बच्चों के लिए अधिक फिल्में बननी चाहिए, मैं उनके लिए फिल्में बनाऊंगा: शूजीत सरकार
फिल्म निर्माता शूजीत सरकार ने बच्चों के लिए फिल्में न बनाने के लिए खुद को 'दोषी' माना है. उन्होंने कहा कि कैसे हॉलीवुड के विपरीत हिंदी सिनेमा में बच्चों के लिए बहुत कम फिल्में बनती हैं.
मुंबई, 15 अगस्त : फिल्म निर्माता शूजीत सरकार ने बच्चों के लिए फिल्में न बनाने के लिए खुद को 'दोषी' माना है. उन्होंने कहा कि कैसे हॉलीवुड के विपरीत हिंदी सिनेमा में बच्चों के लिए बहुत कम फिल्में बनती हैं. शूजीत सरकार ने आईएएनएस से खास बातचीत में बताया कि हॉलीवुड में बच्चों के लिए सबसे अच्छे कंटेंट हैं, जबकि बॉलीवुड में अब भी इसकी कमी है. उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि यह बहुत महत्वपूर्ण है."
सरकार ने कहा कि हम सत्यजीत रे के पूरे करियर से सीख सकते हैं. उन्होंने तीन फिल्में बनाईं, जो न केवल बुजुर्गों बल्कि बच्चों पर भी केंद्रित थीं. इसलिए, यह कुछ ऐसा है जिस पर मैं लोगों और फिल्म निर्माताओं के साथ चर्चा करता हूं. वे इस बात पर सहमत हुए हैं कि फिल्म उद्योग को बच्चों के लिए अधिक फिल्में बनानी चाहिए. अभिनेता ने कहा, "इसमें मैं खुद को भी दोषी मान रहा हूं क्योंकि मैंने बच्चों के लिए फिल्में बनाने के बारे में नहीं सोचा है. लेकिन हां, अब मैं बच्चों के लिए फिल्में जरूर बनाने जा रहा हूं." यह भी पढ़ें : आप’ प्रमुख के जेल से बाहर आने के बाद सुनीता केजरीवाल की राजनीतिक भूमिका समाप्त हो सकती है: सिसोदिया
बॉलीवुड बुरे दौर से गुजर रहा है और कई फिल्में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉ हो रही हैं. क्या वह फिल्म निर्माताओं को दोषी मानते हैं या दर्शक कंटेंट से ऊब चुके हैं? इस सवाल पर 'पीकू', 'अक्टूबर', 'विकी डोनर', और 'सरदार उधम' जैसी प्रशंसित फिल्मों के निर्माता शूजीत सरकार ने कहा, "फिल्में फ्लॉप होने की वजह शायद ये दोनों चीजें हो सकती हैं. लेकिन फिल्म बनाने के लिए सबसे महत्वपूर्ण काम है, सिनेमा (बड़े पर्दे) के लिए लगातार फिल्में बनाना और उन्हें देखने जाना."
उन्होंने कहा, "बड़ी स्क्रीन के साथ बंद माहौल में देखना मुझे लगता है कि यह कुछ तलाशने और न केवल आनंद लेने, बल्कि सीखने और समझने और कहीं न कहीं इससे प्रभावित होने की चीज है."
सरकार के लिए सिनेमा सिर्फ पॉपकॉर्न लेकर सिनेमा हॉल जाने से कहीं ज्यादा है. उन्होंने कहा, "हां, पॉपकॉर्न के साथ और फिल्म में आनंदित होकर जाना चाहिए, लेकिन एक फिल्म निर्माता के रूप में मुझे आपको कहीं न कहीं सोचने के लिए कुछ देना होगा. यह मेरे लिए सचमुच महत्वपूर्ण है. मुझे लगता है कि इस चीज की कमी है.''
बता दें कि फिल्म निर्माता शूजीत सरकार को मेलबर्न में आयोजित होने वाले इंडियन फिल्म फेस्टिवल के 15वें संस्करण के लिए जूरी में शामिल किया गया है. उन्होंने कहा कि जूरी का हिस्सा बनना कभी-कभी डरावना होता है क्योंकि आप एक छोर की दूसरी तरफ होते हैं. आम तौर पर आपकी फिल्मों को जज किया जाता है, लेकिन यहां आपको दूसरे की फिल्मों को जज करना है. आम तौर पर मैं ऐसा नहीं करता.
मैंने 'मितु लांगे' की खातिर ऐसा किया. उन्होंने आईएफएफएम के लिए अद्भुत काम किया है. यह ऑस्ट्रेलिया में भारत के लिए बहुत ही मैत्रीपूर्ण आयोजन है. ऑस्ट्रेलिया में भारतीय और दक्षिण एशियाई फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने एक सराहनीय काम किया है. मैं इस जूरी का हिस्सा बनकर खुद को भाग्यशाली मानता हूं.''
शूजीत सरकार ने आगे कहा कि लघु फिल्में फीचर फिल्मों जितनी ही महत्वपूर्ण हैं. ये मुख्यधारा की फिल्मों जितनी ही महत्वपूर्ण हैं. उन्होंने कहा, "इसलिए, मैं थोड़ा घबराया हुआ हूं, लेकिन मैं फिल्मों को यथासंभव निष्पक्षता से आंकने की कोशिश करूंगा. जूरी सदस्य के रूप में काम करने के अलावा, उनकी फिल्म "उमेश क्रॉनिकल्स" भी फिल्म महोत्सव में प्रदर्शित की जाएगी."
फिल्मों का निर्देशन या फिर इसका निर्माण करना, दोनों में से अधिक चुनौतीपूर्ण क्या है? इस सवाल पर निर्माता शूजीत सरकार ने कहा, "फिल्मों का निर्माण करना एक काम है क्योंकि आप एक आईना बन जाते हैं और आप उस निर्देशक को देख रहे होते हैं जो फिल्म बना रहा है, और कभी-कभी यह सुनिश्चित करना होता है फिल्में एक खास बजट में बनाई जाए. इसमें रचनात्मक रूप से कोई समझौता नहीं किया जाता है, इसलिए इसको ध्यान रखने की जरूरत होती है. फिल्म निर्माता के तौर पर मैं सहज हूं लेकिन इसका निर्माण करना चुनौतीपूर्ण है.
(The above story first appeared on LatestLY on Aug 15, 2024 03:57 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

