टेक

AI तेजी से खा रहा है लोगों की नौकरी! UK में व्हाइट-कॉलर जॉब्स में 38% की भारी गिरावट

मैकिन्से की एक रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल से UK में व्हाइट-कॉलर नौकरियों में 38% की भारी गिरावट आई है. कंपनियां AI से प्रभावित होने वाली नौकरियों, जैसे टेक और फाइनेंस सेक्टर की भर्तियों में कमी कर रही हैं. यह AI का नौकरियों पर बढ़ता असर दिखाता है, खासकर एंट्री-लेवल और प्रोग्रामर जैसी भूमिकाओं में.

AI तेजी से खा रहा है लोगों की नौकरी! UK में व्हाइट-कॉलर जॉब्स में 38% की भारी गिरावट

लंदन. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तेज़ी से हमारी ज़िंदगी का हिस्सा बन रहा है. अब McKinsey की एक स्टडी बताती है कि UK में AI की वजह से व्हाइट-कॉलर नौकरियों में 38% की भारी गिरावट आई है. इसका मतलब है कि कंपनियां अब ऐसी नौकरियां कम निकाल रही हैं, जिन पर AI का सीधा असर हो सकता है.

UK में वैसे भी नौकरियों में कमी आई है क्योंकि कंपनियां लागत कम करना चाहती हैं. मई 2022 की तुलना में इस साल मई तक ऑनलाइन जॉब पोस्टिंग में कुल 31% की गिरावट आई है. लेकिन AI से प्रभावित होने वाली नौकरियों, जैसे टेक या फाइनेंस सेक्टर की व्हाइट-कॉलर जॉब्स, में यह गिरावट 38% तक पहुंच गई है, जो बाकी सेक्टर्स से लगभग दोगुनी है.

McKinsey के एक सीनियर एडवाइजर, टेरा एलास का कहना है कि AI की वजह से भविष्य में प्रोडक्टिविटी बढ़ने की उम्मीद है. इसलिए कंपनियां अपनी वर्कफोर्स स्ट्रैटेजी को बदल रही हैं और नई भर्तियां धीमी कर रही हैं.

किन नौकरियों पर पड़ रहा है सबसे ज़्यादा असर?

AI उन नौकरियों को सबसे ज़्यादा प्रभावित कर रहा है जहां AI कुछ कामों को खुद कर सकता है. McKinsey की रिसर्च के मुताबिक, पिछले तीन सालों में प्रोग्रामर, मैनेजमेंट कंसल्टेंट या ग्राफिक डिजाइनर जैसी नौकरियों की मांग में 50% से ज़्यादा की कमी आई है.

Indeed जॉब वेबसाइट के डेटा से भी पता चलता है कि AI का असर हायरिंग पर दिखने लगा है. Indeed Hiring Lab के पावेल एड्रियन के मुताबिक, कंपनियां उन सेक्टर्स में हायरिंग कम कर रही हैं जहां AI टूल्स बनाने या इस्तेमाल करने का काम होता है.

उदाहरण के लिए, मैथमेटिक्स से जुड़ी नौकरियां (जो ज़्यादातर डेटा साइंस और एनालिटिक्स की होती हैं) में AI का ज़िक्र सबसे ज़्यादा होता है, लेकिन महामारी से पहले के मुकाबले ये लगभग 50% कम हो गई हैं. वहीं, रियल एस्टेट या एजुकेशन जैसी नौकरियां, जिनमें AI का बहुत कम इस्तेमाल होता है, इस दौरान बढ़ी हैं.

एंट्री-लेवल की नौकरियां भी खतरे में

मीटिंग का सारांश बनाना या डॉक्यूमेंट्स छांटना जैसे एंट्री-लेवल के काम भी AI से प्रभावित हो रहे हैं. इससे कंपनियों को कर्मचारियों पर होने वाला खर्च कम करने में मदद मिल रही है. जॉब-सर्च वेबसाइट Adzuna के डेटा के अनुसार, 2022 के आखिर में ChatGPT के आने के बाद से एंट्री-लेवल की नौकरियों (जैसे अप्रेंटिसशिप, इंटर्नशिप या बिना डिग्री वाली जूनियर जॉब्स) में लगभग एक तिहाई की कमी आई है.

Adzuna के डेटा साइंस हेड, जेम्स नीव का कहना है कि AI का तेज़ी से बढ़ना युवा जॉबसीकर्स पर दबाव डाल रहा है, जो अभी भी कोविड के बाद की स्थिति से जूझ रहे हैं, जिसमें महंगाई, आर्थिक चुनौतियां और बिज़नेस में कम भरोसा शामिल है.

यह साफ है कि AI नौकरियों के बाज़ार को तेज़ी से बदल रहा है. ऐसे में लोगों को नए स्किल्स सीखने और AI के साथ काम करने के लिए तैयार रहने की ज़रूरत होगी.

(The above story first appeared on LatestLY on Jul 14, 2025 09:51 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).