Jalna Civic Polls 2026: महाराष्ट्र में होने वाले आगामी नगर निगम चुनाव 2026 के लिए सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. इस बीच, जालना नगर निगम चुनाव में एक चर्चित नाम ने सबका ध्यान खींचा है. साल 2017 में हुई पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के मुख्य आरोपियों में से एक, श्रीकांत पांगारकर ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में अपना नामांकन पत्र दाखिल किया है. पांगारकर पूर्व में भी नगरसेवक रह चूका हैं और अब एक बार फिर चुनावी राजनीति में वापसी की कोशिश कर रहा हैं.
जमानत पर बाहर हैं पांगारकर
श्रीकांत पांगारकर को सितंबर 2024 में कर्नाटक उच्च न्यायालय ने जमानत पर रिहा किया था. साल 2018 में कर्नाटक विशेष जांच दल (SIT) द्वारा गिरफ्तार किए गए पांगारकर पर हत्या की साजिश रचने और हमलावरों को रसद व प्रशिक्षण मुहैया कराने का आरोप . जेल से छूटने के बाद पांगारकर अपने गृह नगर जालना लौट आया है. यह भी पढ़े: Ambernath News: अंबरनाथ में कांग्रेस को बड़ा झटका, गठबंधन विवाद के बाद पार्टी से निकाले गए 12 नगरसेवक BJP में शामिल
राजनीतिक सफर और पार्टी से दूरी
पांगारकर इससे पहले शिवसेना से जुड़ा था और 2001 से 2006 के बीच नगरसेवक के रूप में कार्य कर चूका हैं. हालांकि, हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में नाम आने और चरमपंथी संगठनों से कथित संबंधों के बाद उन्हें पार्टी से किनारे कर दिया गया था, इस बार मुख्यधारा की राजनीतिक पार्टियों से टिकट न मिलने के कारण उसने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया है.
चुनावी समीकरण और विरोध
जालना के स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पांगारकर का कुछ खास इलाकों में प्रभाव है. उसका अभियान मुख्य रूप से नागरिक मुद्दों पर केंद्रित रहने की संभावना है ताकि आपराधिक कार्यवाही से ध्यान हटाया जा सके. दूसरी ओर, विपक्षी दलों ने उनकी उम्मीदवारी की कड़ी आलोचना की है. विपक्षी नेताओं का कहना है कि गंभीर अपराधों के आरोपियों को लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बनाना नैतिक रूप से गलत है.
क्या कहता है कानून?
जालना के चुनाव अधिकारियों के अनुसार, श्रीकांत पांगारकर का नामांकन तकनीकी रूप से वैध पाया गया है. भारतीय चुनाव कानून के मुताबिक, किसी व्यक्ति को केवल तब चुनाव लड़ने से रोका जा सकता है जब उसे किसी विशेष अपराध में दोषी ठहराया गया हो. चूंकि पांगारकर अभी केवल आरोपी हैं और उसके पर दोष सिद्ध नहीं हुआ है, इसलिए वह चुनाव लड़ने के पात्र हैं.
गौरी लंकेश मामला क्या है
प्रसिद्ध पत्रकार और दक्षिणपंथी उग्रवाद की मुखर आलोचक गौरी लंकेश की 5 सितंबर 2017 को बेंगलुरु में उनके घर के बाहर गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.इस मामले की जांच में नरेंद्र दाभोलकर और एम.एम. कलबुर्गी जैसे तर्कवादियों की हत्याओं से भी तार जुड़े होने की बात सामने आई थी। वर्तमान में बेंगलुरु की एक विशेष अदालत में यह मामला चल रहा है.













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