Sachin Tendulkar: देसी जुगाड़ की अनोखी मिसाल! गांव के बच्चों की 'कार' देख प्रभावित हुए सचिन तेंदुलकर, शेयर किया खास VIDEO

'नई दिल्ली: क्रिकेट की दुनिया के दिग्गज सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) इन दिनों सोशल मीडिया पर एक खास वीडियो को लेकर चर्चा में हैं. सचिन ने अपने आधिकारिक 'X' (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर गांव के बच्चों द्वारा बनाई गई एक 'जुगाड़ू गाड़ी' का वीडियो साझा किया है. इस वीडियो में बच्चे लकड़ी, पहियों और लोहे की रॉड की मदद से तैयार की गई एक छोटी कार चलाते नजर आ रहे हैं. बच्चों की इस अद्भुत रचनात्मकता (Creativity) ने 'क्रिकेट के भगवान' कहे जाने वाले सचिन का दिल जीत लिया है.

शोरूम की नहीं, कल्पना की उपज है यह कार

वीडियो साझा करते हुए सचिन तेंदुलकर ने एक बेहद प्रेरक संदेश भी लिखा. उन्होंने कैप्शन में कहा, "भारत के कई छिपे हुए कोनों में से एक से गुजरते हुए, हम एक ऐसी 'कार' को देखने के लिए रुके जो किसी शोरूम से नहीं, बल्कि कल्पना की उपज थी." सचिन ने आगे लिखा कि यह उस तरह की प्रतिभा है जो अनुकूल परिस्थितियों का इंतजार नहीं करती, बल्कि किसी भी तरह से आगे बढ़ने का रास्ता खोज लेती है. उनके अनुसार, इन बच्चों को बस एक सही मौके की तलाश है.  यह भी पढ़े:  घर में स्विमिंग पूल बनाकर मस्ती करते दिखे लड़के, देखें कमाल के देसी जुगाड़ का यह Viral Video

सचिन तेंदुलकर का पोस्ट

लकड़ी और लोहे के जुगाड़ से बनी गाड़ी

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि गांव के कुछ बच्चों ने मिलकर एक छोटी गाड़ी तैयार की है. इस गाड़ी को बनाने में किसी महंगी मशीनरी का नहीं, बल्कि लकड़ी के तख्तों, लोहे की पुरानी रॉड और साधारण पहियों का इस्तेमाल किया गया है. वीडियो में एक बच्चा इस गाड़ी पर बैठा है, जबकि दूसरा उसे धक्का देकर आगे बढ़ा रहा है. सचिन खुद गाड़ी के पास खड़े होकर बच्चों से बात कर रहे हैं और उनकी तकनीक को बारीकी से समझ रहे हैं.

सोशल मीडिया पर फैंस की प्रतिक्रियाएं

सचिन द्वारा यह वीडियो साझा किए जाने के बाद से ही इंटरनेट पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है. क्रिकेट फैंस और सोशल मीडिया यूजर्स बच्चों की इस कलाकारी की जमकर तारीफ कर रहे हैं. कई यूजर्स ने बच्चों को 'भविष्य का इंजीनियर' बताया है, तो कुछ का कहना है कि भारत के ग्रामीण इलाकों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है.

सीखने का संदेश

यह पहली बार नहीं है जब सचिन ने जमीनी स्तर की प्रतिभा को सराहा हो. वे अक्सर ग्रामीण भारत की खेल प्रतिभा और नवाचारों (Innovations) को प्रोत्साहित करते रहते हैं. इस वीडियो के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सीमित संसाधनों के बावजूद अगर इच्छाशक्ति और कल्पना हो, तो कुछ भी बनाना संभव है. फिलहाल यह वीडियो विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से देखा और साझा किया जा रहा है.