त्योहार

Karwa Chauth 2019: करवा चौथ का व्रत करते समय इन बातों का रखें ध्यान! तभी होंगे मनोरथ पूरे!

पति के दीर्घायु, अच्छी सेहत और मधुर दाम्पत्य जीवन के लिए देश भर में अधिसंख्य हिंदू महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखती है. करवा चौथ का शाब्दिक अर्थ है, ‘करवा’ अर्थात ‘मिट्टी का पात्र’ एवं चौथ का मतलब ‘चतुर्थी’, यानी इस दिन मिट्टी से बने पात्र का विशेष महत्व होता है. सभी सुहागन महिलाएं बड़ी शिद्दत से इस पर्व का इंतजार करती हैं.

Karwa Chauth 2019: करवा चौथ का व्रत करते समय इन बातों का रखें ध्यान! तभी होंगे मनोरथ पूरे!
करवा चौथ (Photo credits: YouTube grab)

Karwa Chauth 2019: पति के दीर्घायु, अच्छी सेहत और मधुर दाम्पत्य जीवन के लिए देश भर में अधिसंख्य हिंदू महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखती है. करवा चौथ का शाब्दिक अर्थ है, ‘करवा’ अर्थात ‘मिट्टी का पात्र’ एवं चौथ का मतलब ‘चतुर्थी’, यानी इस दिन मिट्टी से बने पात्र का विशेष महत्व होता है. सभी सुहागन महिलाएं बड़ी शिद्दत से इस पर्व का इंतजार करती हैं. दरअसल हर व्रत का अपना विधान, अपनी परंपरा होती है. इसलिए कोई भी व्रत करने से पूर्व उसके विधि-विधान एवं परंपरा को समझना जरूरी होता है. करवा चौथ व्रत एवं पूजा-अर्चना के भी कुछ खास नियम एवं रिवाज होते हैं, जिनका पालन करना बहुत जरूरी होता है. इसके बिना करवा चौथ का व्रत अधूरा माना जाता है. यहां ज्योतिषाचार्य पंडित रवींद्र पाण्डेय उन महत्वपूर्ण नियमों एवं आवश्यक परंपराओं के बारे में बता रहे हैं.

मेहंदी के मायने

करवा चौथ की शुरूआत मेहंदी से होती है. मान्यता है कि जिस सुहागन के हाथों-पैरों में मेहंदी ज्यादा गहरी रचती है, उसे उसके पति एवं परिवार से अधिक प्रेम प्राप्त होता है. ऐसा भी कहा जाता है कि गहरी मेहंदी का रचना सुहागन के पति की अच्छी सेहत और दीर्घायु का प्रतीक होता है. मेहंदी की बढ़ती उपयोगिता के कारण ही करवा चौथ के आगमन से एक सप्ताह पूर्व से ही मेहंदी का व्यवसाय फलने-फूलने लगता है. आप चाहें ब्यूटी पार्लर में जाकर मेहंदी लगवाएं, सड़क किनारे बैठे मेहंदी डिजाइनर से अथवा ऑनलाइन की मदद से मेंहदी डिजाइनर को घर बुलवा कर मेहंदी लगवा सकती हैं.

सास-सुहागन और सरगी

सरगी वस्तुतः सास बहू के प्रगाढ़ प्रेम का प्रतीक होता है. करवा चौथ से एक दिन पूर्व सास अपनी प्रिय बहू को उसकी पसंद के अनुसार पकवान, फल, मिठाई, एवं वस्त्र से सजा थाल जिसे सरगी कहते हैं भेंट करती है और अखण्ड सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद देती है. करवा चौथ के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व सुहागन सरगी की थाल में रखे पकवान खाती है. मान्यता है कि सास द्वारा दी गई सरगी में इतनी ऊर्जा होती है, व्रत का पूरा दिन सहजता से कट जाता है.

निर्जल और निराहार

प्राचीनकाल में देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए लोग कठिन तपस्या करते थे. करवा चौथ के इस उपवास में भी भगवान शिव, माता पार्वती और श्रीगणेश को प्रसन्न करने और अखण्ड सौभाग्यवती का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सुहागन महिलाएं पूरे दिन कठोर व्रत रखती हैं. निराहार एवं निर्जल रहते हुए पूरा दिन गुजारना आसान नहीं होता. लेकिन सच्ची आस्था एवं निष्ठा कठिन से कठिन व्रत करने की शक्ति प्रदान करती है. अलबत्ता गर्भवती, बीमार और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए थोड़ी छूट देने का भी विधान है. व्रत के दौरान ये महिलाएं दूध, चाय और जल आदि ग्रहण कर सकती हैं.

शिव-गौरी-गणेश जी की मिट्टी की हस्तनिर्मित प्रतिमा

करवा चौथ में पूजा-अर्चना के लिए शुद्ध एवं स्वच्छ पीली मिट्टी से भगवान शिव, पार्वती और श्रीगणेश जी की छोटी-छोटी मूर्तियां बनाकर उन्हें लाल कपड़ा बिछी चौकी पर स्थापित करनी चाहिए. अब माता गौरी के सिंदूर, बिंदी, चुन्नी, चूड़ी चढाई जाती है और शिवजी एवं गणेश जी को पुष्प, अक्षत, चंदन, पुष्प, वस्त्री एवं जनेऊ चढ़ाते हैं. उत्तर भारत में लौकी का पत्ता पीसकर उसे एक दीवार के छोटे से आयताकार हिस्से को इससे रंगते है. अब पीसे हुए चावल के लेप से इस रंगे हुए हिस्से पर करवा माता का चित्र बनाते हैं. करवा चौथ की शाम चंद्रोदय से पूर्व भगवान शिव, पार्वती और श्रीगणेश जी की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है, ताकि उन्हें अखंड सौभाग्य, यश एवं कीर्ति प्राप्त हो सके.

करवा चौथ की पारंपरिक कथा सुनना जरूरी

करवा चौथ से संबंधित कई कथाएं अलग-अलग आध्यात्मिक पुस्तकों में उपलब्ध हैं. करवा चौथ को पूरे दिन व्रत रखने के बाद शाम को भगवान शिव जी के पूरे परिवार की पूजा की जाती है. उपवासी महिलाएं एक स्थान पर एकत्र होकर करवा चौथ की पारंपरिक कथा सुनती और सुनाती हैं. मान्यता है कि हर उपवासी महिला को एक कथा सुनना अथवा सुनानी चाहिए.

(The above story first appeared on LatestLY on Oct 15, 2019 08:48 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).