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2019 में पांच बैक्टीरिया के कारण भारत में हुईं 6.8 लाख मौतें: लैंसेट

दुनिया भर में संक्रमण मौत का प्रमुख कारण बना हुआ है. भारत में 2019 में कम से कम 6.8 लाख मौतों के लिए पांच बैक्टीरिया जिम्मेदार थे. यह खुलासा लैंसेट के एक नए अध्ययन से पता चला है.

2019 में पांच बैक्टीरिया के कारण भारत में हुईं 6.8 लाख मौतें: लैंसेट
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: Pixabay)

नई दिल्ली, 23 नवंबर : दुनिया भर में संक्रमण मौत का प्रमुख कारण बना हुआ है. भारत में 2019 में कम से कम 6.8 लाख मौतों के लिए पांच बैक्टीरिया जिम्मेदार थे. यह खुलासा लैंसेट के एक नए अध्ययन से पता चला है. भारत में पांच घातक जीवाणु ई.कोली के साथ-साथ एस. निमोनिया, के. निमोनिया, एस. ऑरियस और ए. बॉमनी आदि पाए जाते हैं. अकेले ई. कोली ने 2019 में भारत में कम से कम 1.6 लाख लोगों की जान ली. वैश्विक स्तर पर 11 संक्रामक सिंड्रोम में पाए जाने वाले 33 जीवाणुओं के जरिए 77 लाख मौतें हुईं. लैंसेट ने कहा है, इस अध्ययन में जिन 33 जीवाणु रोगजनकों की हमने जांच की, वे वैश्विक स्तर पर रोग फैलाने के एक प्रमुख स्रोत हैं.

शोधकर्ताओं ने कहा, इसलिए इन पर प्राथमिकता के आधार पर नियंत्रण पाने का प्रयास करना चाहिए. बर्डन ऑफ एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस 2019 स्टडी के अनुसार शोधकतार्ओं ने ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज, इंजरीज एंड रिस्क फैक्टर्स स्टडी (जीबीडी) 2019 के तरीकों का इस्तेमाल करते हुए 2019 में 11 संक्रामक सिंड्रोमों में 33 बैक्टीरियल जेनेरा या प्रजातियों से जुड़ी मौतों का अनुमान लगाया. 2019 में संक्रमण से अनुमानित 13.7 मिलियन मौतों में से इन जीवाणुओं से होने वाली मौतें 7.7 थीं. यह भी पढ़ें : ‘अच्छे’ Cholesterol का स्तर ज्यादा होना हृदय रोग के जोखिम में कमी की गारंटी नहीं

54.9 प्रतिशत मौतों के लिए स्टैफिलोकोकस ऑरियस, एस्चेरिचिया कोली, स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनिया, क्लेबसिएला न्यूमोनिया और स्यूडोमोनास एरुगिनोसा जिम्मेदार थे. अध्ययन में कहा गया है, इन जीवाणु रोगजनकों से उप-सहारा अफ्रीका सुपर-क्षेत्र में सबसे अधिक मौतें हुईं. 135 देशों में मृत्यु का प्रमुख कारण सॉरियस जीवाणु था. यह विश्व स्तर पर 15 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों में सबसे अधिक मौतों से भी जुड़ा था.

5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मौतो के लिए एस निमोनिया सबसे बड़ा कारण रहा. 2019 में, 6 मिलियन से अधिक मौतें तीन जीवाणु संक्रामक सिंड्रोम के परिणामस्वरूप हुईं, जिनमें कम श्वसन संक्रमण और रक्तप्रवाह संक्रमण प्रत्येक के कारण 2 मिलियन से अधिक मौतें हुईं और पेरिटोनियल और इंट्रा-पेट के संक्रमण के कारण 1 मिलियन से अधिक मौतें हुईं.

(The above story first appeared on LatestLY on Nov 23, 2022 11:05 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).