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‘वीर चक्र’ के बारे में जानें सबकुछ, कब-क्यों और किन्हें दिया जाता है ये सम्मान

भारतीय वायुसेना के लिए सोमवार का दिन बेहद खास रहा. दरअसल, इस दिन भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्थमान को शौर्य का सम्मान प्रदान किया गया. उन्हें इस अलंकरण से सम्मानित करने के पीछे 27 फरवरी, 2019 को एक पाकिस्तानी F-16 लड़ाकू विमान को हवाई युद्ध में मार गिराने की उनकी शौर्य गाथा है.

‘वीर चक्र’ के बारे में जानें सबकुछ, कब-क्यों और किन्हें दिया जाता है ये सम्मान
भारतीय वायु सेना (Photo Credits: Twitter )

भारतीय वायुसेना के लिए सोमवार का दिन बेहद खास रहा. दरअसल, इस दिन भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्थमान को शौर्य का सम्मान प्रदान किया गया. उन्हें इस अलंकरण से सम्मानित करने के पीछे 27 फरवरी, 2019 को एक पाकिस्तानी F-16 लड़ाकू विमान को हवाई युद्ध में मार गिराने की उनकी शौर्य गाथा है. इसी संबंध में ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्थमान को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद द्वारा अलंकरण समारोह में ‘वीर चक्र’ से सम्मानित किया गया. यदि आप इस पदक के बारे में नहीं जानते तो यह खबर आपके लिए जरूरी है. जी हां क्योंकि इसके माध्यम से ‘वीर चक्र’ के बारे में सबकुछ जानेंगे. जैसे कब-क्यों और किन्हें यह सम्मान दिया जाता है…

कब हई शुरुआत

इस पदक की शुरुआत वर्ष 1950 में 26 जनवरी को की गई थी. यह पदक दुश्मन का मुकाबला करते हुए शौर्य के कारनामे को सम्मानित करने के लिए प्रदान किया जाता है.

पदक की पहचान

यह पदक गोलाकार होता है और स्टैंडर्ड चांदी का बना हुआ है. इसके सामने के हिस्से पर पांच नोकों वाला हेराल्डिक सितारा (स्टार) बना है जिसकी नोकें बाहरी घेरे को छू रही होती हैं. सितारे का बीच का हिस्सा उभरा हुआ नजर आता है, जिस पर राज्य चिह्न (आदर्श वाक्य सहित) बना हुआ है. इस सितारे पर पॉलिश की हुई है और इसका बीच का हिस्सा सुनहरा है. पदक के पीछे वाले हिस्से पर हिंदी और अंग्रेजी में महावीर चक्र खुदा हुआ है और हिंदी व अंग्रेजी के शब्दों के बीच कमल के दो फूल बने हुए हैं. यह फीते के साथ एक छोटे-से कुंडे से लटका होता है.

रिबन

इसका फीता आधा नीला और आधा नारंगी रंग का होता है.

पदक के साथ बार का अर्थ

यदि चक्र विजेता बहादुरी के ऐसे ही कारनामे का फिर से प्रदर्शन करता है, जिसके कारण वह चक्र प्राप्त करने का पात्र हो जाता है तो बहादुरी के इस कारनामे को सम्मानित करने के लिए चक्र जिस फीते से लटका होता है, उसके साथ एक बार लगा दिया जाता है. यदि केवल फीता पहनना हो तो यह पदक जितनी बार प्रदान किया जाता है, उतनी बार के लिए फीते के साथ इसकी लघु प्रतिकृति लगाई जाती है.

पात्र

सेना, नौसेना और वायु सेना, किसी भी रिजर्व सेना, प्रादेशिक सेना, नागरिक सेना (मिलिशिया) और कानूनी रूप से गठित अन्य सशस्त्र सेना के सभी रैंकों के अफसर और पुरूष व महिला सैनिक. इनके अलावा नर्सिंग सेवा और अस्पताल व नर्सिंग से जुड़ी अन्य सेवाओं के किसी भी लिंग के मेट्रन, सिस्टर और नर्स और स्टाफ तथा सिविलियन, जो उपर्युक्त किसी भी सेवा के आदेश, निर्देश या पर्यवेक्षण के तहत नियमित या अस्थायी रूप से कार्य कर रहे हैं. यह भी पढ़ें : TMC में आज मेगा भर्ती की संभावना! कांग्रेस के कीर्ति आजाद, पूनम आजाद, संजय झा और अशोक तंवर हो सकते है शामिल

शर्तें

यह पदक जमीन पर, समुद्र में अथवा आकाश में दुश्मन का मुकाबला करते हुए शौर्य के कारनामे को सम्मानित करने के लिए प्रदान किया जाता है. यह सम्मान मरणोपरांत भी प्रदान किया जा सकता है. 01.02.1999. से पदक विजेता को प्रतिमाह 1700/- रुपए की राशि प्रदान की जाती है और यह पदक जितनी बार प्रदान किया जाएगा, हर बार उतनी ही राशि प्रदान की जाएगी, जितनी पहली बार पदक प्राप्त करने पर प्रदान की गई थी.

गौरतलब हो शत्रु का मुकाबला करते हुए वीरता के लिए ‘वीर चक्र’ हासिल करने वाले ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्थमान 27 फरवरी 2019 को वायु सेना स्टेशन श्रीनगर में ऑपरेशनल रेडीनेस प्लेटफॉर्म पर तैनात थे. सुबह 9 बजकर 55 मिनट पर उन्नत हथियारों से लैस पाकिस्तानी वायु सेना के लड़ाकू वायु यानों को जिनमें चौथी पीढ़ी के उन्नत एफ-16 और जेएफ-17 शामिल थे, नियंत्रण रेखा की और बढ़ते हुए देखा गया. लगभग 10 बजे ग्रुप कैप्टन अभिनंदन वर्थमान को तुरंत शत्रु के वायु यानों को रोकने के लिए संदेश दिया गया. अभिनंदन ने व्यक्तिगत सुरक्षा की परवाह न करते हुए पूरी निर्भिकता के साथ आगे बढ़कर दुश्मनों का मुकाबला किया.

इस दौरान असाधारण हवाई सूझबूझ और शत्रु की रणनीति की जानकारी होने का प्रदर्शन करते हुए अभिनंदन ने अपने वायु यान वाहित एयर इंटरसेप्ट रडार से निम्न ऊंचाई के वायु क्षेत्र का निरीक्षण किया और पाया कि दुश्मन का वायु यान भारतीय लड़ाकू इंटरसेप्टर वायु यान पर घात लगाकर हमला करने के लिए निम्न ऊंचाई पर उड़ान भर रहा है. इस बीच अभिनंदन ने खतरे के प्रति अन्य पायलटों को सचेत किया. भारतीय सेना के ठिकानों पर अस्त्र गिरा रहे पाकिस्तानी वायु सेना के खिलाफ जवाबी रणनीति बनाई. इससे शत्रु के वायु यान पूरी तरह से तितर-बितर हो गए और वापस मुड़ गए. अभिनंदन ने शत्रु के लड़ाकू बमवर्षक वायु यानों का पीछा किया और मिसाइल से एक F-16 वायु यान को मार गिराया. इसके बावजूद इस घनघोर युद्ध में शत्रु की एक डीवीआर मिसाइल ग्रुप कैप्टन अभिनंदन

(The above story first appeared on LatestLY on Nov 23, 2021 01:13 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).