Bada Mangal 2026: सनातन धर्म में ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले मंगलवार, जिन्हें 'बड़ा मंगल' (Bada Mangal) या 'बुढ़वा मंगल' (Budhwa Mangal) कहा जाता है, का विशेष आध्यात्मिक महत्व है. आज, 12 मई 2026 को ज्येष्ठ माह का दूसरा बड़ा मंगल है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन हनुमान जी (Hanuman Ji) की विधि-विधान से पूजा करने पर भक्तों को बल, बुद्धि और विद्या का आशीर्वाद प्राप्त होता है. भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए उत्तर भारत के प्रमुख हनुमान मंदिरों (Hanuman Temples) में सुरक्षा और दर्शन के विशेष इंतजाम किए गए हैं. यह भी पढ़ें: Parshuram Jayanti 2026 Messages: हैप्पी परशुराम जयंती! अपनों संग शेयर करें ये शानदार हिंदी Quotes, WhatsApp Wishes और Facebook Greetings
सुख-समृद्धि के लिए 'चोला' और 'सिंदूर' का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, दूसरे बड़े मंगल पर हनुमान जी को चमेली के तेल में सिंदूर मिलाकर चोला चढ़ाना अत्यंत शुभ फलदायी माना गया है. इसके साथ ही बजरंगबली को जनेऊ और लाल लंगोट अर्पित करने की भी परंपरा है. ज्योतिषियों का मानना है कि इस उपाय को करने से कुंडली में व्याप्त शनि और मंगल के दोष शांत होते हैं और परिवार में खुशहाली आती है.
राम नाम की तुलसी माला से बढ़ेगा आत्मविश्वास
आज के दिन तुलसी के पत्तों का उपाय विशेष प्रभावी माना जाता है. श्रद्धालु 108 तुलसी के पत्तों पर चंदन से 'राम' नाम लिखकर उनकी माला बना रहे हैं और हनुमान जी को अर्पित कर रहे हैं. मान्यता है कि प्रभु राम का नाम हनुमान जी को अत्यंत प्रिय है, इसलिए इस उपाय से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और साधक को विशेष दैवीय कृपा प्राप्त होती है.
ग्रह दोष शांति और मानसिक शांति के पाठ
दूसरे बड़े मंगल पर ग्रह दोषों को शांत करने के लिए हनुमान जी को बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाकर उसे बच्चों और जरूरतमंदों में बांटने की सलाह दी जाती है. इसके अतिरिक्त, सुंदरकांड का पाठ करना बाधाओं को दूर करने और मानसिक शांति प्राप्त करने का सबसे उत्तम मार्ग माना गया है. जो भक्त पूर्ण विधि-विधान का पालन करना चाहते हैं, वे लाल वस्त्र धारण कर घी का दीपक जलाएं और कम से कम 7 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें. यह भी पढ़ें: Hanuman Jayanti 2026 Messages: हैप्पी हनुमान जयंती! अपनों संग शेयर करें ये शानदार हिंदी WhatsApp Wishes, GIF Greetings, Quotes और Photo SMS
बड़े मंगल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
बड़ा मंगल मनाने की परंपरा मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, विशेषकर लखनऊ में काफी प्राचीन है. माना जाता है कि ज्येष्ठ के मंगलवार को ही हनुमान जी की मुलाकात प्रभु श्री राम से हुई थी. तब से इन मंगलवारों को संकट मोचन की विशेष उपासना के लिए समर्पित किया गया है. आज के दिन जगह-जगह भंडारों का आयोजन और प्याऊ लगवाना भी एक महत्वपूर्ण सामाजिक और धार्मिक कृत्य माना जाता है.













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