
म्यांमार में 28 मार्च को आए भीषण भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 2,056 हो गई है, जबकि 3,900 से अधिक लोग घायल हुए हैं. इसके अलावा, करीब 270 लोग अब भी लापता हैं. यह जानकारी म्यांमार की सत्तारूढ़ जुंटा सरकार ने सोमवार को दी. भूकंप की तीव्रता 7.7 मैग्नीट्यूड थी, जिससे कई इलाकों में भारी तबाही मची. सबसे ज्यादा नुकसान मंडले, नेपीतॉ, सगाइंग और बागो क्षेत्र में हुआ है.
इस विनाशकारी भूकंप के बाद कई देशों ने म्यांमार की मदद के लिए हाथ बढ़ाए हैं. यूरोपीय संघ, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण कोरिया ने राहत कार्यों के लिए लाखों डॉलर की सहायता देने की घोषणा की है.
हालांकि, अमेरिका की ओर से अब तक कोई मदद नहीं पहुंची है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सहायता का आश्वासन दिया है, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.
भारत का "ऑपरेशन ब्रह्मा"
म्यांमार में फंसे लोगों की मदद के लिए भारत ने "ऑपरेशन ब्रह्मा" के तहत राहत और बचाव कार्य शुरू किया है. भारतीय दूतावास के मुताबिक, रविवार को भारतीय बचाव दल मंडले पहुंचा, जहां वे जीवित बचे लोगों को खोजने और घायलों को चिकित्सा सहायता देने में जुटे हैं.
भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, "ऑपरेशन ब्रह्मा – हमारी टीमें कल से मंडले में राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं. और अधिक सहायता जल्द ही पहुंचाई जाएगी. हमारी संवेदनाएं म्यांमार के प्रभावित लोगों के साथ हैं."
विनाश के बाद पुनर्निर्माण की चुनौती
म्यांमार के कई हिस्सों में अब भी बिजली, पानी और आवश्यक सेवाओं की कमी बनी हुई है. सरकार और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां राहत कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने में जुटी हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि म्यांमार को इस आपदा से उबरने में काफी समय लगेगा. इस बीच, सरकार से अपील की जा रही है कि प्रभावित लोगों तक जल्द से जल्द राहत सामग्री पहुंचाई जाए.