Pune Municipal Corporation Results 2026: पुणे-पिंपरी चिंचवड में 'दादा' का किला ढहा: नगर निगम चुनाव में अजित पवार की करारी हार, बीजेपी ने लहराया जीत का परचम
अजित पवार (Photo Credits: File Image)

पुणे/पिंपरी-चिंचवड: महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजनीति में 'पावर हाउस' (Power House) कहे जाने वाले उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) को उनके अपने गृह क्षेत्र पुणे और पिंपरी-चिंचवड (PCMC) में करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है. शुक्रवार, 16 जनवरी को आए नगर निगम चुनाव के नतीजों और रुझानों ने यह साफ कर दिया है कि इन दोनों औद्योगिक शहरों पर अब भारतीय जनता पार्टी (Bhartiya Janta Party) यानी बीजेपी (BJP) का वर्चस्व स्थापित हो चुका है. अजित पवार की एनसीपी (NCP) का सूपड़ा साफ होने से महायुति गठबंधन के भीतर उनकी स्थिति अब कमजोर पड़ती दिख रही है.

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पुणे (PMC) और पिंपरी-चिंचवड दोनों ही जगहों पर बीजेपी ने बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया है, जबकि अजित पवार और शरद पवार की 'एकजुट' एनसीपी रणनीति भी मतदाताओं को रिझाने में नाकाम रही. यह भी पढ़ें: BMC Election Result 2026: बीएमसी पर BJP-शिंदे गठबंधन का कब्जा, उद्धव ठाकरे का 25 साल का वर्चस्व खत्म, जानें महायुति की जीत के प्रमुख कारण

पुणे और पिंपरी में 'पवार ब्रांड' का पतन

पिंपरी-चिंचवड, जिसे कभी एनसीपी का अभेद्य किला माना जाता था, वहां बीजेपी ने बड़ी जीत दर्ज की है

  • सीटों का गणित: 128 सदस्यीय पिंपरी-चिंचवड नगर निगम में बीजेपी 84 से अधिक सीटों पर आगे है, जबकि अजित पवार की एनसीपी महज 37-40 सीटों पर सिमट गई है.
  • पुणे का हाल: पुणे नगर निगम (165 सीटें) में भी बीजेपी का दबदबा रहा. यहां एनसीपी को 10 से भी कम सीटें मिलती दिख रही हैं, जो पार्टी के लिए एक ऐतिहासिक गिरावट है.

क्यों नाकाम रही 'दोहरी रणनीति'?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अजित पवार की 'दोहरी चाल' उनके लिए आत्मघाती साबित हुई. राज्य स्तर पर बीजेपी के साथ सत्ता में रहने के बावजूद, स्थानीय चुनावों में उन्होंने शरद पवार के गुट के साथ गुप्त समझौता किया.

मतदाताओं ने इस 'भ्रम' को नकार दिया. 

अजित पवार के लिए अब आगे क्या?

इस हार के बाद अजित पवार के सामने राजनीतिक अस्तित्व का संकट खड़ा हो गया है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष रवींद्र चव्हाण ने पहले ही बयान दिया था कि पार्टी को अजित पवार को साथ लेने का 'पछतावा' है.

सीमित भूमिका: अब अजित पवार को महायुति सरकार में बीजेपी की छाया में रहकर और कम प्रभाव वाली भूमिका में काम करना पड़ सकता है.

बीजेपी की रणनीति: बीजेपी अब पुणे क्षेत्र में अजित पवार के बचे-कुचे प्रभाव को भी खत्म कर अपने नेतृत्व को और मजबूत करने की कोशिश करेगी.

राज्य के 29 नगर निगमों में से किसी में भी एनसीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर नहीं उभरी है, जिससे मेयर पद पाने की उनकी उम्मीदें भी खत्म हो गई हैं. यह हार अजित पवार के राजनीतिक करियर का अब तक का सबसे कठिन दौर माना जा रहा है.