Ladki Bahin Yojana: महाराष्ट्र सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी 'मुख्यमंत्री माझी लाडकी बहिन योजना' के तहत लाभार्थियों के सत्यापन (Verification) के बाद एक बड़ा फैसला लिया है. राज्यव्यापी जांच अभियान के बाद करीब 69 लाख महिलाओं को इस योजना के लिए अपात्र घोषित कर दिया गया है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं महिलाओं को लाभ मिलता रहेगा जो सभी पात्रता शर्तों को पूरी करती हैं. इस छंटनी के कारण फिलहाल अगली किस्त के भुगतान को भी अस्थायी रूप से रोक दिया गया है.
लाभार्थियों की संख्या में भारी गिरावट
जब साल 2024 के विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने इस योजना की शुरुआत की थी, तब लगभग 2.46 करोड़ महिलाओं ने इसके लिए पंजीकरण कराया था. हालांकि, हालिया सत्यापन प्रक्रिया के बाद पात्र लाभार्थियों की संख्या घटकर अब लगभग 1.77 करोड़ रह गई है. इस कटौती का सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ने वाले बोझ पर भी दिखेगा, जो शुरुआती अनुमान के अनुसार 45,000 करोड़ रुपये से घटकर अब करीब 26,000 करोड़ रुपये रह जाने की संभावना है.
क्यों हटाए गए 69 लाख नाम?
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इन महिलाओं को मुख्य रूप से ई-केवाईसी (e-KYC) और अन्य अनिवार्य दस्तावेजों को समय पर अपडेट न करने के कारण हटाया गया है. नाम हटाए जाने के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
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ई-केवाईसी प्रक्रिया का अधूरा होना.
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गलत या अधूरे दस्तावेजों का जमा किया जाना.
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आय या व्यक्तिगत जानकारी में त्रुटियां.
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सरकार द्वारा दी गई अंतिम समय सीमा (30 अप्रैल) तक दस्तावेजों का सत्यापन न कराना.
प्रशासन का कहना है कि अपात्र व्यक्तियों द्वारा लाभ लेने की कई शिकायतों के बाद यह राज्यव्यापी अभियान चलाया गया था.
मार्च और अप्रैल की किस्तों पर लगी रोक
सत्यापन अभियान के चलते सरकार ने इस वर्ष की मार्च और अप्रैल महीने की किस्तों के वितरण को फिलहाल रोक दिया है. एक बार जांच प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद, केवल पात्र महिलाओं के बैंक खातों में ही राशि हस्तांतरित की जाएगी. योजना के तहत गरीब और जरूरतमंद महिलाओं को प्रति माह 1,500 रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है.
गलत तरीके से लाभ लेने वालों पर होगी कार्रवाई?
प्रशासनिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि जिन अपात्र महिलाओं ने अब तक इस योजना का लाभ उठाया है, उनसे राशि की वसूली (Recovery) की जा सकती है. हालांकि, इस पर अंतिम निर्णय वरिष्ठ स्तर पर लिया जाना बाकी है. एक सरकारी अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि शुरुआत में चुनावी माहौल के कारण दस्तावेजों की उतनी बारीकी से जांच नहीं की गई थी, लेकिन अब सरकारी धन के नुकसान को रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जा रहे हैं.
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपनी पात्रता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित पोर्टल पर जाकर अपने दस्तावेजों की स्थिति की जांच करें













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