Rani Durgavati Death Anniversary 2021: शौर्य और पराक्रम की मिसाल थीं रानी दुर्गावती, लड़ाई में मुगलों को दी थी मात, जानें इनके बारें में कुछ रोचक बातें
भारत के इतिहास में महिला योद्धा की संख्या कम नहीं है. लेकिन उनमें से केवल रानी दुर्गावती ही हैं जिन्हें उनके बलिदान और वीरता से गोंडवाना (गोंडवाना) की कुशल शासक के रूप में याद किया जाता है. 24 जून को देश उनका बलिदान दिवस मनाता है, जब उन्होंने मुगलों के सामने हार नहीं मानी और अंतिम समय तक मुगल सेना के सामने खुद को बलिदान कर दिया.
Rani Durgavati Death Anniversary 2021: भारत के इतिहास में महिला योद्धा की संख्या कम नहीं है. लेकिन उनमें से केवल रानी दुर्गावती ही हैं जिन्हें उनके बलिदान और वीरता से गोंडवाना (गोंडवाना) की कुशल शासक के रूप में याद किया जाता है. 24 जून को देश उनका बलिदान दिवस मनाता है, जब उन्होंने मुगलों के सामने हार नहीं मानी और अंतिम समय तक मुगल सेना के सामने खुद को बलिदान कर दिया. यह भी पढ़ें: Sant Kabir Das Jayanti 2021 Quotes: संत कबीर दास जयंती पर WhatsApp, Facebook, Instagram, Twitter के जरिए उनके प्रसिद्ध दोहे भेजकर दें अपनों को शुभकामनाएं
रानी दुर्गावती के पति दलपत शाह का मध्य प्रदेश के गोंडवाना क्षेत्र में रहने वाले गोंड वंश के 4 राज्यों गढ़मंडला, देवगढ़, चंदा और खेरला पर अधिकार था. दुर्भाग्य से रानी दुर्गावती से शादी के 4 साल बाद राजा दलपत शाह का निधन हो गया. अपने पति की मृत्यु के समय दुर्गावती के पुत्र नारायण 3 वर्ष के थे, इसलिए रानी को स्वयं गढ़मंडला का शासन संभालना पड़ा, वर्तमान जबलपुर उनके राज्य का केंद्र था. रानी ने इस क्षेत्र पर 16 वर्षों तक शासन किया और एक कुशल प्रशासक की अपनी छवि बनाई. लेकिन उनकी वीरता और पराक्रम के चर्चे ज्यादा थे.
ऐसा कहा जाता है कि एक बार जब उन्हें किसी शेर की खबर मिली, तो वे तुरंत अपने हथियार उठाकर उसकी ओर चल पड़ी और जब तक उन्होंने उसे मार नहीं डाला, तब तक उन्होंने पानी भी नहीं पिया. रानी दुर्गावती भी बेहद खूबसूरत थीं. मानिकपुर के सूबेदार ख्वाजा अब्दुल मजीद खान ने अकबर को रानी दुर्गावती के खिलाफ भड़काया, जिसके बाद अकबर चाहता था कि अन्य राजपूत घरों की विधवाओं की तरह दुर्गावती भी उसके महल शोभा बढ़ाए. कहा जाता है कि अकबर ने उन्हें एक सोने का पिंजरा यह कहते हुए भेजा था कि रानियों को महल के अंदर ही सीमित कर देना चाहिए, लेकिन दुर्गावती ने जो उत्तर दिया अकबर उससे तिलमिला गया.
रानी दुर्गावती ने मुगल शासकों के खिलाफ कड़ा संघर्ष किया था और उन्हें कई बार हराया था और हर बार उन्होंने दमन के आगे घुटने टेकने से इनकार करते हुए स्वतंत्रता और अस्मिता के लिए संघर्ष की भूमि को चुना था. 24 जून, 1564 को जब मुगल सेना ने दोबारा हमला किया, तब तक दो हमलों के बाद रानी की सैन्य ताकत कम हो गई थी. रानी ने अपने पुत्र नारायण को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया. युद्ध के दौरान पहला बाण उनके हाथ में लगा, रानी ने उसे निकाल दिया. दूसरा बाण उनकी आंख में लगा, रानी ने उसे भी खींच लिया, लेकिन उसका सिरा आंख में ही रह गया. तीसरा तीर उनके गले में घुस गया. यह जानकर कि उनका अंत निकट था, रानी ने वज़ीर आधार सिंह से अपनी तलवार से उनकी गर्दन काटने का अनुरोध किया, लेकिन उसने मना कर दिया. जिसके बाद रानी ने खुद अपने आपको खंजर मारकर आत्म-बलिदान दे दिया.
(The above story first appeared on LatestLY on Jun 24, 2021 01:33 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

