन की मुलाकात पर भारत सहित पूरी दुनिया की नजर, टैरिफ पर बन जाएगी बात?
Donald Trump and Vladimir Putin | X

शुक्रवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) की अलास्का में होने वाली बैठक सिर्फ वॉशिंगटन और मॉस्को तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यूरोप, यूक्रेन और भारत भी इस पर कड़ी नजर रखेंगे. यह मुलाकात ऐसे समय हो रही है जब वैश्विक राजनीति में तनाव, व्यापारिक दबाव और युद्धविराम की उम्मीदें एक साथ मिश्रित हैं. यह पुतिन की किसी पश्चिमी देश की पहली यात्रा होगी, जब से उन्होंने फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला किया था. साथ ही यह उनका 10 साल में पहला अमेरिकी दौरा भी होगा.

यूरोपीय नेताओं को डर है कि अगर रूस को यूक्रेन के कुछ हिस्से अपने में मिलाने की छूट मिल गई तो वह नाटो देशों (जैसे पोलैंड, एस्तोनिया, लिथुआनिया और लातविया) के प्रति और आक्रामक हो सकता है.

भारत के लिए चुनौती भरे हालात

पिछले कुछ हफ्तों में ट्रंप प्रशासन ने भारत पर 50% तक का टैरिफ लगा दिया, जो क्षेत्र के अन्य देशों की तुलना में कहीं अधिक है. विश्लेषकों का कहना है कि यह निर्यात पर सीधा असर डाल सकता है और देश के GDP का लगभग 1% दांव पर लग सकता है. इसके अलावा, अमेरिका पहले ही रूस से कच्चा तेल खरीदने पर 25% पेनल्टी लगा चुका है, जिसे बढ़ाकर 50% या उससे अधिक किया जा सकता है. यह कदम भारत के टेक्सटाइल और ज्वेलरी जैसे श्रम-प्रधान सेक्टर्स के लिए बड़ा झटका हो सकता है.

भारत के लिए क्या बदल सकता है

दोनों नेताओं के बीच बातचीत सफल रही तो अमेरिका का भारत पर टैरिफ दबाव कम हो सकता है और व्यापारिक माहौल सुधर सकता है. वहीं अगर बातचीत असफल रही तो टैरिफ और बढ़ सकते हैं, जिससे निर्यात, खासकर श्रम-प्रधान उद्योगों को नुकसान होगा.

रूस-यूक्रेन युद्ध पर अमेरिकी दबाव

ट्रंप का दावा है कि भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद में कमी ने रूस को वार्ता की तरफ धकेला है. यह बयान साफ इशारा करता है कि वॉशिंगटन मॉस्को पर दबाव डालने के लिए भारत को आर्थिक रूप से प्रभावित करने की रणनीति अपना सकता है. अगर अलास्का वार्ता सफल नहीं हुई तो टैरिफ में और इजाफा संभव है.

रक्षा संबंध बने हुए हैं मजबूत

टैरिफ तनाव के बावजूद भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों में फिलहाल कोई बड़ी रुकावट नहीं दिख रही. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल के अनुसार, अगस्त के मध्य में अमेरिकी डिफेंस पॉलिसी टीम दिल्ली आएगी और इसी महीने अलास्का में होने वाले ‘युद्ध अभ्यास’ नामक संयुक्त सैन्य अभ्यास का 21वां संस्करण भी आयोजित होगा.

(The above story first appeared on LatestLY on Aug 15, 2025 05:29 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).