नेतन्याहू को पद से हटाने को मुश्किल बनाने वाले कानून के खिलाफ सुनवाई शुरू
इजराइल के उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को उस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर दी जो मौजूदा प्रधानमंत्री को पद से हटाने को कठिन बनाता है।
यरूशलम, 28 सितंबर: इजराइल के उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को उस कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर दी जो मौजूदा प्रधानमंत्री को पद से हटाने को कठिन बनाता है. आलोचकों का कहना है कि यह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बचाने के लिए बनाया गया है, जो कथित भ्रष्टाचार के मुकदमे का सामना करते हुए न्याय प्रणाली को नया स्वरूप देने के लिए काम कर रहे हैं. यह सुनवाई देश की न्याय प्रणाली को बदलने के लिए प्रस्तावित कानून और सरकारी कदमों के खिलाफ कई प्रमुख अदालती चुनौतियों का हिस्सा है.
यह कदम इस प्रस्तावित बदलाव को लेकर इजराइल में महीनों की उथल-पुथल के बाद आया है। इस प्रस्तावित कानून ने नेतन्याहू की सरकार और न्यायपालिका के बीच दरार को गहरा कर दिया है। नेतन्याहू अभूतपूर्व विरोध के बावजूद कानूनों को कमजोर करना चाहते हैं.
कानून को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर बृहस्पतिवार की सुनवाई 11-न्यायाधीशों के विस्तारित पैनल के सामने हुई, जो विचार-विमर्श के महत्व को रेखांकित करती है. नेतन्याहू के इजराइल के अब तक के सबसे धार्मिक और राष्ट्रवादी सत्तारूढ़ गठबंधन ने मार्च में “अक्षमता कानून” के रूप में एक संशोधन पारित किया था.
संशोधन के तहत, केवल प्रधानमंत्री या सरकार में, किसी नेता की अयोग्यता निर्धारित करने की शक्ति निहित की गयी है. इससे संबंधित पिछला कानून उन दोनों परिस्थितियों के बारे में अस्पष्ट था जिनमें एक प्रधानमंत्री को अयोग्य माना जा सकता था, और यह भी कि किसके पास यह (अयोग्य) घोषित करने का अधिकार था। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि संशोधन स्पष्ट रूप से अटॉर्नी जनरल को ऐसा करने की क्षमता से वंचित कर देता है, जो ऐतिहासिक रूप से किसी प्रधानमंत्री को पद के लिए अयोग्य घोषित करने की शक्ति रखता है.
आलोचकों के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की गठबंधन सरकार ने विधेयक को मंजूरी दी जो भ्रष्टाचार और हितों के टकराव के मामले में सुनवाई का सामना कर रहे इजराइली नेता को शासन के अयोग्य करार दिए जाने से बचाएगा. उनका यह भी कहना है कि यह कानून नेतन्याहू के लिए बनाया गया है और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देता है. उन आलोचनाओं के आधार पर, बृहस्पतिवार की सुनवाई इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रही है कि तुरंत लागू किए जाने के बजाय क्या कानून अगले राष्ट्रीय चुनावों के बाद लागू होना चाहिए ताकि इसकी व्याख्या एक व्यक्तिगत कानून के रूप में न की जाए. मामले में जनवरी तक फैसला आने की उम्मीद है.
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(The above story first appeared on LatestLY on Sep 28, 2023 04:16 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

