मुंबई: दिल की सेहत की देखभाल के लिए अपनाए जाने वाले वैश्विक मानकों में एक बड़ा बदलाव हुआ है. अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन (American Heart Association) (AHA) और अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (American College of Cardiology) (ACC) ने '2026 गाइडलाइन ऑन द मैनेजमेंट ऑफ डिस्लिपिडेमिया' (2026 Guidelines on The Management of Dyslipidemia) जारी की है, जिसने 2018 के पुराने कोलेस्ट्रॉल नियमों की जगह ले ली है. नई गाइडलाइंस अब केवल ‘हाई कोलेस्ट्रॉल’ (High Cholesterol) को नियंत्रित करने के बजाय, हाई ट्राइग्लिसराइड्स और लिपोप्रोटीन (ए) सहित 'डिस्लिपिडेमिया' (Dyslipidemia) के व्यापक उपचार पर ध्यान केंद्रित करती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि हृदय रोगों का जोखिम समय के साथ जमा होता है, इसलिए शुरुआती पहचान और जीवन भर जोखिम को कम रखना अनिवार्य है. यह भी पढ़ें: World Sleep Day: विश्व निद्रा दिवस आज, अनिद्रा से छुटकारा पाने के लिए करें ये योगासन, पाएं गहरी और सुकून भरी नींद
जोखिम मापने का नया तरीका: 'PREVENT' कैलकुलेटर
इस अपडेट की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी 'PREVENT-ASCVD' समीकरणों को अपनाना है. यह नया टूल पुराने 'पूलड कोहोर्ट इक्वेशंस' की जगह लेगा. PREVENT कैलकुलेटर डॉक्टरों को 30 से 79 वर्ष की आयु के वयस्कों के लिए न केवल 10 साल, बल्कि 30 साल के दीर्घकालिक जोखिम का अनुमान लगाने की सुविधा देता है. इससे उन युवा वयस्कों की पहचान करना आसान हो जाएगा जो आज स्वस्थ दिखते हैं, लेकिन भविष्य में हृदय रोग के गंभीर रास्ते पर हो सकते हैं.
LDL के लिए फिर से लागू हुए सख्त लक्ष्य
पिछले कुछ वर्षों के लचीलेपन के बाद, 2026 की गाइडलाइंस ने LDL-C (खराब कोलेस्ट्रॉल) के लिए फिर से स्पष्ट और सख्त लक्ष्य निर्धारित किए हैं:
- अत्यधिक जोखिम वाले मरीज (जिन्हें पहले हृदय रोग हो चुका है): अब लक्ष्य 55 mg/dL से कम रखा गया है.
- उच्च जोखिम वाले मरीज (बचाव के लिए): लक्ष्य 70 mg/dL से कम है.
- मध्यम जोखिम वाले व्यक्ति: इनके लिए 100 mg/dL से कम का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
विशेषज्ञों का कहना है कि ‘कोलेस्ट्रॉल जितना कम और जितने लंबे समय तक रहेगा, उतना बेहतर है.’
लिपोप्रोटीन(ए) टेस्ट अब सभी के लिए अनिवार्य
एक बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य बदलाव के तहत, अब सभी वयस्कों को जीवन में कम से कम एक बार लिपोप्रोटीन(ए) या Lp(a) की जांच कराने की सिफारिश की गई है. यह एक आनुवंशिक कोलेस्ट्रॉल है जिस पर जीवनशैली या सामान्य स्टैटिन दवाओं का असर नहीं होता. यदि इसका स्तर 50 mg/dL या उससे अधिक है, तो इसे अब केवल एक ‘रिस्क एन्हांसर’ नहीं, बल्कि दिल के दौरे और स्ट्रोक के लिए एक 'प्राथमिक जोखिम संकेतक' माना जाएगा. यह भी पढ़ें: Health Tips: वजन घटाना हो या बालों को मजबूत बनाना, कद्दू के बीज करेंगे कमाल; जानें इसके अद्भुत फायदे
नई बनाम पुरानी गाइडलाइंस: मुख्य अंतर
| बदलाव | 2018 गाइडलाइन | 2026 गाइडलाइन |
| रिस्क टूल | केवल 10-वर्षीय अनुमान | PREVENT (10 और 30-वर्षीय अनुमान) |
| Lp(a) जांच | वैकल्पिक | सभी के लिए अनिवार्य (एक बार) |
| मुख्य लक्ष्य | प्रतिशत कमी पर ध्यान | सख्त लक्ष्य (जैसे < 55 mg/dL) |
| मुख्य फोकस | ब्लड कोलेस्ट्रॉल | डिस्लिपिडेमिया मैनेजमेंट |
कैल्शियम स्कोरिंग और बायोमार्कर की बढ़ती भूमिका
नई गाइडलाइंस में कोरोनरी आर्टरी कैल्शियम (CAC) स्कैन के उपयोग को भी बढ़ावा दिया गया है, ताकि उन मरीजों के जोखिम को बेहतर ढंग से समझा जा सके जो 'बॉर्डरलाइन' श्रेणी में आते हैं. इसके अलावा, मधुमेह या उच्च ट्राइग्लिसराइड्स वाले मरीजों के लिए 'ApoB' टेस्टिंग की सिफारिश की गई है, जो मानक LDL टेस्ट की तुलना में रक्त में हानिकारक कणों की अधिक सटीक जानकारी दे सकती है.
अंत में, AHA ने स्पष्ट किया है कि स्वस्थ जीवनशैली ही हृदय स्वास्थ्य की आधारशिला है, लेकिन यदि आंकड़े नियंत्रण से बाहर हैं, तो सुरक्षा को अधिकतम करने के लिए दवाइयों (Pharmacotherapy) की शुरुआत जल्द से जल्द की जानी चाहिए.












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