Maharashtra Freedom of Religion Bill 2026: महाराष्ट्र विधानसभा ने सोमवार देर रात एक लंबी और तीखी बहस के बाद 'महाराष्ट्र धर्म स्वातंत्र्य विधेयक-2026' को मंजूरी दे दी है. सत्ताधारी महायुति सरकार ने इस कानून को राज्य में अवैध और जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए अनिवार्य बताया है. सदन में पारित होने के बाद अब इस विधेयक को मंजूरी के लिए विधान परिषद में भेजा जाएगा.
इस विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्षी गठबंधन 'महा विकास अघाड़ी' (MVA) में दरार भी साफ नजर आई. जहां शिवसेना (UBT) ने इस बिल का समर्थन किया, वहीं कांग्रेस, एनसीपी (शरद पवार) और समाजवादी पार्टी ने इसका कड़ा विरोध किया. यह भी पढ़े: Bhopal: भोपाल में धर्मांतरण और रेप रैकेट का भंडाफोड़, नौकरी के नाम पर फंसाती थीं दो बहनें; फिर मुस्लिम पुरुषों से निकाह का बनाया जाता था दबाव
किसी विशिष्ट धर्म के खिलाफ नहीं है कानून: मुख्यमंत्री
विधेयक पर जवाब देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने स्पष्ट किया कि 'महाराष्ट्र धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम-2026' का उद्देश्य किसी विशेष धर्म को निशाना बनाना नहीं है. उन्होंने कहा कि यह कानून केवल उन धर्मांतरणों को रोकने के लिए है जो धोखे, जबरदस्ती, प्रलोभन या दबाव में किए जाते हैं.
मुख्यमंत्री ने संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा कि हर नागरिक को अपना धर्म मानने और उसका प्रचार करने का अधिकार है, लेकिन लालच या डर दिखाकर धर्म परिवर्तन कराना गलत है. उन्होंने बताया कि देश के कई अन्य राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तराखंड में पहले से ही ऐसे कानून प्रभावी हैं.
स्वैच्छिक धर्मांतरण के लिए पालन करनी होगी कानूनी प्रक्रिया
नए कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे एक निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा.
- व्यक्ति को धर्मांतरण से पहले संबंधित जिला अधिकारियों को सूचित करना होगा.
- सक्षम प्राधिकारी इस बात की पुष्टि करेंगे कि धर्मांतरण वास्तव में स्वैच्छिक है.
- जांच और सत्यापन के बाद ही प्रशासन द्वारा इसे मंजूरी दी जाएगी.
विपक्ष में मतभेद और सदन में हंगामा
चर्चा के दौरान शिवसेना (UBT) के विधायक भास्कर जाधव ने बिल का समर्थन करते हुए कहा कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए है और इसमें किसी धर्म विशेष को लक्षित नहीं किया गया है. हालांकि, विपक्षी खेमे के अन्य दल इसे लेकर आशंकित दिखे.
बहस के दौरान एनसीपी (SP) विधायक जितेंद्र आव्हाड के एक बयान पर सदन में भारी हंगामा हुआ. आव्हाड ने छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक से संबंधित एक ऐतिहासिक संदर्भ दिया, जिस पर सत्ताधारी पक्ष ने कड़ी आपत्ति जताई. विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के हस्तक्षेप के बाद आव्हाड ने सदन में अपने बयान पर खेद व्यक्त किया और माफी मांगी.
यह विधेयक शुक्रवार को गृह राज्य मंत्री (ग्रामीण) डॉ. पंकज भोयर द्वारा सदन के पटल पर रखा गया था. सरकार का तर्क है कि राज्य के ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों से जबरन धर्मांतरण की लगातार आ रही शिकायतों के बाद इस तरह के सख्त कानून की आवश्यकता महसूस की जा रही थी. कानून का उल्लंघन करने वालों के लिए कड़े दंड और जुर्माने का प्रावधान भी इस विधेयक में शामिल किया गया है.













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