Bihar Food Poisoning: बिहार के सहरसा में मिड-डे मील खाने से 250 से ज्यादा बच्चे बीमार, स्कूल में मचा हड़कंप

Food Poisoning In Bihar: बिहार के सहरसा जिले से गुरुवार को एक बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया, जहां मिड-डे मील खाने के बाद 250 से ज्यादा बच्चों की तबीयत अचानक बिगड़ गई. यह घटना महिषी प्रखंड क्षेत्र के बलुआहा स्थित सरकारी मध्य विद्यालय में हुई. खाना खाने के कुछ ही देर बाद बच्चों ने पेट दर्द, उल्टी, चक्कर और बेचैनी की शिकायत शुरू कर दी, जिससे स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई. Jharkhand Food Poisoning: झारखंड के गिरिडीह में गोलगप्पा खाने से मातम, फूड पॉइजनिंग से एक मासूम की मौत, 18 लोग अस्पताल में भर्ती

मिड-डे मील खाने के बाद बिगड़ी बच्चों की तबीयत

बताया जा रहा है कि स्कूल में सुबह करीब 10 बजे बच्चों को मिड-डे मील में चावल और दाल परोसी गई थी. भोजन करने के कुछ ही देर बाद बड़ी संख्या में बच्चे बीमार पड़ने लगे. स्थिति बिगड़ती देख स्कूल प्रशासन और स्थानीय लोगों ने तुरंत सभी बच्चों को महिषी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया.

अस्पताल में एक साथ बड़ी संख्या में बच्चों के पहुंचने से भारी भीड़ लग गई. डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की टीम लगातार बच्चों की जांच और इलाज में जुटी रही.

बच्चों ने बताई आपबीती

कक्षा 5 के छात्र रोहित कुमार ने बताया कि खाना खाने के बाद उसके पेट में तेज दर्द शुरू हो गया और उसे उल्टियां होने लगीं. वहीं कक्षा 7 की छात्रा शिवानी ने बताया कि कई बच्चे मिड-डे मील खाने के तुरंत बाद बीमार हो गए थे.

प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग मौके पर पहुंचा

घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे. सिविल सर्जन डॉ राजनारायण प्रसाद ने स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर बच्चों के इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया.

डॉ. राजनारायण प्रसाद ने बताया कि फूड पॉइजनिंग की आशंका के मामले सामने आए हैं और सभी बच्चों का इलाज किया जा रहा है. जिन बच्चों की हालत ज्यादा गंभीर लगी, उन्हें बेहतर इलाज के लिए सहरसा सदर अस्पताल रेफर किया गया है.

मिड-डे मील की गुणवत्ता पर उठे सवाल

इस घटना के बाद अभिभावकों और स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली. लोगों ने स्कूल में परोसे जा रहे मिड-डे मील की गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं. प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है. मिड-डे मील के सैंपल लैब जांच के लिए भेजे जा रहे हैं ताकि बच्चों के बीमार होने की असली वजह का पता लगाया जा सके. फिलहाल अधिकारियों का कहना है कि सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ा दी है.