Parshuram Jayanti 2026 Messages: हैप्पी परशुराम जयंती! अपनों संग शेयर करें ये शानदार हिंदी Quotes, WhatsApp Wishes और Facebook Greetings
वैशाख शुक्ल तृतीया को भगवान परशुराम की जयंती मनाई जाती है. इस पावन अवसर पर भक्त साहस और शक्ति की प्राप्ति के लिए व्रत रखते हैं, साथ ही आज के इस डिजिटल युग में शुभकामना संदेशों का आदान-प्रदान किया जाता है. ऐसे में आप भी इन हिंदी मैसेजेस, कोट्स, वॉट्सऐप विशेज, फेसबुक ग्रीटिंग्स के जरिए अपनों से हैप्पी परशुराम जयंती कह सकते हैं.
Parshuram Jayanti 2026 Messages in Hindi: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान विष्णु के छठे अवतार, भगवान परशुराम की जयंती (Parshuram Jayanti) के रूप में मनाया जाता है. इस वर्ष यह पर्व 19 अप्रैल 2026 को मनाया जा रहा है. इसी दिन अक्षय तृतीया (Akshay Tritiya) का भी महापर्व है, जिससे इस तिथि का धार्मिक महत्व और भी बढ़ गया है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान परशुराम (Bhagwan Parshuram) का जन्म प्रदोष काल में माता रेणुका और ऋषि जमदग्नि के घर हुआ था. उन्हें शिव का परम भक्त और वीरता का साक्षात स्वरूप माना जाता है.
भगवान परशुराम को हिंदू धर्म के सात चिरंजीवियों में से एक माना गया है, जिसका अर्थ है कि वे अमर हैं और आज भी पृथ्वी पर विद्यमान हैं. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, परशुराम जी न केवल अतीत के योद्धा हैं, बल्कि वे भविष्य के 'कल्कि अवतार' के गुरु और प्रशिक्षक की भूमिका भी निभाएंगे. उन्होंने धरती पर पापी राजाओं और दुष्टों का संहार कर धर्म की मर्यादा पुनः स्थापित की थी.
वैशाख शुक्ल तृतीया को भगवान परशुराम की जयंती मनाई जाती है. इस पावन अवसर पर भक्त साहस और शक्ति की प्राप्ति के लिए व्रत रखते हैं, साथ ही आज के इस डिजिटल युग में शुभकामना संदेशों का आदान-प्रदान किया जाता है. ऐसे में आप भी इन हिंदी मैसेजेस, कोट्स, वॉट्सऐप विशेज, फेसबुक ग्रीटिंग्स के जरिए अपनों से हैप्पी परशुराम जयंती कह सकते हैं.





परशुराम जयंती के दिन व्रत और पूजा का विशेष विधान है. श्रद्धालुओं का मानना है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से जीवन में साहस, शक्ति और मानसिक शांति का संचार होता है.
- विशेष लाभ: निःसंतान दंपत्तियों के लिए यह व्रत संतान प्राप्ति के दृष्टिकोण से विशेष फलदायी माना जाता है.
- दान-पुण्य: इस दिन किए गए दान-पुण्य के कार्यों से समृद्धि और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है.
चूंकि भगवान परशुराम का जन्म प्रदोष काल में हुआ था, इसलिए सायंकाल के समय उनकी विशेष पूजा की जाती है. भक्त इस दिन विष्णु मंदिरों में जाकर प्रार्थना करते हैं और भगवान परशुराम के वीरतापूर्ण जीवन की कथाओं का श्रवण करते हैं. यह पर्व हमें यह याद दिलाता है कि अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना और धर्म के मार्ग पर चलना ही जीवन का वास्तविक उद्देश्य है.
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 19, 2026 06:30 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

