Tamil Nadu Liquor Shops News: तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य में शराब की उपलब्धता को नियंत्रित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि धार्मिक स्थलों, शैक्षणिक संस्थानों और बस स्टेशनों के 500 मीटर के दायरे में आने वाली 717 सरकारी TASMAC (तमिलनाडु राज्य विपणन निगम) शराब की दुकानों को तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए. सरकार ने इस पूरी प्रक्रिया को पूरा करने के लिए दो सप्ताह की समयसीमा तय की है.
500 मीटर के दायरे में आने वाली दुकानें चिन्हित
सरकार की नई नीति के तहत उन दुकानों पर कार्रवाई की जा रही है जो सार्वजनिक मर्यादा और छात्रों की सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील स्थानों के करीब स्थित हैं. मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि मंदिरों, चर्चों, मस्जिदों जैसे पूजा स्थलों और स्कूलों-कॉलेजों के पास शराब की दुकानों की मौजूदगी से जनता को काफी परेशानी हो रही थी. इसी को ध्यान में रखते हुए 500 मीटर का दायरा तय कर दुकानों की सूची तैयार की गई है. यह भी पढ़े: Liquor Shops Closed: यूपी, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब, हिमाचल और उत्तराखंड में 3 दिन बंद रहेंगी शराब की दुकानें, नोट कर लें तारीख
दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई के निर्देश
मुख्यमंत्री विजय ने प्रशासन को स्पष्ट आदेश दिया है कि आगामी 14 दिनों के भीतर इन सभी 717 दुकानों के शटर गिर जाने चाहिए. जिला कलेक्टरों और TASMAC के क्षेत्रीय प्रबंधकों को इस आदेश के अनुपालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है. रिपोर्ट के अनुसार, इन दुकानों को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने के बजाय फिलहाल बंद करने पर ही ध्यान केंद्रित किया जा रहा है.
सामाजिक संगठनों और जनता की पुरानी मांग
राज्य में शैक्षणिक संस्थानों के आसपास शराब की बिक्री को लेकर लंबे समय से विरोध प्रदर्शन हो रहे थे. अभिभावकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का तर्क था कि बस स्टैंड और स्कूलों के पास शराब की दुकानों के कारण छात्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बनी रहती है. सरकार के इस ताजा फैसले को उसी जनभावना के सम्मान के रूप में देखा जा रहा है.
सरकारी राजस्व और भविष्य की योजना
हालांकि TASMAC शराब की बिक्री से तमिलनाडु सरकार को भारी राजस्व प्राप्त होता है, लेकिन मुख्यमंत्री के इस फैसले से संकेत मिलता है कि सरकार राजस्व से ऊपर सार्वजनिक हित और सामाजिक सुधार को प्राथमिकता दे रही है. राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम राज्य में शराबबंदी की दिशा में एक क्रमिक शुरुआत हो सकता है, जो विजय के चुनावी वादों और विजन का हिस्सा रहा है.













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