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Rani Lakshmibai Punyatithi 2025: रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि पर इन हिंदी Messages, Photo SMS, Quotes के जरिए उन्हें अर्पित करें श्रद्धांजलि

अंग्रेजों के खिलाफ देश की आजादी की पहली लड़ाई यानी 1857 के विद्रोह के दौरान रानी लक्ष्मीबाई ब्रिटिश राज के प्रतिरोध का प्रतीक बन गई थीं. देश की महान वीरांगना और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरगाथा इतिहास के पन्नों में दर्ज है, जिसे आज भी किस्से या कहानी के तौर पर बच्चों को सुनाया जाता है. रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि पर इन हिंदी मैसेजेस, फोटो एसएमएस, कोट्स के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं.

Rani Lakshmibai Punyatithi 2025: रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि पर इन हिंदी Messages, Photo SMS, Quotes के जरिए उन्हें अर्पित करें श्रद्धांजलि
रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि 2025 (Photo Credits: File Image)

Rani Lakshmibai Punyatithi 2025 Quotes: झांसी की रानी लक्ष्मीबाई एक ऐसी वीरांगना थीं, जिन्होंने 1857 के विद्रोह की नींव रखी थी. इस विद्रोह के चलते अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिल गई थी. आखिरी दम तक अंग्रेजों से लोहा लेने वाली झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि (Rani Lakshmibai Punyatithi) पर लोग उनकी वीरता और शौर्यगाथा को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. आज (18 जून 2025) झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि मनाई जा रही है. बताया जाता है कि अपनी अंतिम सांस तक अंग्रेजों से लोहा लेने वाली रानी लक्ष्मीबाई (Rani Lakshmibai) 17 जून 1858 को अपनी आखिरी जंग के लिए तैयार हुई थीं और अंग्रेजों से लड़ते हुए 18 जून को वीरगति को प्राप्त हुई थीं. लॉर्ड केनिंग की रिपोर्ट के अनुसार, जंग के दौरान उन्हें एक सैनिक ने पीछे से गोली मारी थी. झांसी की रानी लक्ष्मीबाई एक ऐसी वीरांगना थीं, जिन्होंने 1857 के विद्रोह की नींव रखी थी और इस विद्रोह के चलते ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिल गई थी.

अंग्रेजों के खिलाफ देश की आजादी की पहली लड़ाई यानी 1857 के विद्रोह के दौरान रानी लक्ष्मीबाई ब्रिटिश राज के प्रतिरोध का प्रतीक बन गई थीं. देश की महान वीरांगना और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की वीरगाथा इतिहास के पन्नों में दर्ज है, जिसे आज भी किस्से या कहानी के तौर पर बच्चों को सुनाया जाता है. रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि पर इन हिंदी मैसेजेस, फोटो एसएमएस, कोट्स के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर सकते हैं.

1- ‎मैं एक अर्थहीन जीवन जीने की अपेक्षा एक सार्थक मृत्यु मरना पसंद करूंगी.

रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि 2025 (Photo Credits: File Image)

2- मैं अपनी झांसी नहीं दूंगी.

रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि 2025 (Photo Credits: File Image)

3- स्वतंत्रता के विचार को किसी भी रूप या आकार में बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए.

रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि 2025 (Photo Credits: File Image)

4- बलिदान और संघर्ष के बिना स्वतंत्रता प्राप्त करना संभव नहीं है. आइए हम सब एकजुट होकर अपने राष्ट्र की बेहतरी के लिए मिलकर काम करें.

रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि 2025 (Photo Credits: File Image)

5- मैदान-ए-जंग मे मारना है, फिरंगी से नहीं हारना है.

रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि 2025 (Photo Credits: File Image)

6- हम आजादी के लिए लड़ते हैं, इस कारण हमें मौत का डर नहीं है.

रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि 2025 (Photo Credits: File Image)

7- सफलता का एकमात्र रास्ता साहस और कड़ी मेहनत है.

रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि 2025 (Photo Credits: File Image)

8- जीवन भर कैदी बने रहने से बेहतर है कि आजादी के लिए लड़ते हुए मर जाएं.

रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि 2025 (Photo Credits: File Image)

9- न्याय का मार्ग ही कर्तव्य का मार्ग है.

रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि 2025 (Photo Credits: File Image)

10- यदि युद्ध के मैदान में हार गए और मारे गए तो निश्चित रुप से मोक्ष प्राप्त करेंगे.

रानी लक्ष्मीबाई की पुण्यतिथि 2025 (Photo Credits: File Image)

मातभूमि की रक्षा के लिए अंग्रेजों से लोहा लेने और अपने प्राणों को न्योछावर करने वाली इतिहास की महान वीरांगना झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का जन्म 19 नवंबर 1835 को बनारस में हुआ था. जन्म के बाद उनका नाम मणिकर्णिका रखा था, जबकि हर कोई उन्हें प्यार से मनु कहकर बुलाता था. सन 1850 में महज 15 साल की उम्र में उनका विवाह झांसी के महाराज गंगाधर राव के साथ हुआ था और विवाह के बाद उनका नाम रानी लक्ष्मीबाई कर दिया गया.

(The above story first appeared on LatestLY on Jun 18, 2025 06:00 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).