अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर किए, जिसमें अमेरिका की चुनाव प्रणाली में व्यापक बदलाव की मांग की गई है. इस आदेश के तहत, मतदाताओं को अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण दिखाना अनिवार्य होगा, केवल चुनाव दिवस तक प्राप्त होने वाले डाक मतपत्रों को ही मान्यता दी जाएगी, और कुछ चुनावों में गैर-अमेरिकी नागरिकों को दान देने से प्रतिबंधित किया जाएगा.
भारत और अन्य देशों का उदाहरण दिया
ट्रंप ने भारत और ब्राज़ील का उदाहरण देते हुए कहा कि अमेरिका उन बुनियादी और आवश्यक चुनावी सुरक्षा उपायों को लागू करने में विफल हो रहा है, जो आधुनिक विकसित और विकासशील देशों में आम हैं.
उन्होंने कहा, "भारत और ब्राजील में मतदाता पहचान को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ा जा रहा है, जबकि अमेरिका अभी भी नागरिकता के लिए स्वयं-घोषणा (Self-attestation) पर निर्भर है."
ट्रंप ने जर्मनी और कनाडा की चुनावी व्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि वहां मतों की गिनती के लिए पेपर बैलट अनिवार्य हैं, जबकि अमेरिका में अलग-अलग राज्यों में मतदान के तरीके बहुत अलग-अलग हैं और उनमें बुनियादी सुरक्षा उपायों का अभाव है.
ट्रंप ने डेनमार्क और स्वीडन की चुनावी प्रक्रिया का भी हवाला दिया, जहां डाक मतपत्रों को केवल उन्हीं लोगों तक सीमित रखा जाता है, जो व्यक्तिगत रूप से मतदान नहीं कर सकते. वहां चुनाव दिवस के बाद प्राप्त मतों को मान्यता नहीं दी जाती, भले ही वे पहले ही डाक में भेज दिए गए हों.
ट्रंप का तर्क: चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी होने चाहिए
राष्ट्रपति ट्रंप, जो जनवरी में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार कमला हैरिस को हराकर दोबारा सत्ता में लौटे, ने कहा कि "निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी चुनाव जो धोखाधड़ी, त्रुटियों या संदेह से मुक्त हों, हमारे संवैधानिक गणराज्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं."
उन्होंने आगे कहा कि "अमेरिकी नागरिकों के मतों की गिनती सही तरीके से होनी चाहिए, बिना किसी अवैध हस्तक्षेप के. यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि जो भी चुनाव जीते, वह पूरी पारदर्शिता के साथ जीते."
ट्रंप इससे पहले भी अमेरिकी चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल उठा चुके हैं. उन्होंने 2020 के राष्ट्रपति चुनावों में अपनी हार के बाद कई बार मतगणना प्रक्रिया और चुनावी गड़बड़ियों का मुद्दा उठाया था.
ट्रंप का चुनाव सुधार आदेश: क्या हैं प्रमुख बिंदु?
1. अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण आवश्यक
ट्रंप के कार्यकारी आदेश के अनुसार, अमेरिकी मतदाता पंजीकरण फॉर्म में बदलाव किया जाएगा, ताकि प्रत्येक नए मतदाता को पंजीकरण के समय अमेरिकी नागरिकता का प्रमाण पत्र, पासपोर्ट या जन्म प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य हो.
इसके अलावा, सभी राज्यों को अपने मतदाता सूचियों और मतदाता पंजीकरण रिकॉर्ड को होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और सरकारी दक्षता विभाग (Department of Government Efficiency) को सौंपने के निर्देश दिए गए हैं. यह कदम चुनावी धोखाधड़ी को रोकने के लिए उठाया गया है.
अगर कोई राज्य चुनावी अपराधों की जांच में संघीय एजेंसियों के साथ सहयोग करने से इनकार करता है, तो उसे संघीय अनुदान (Federal Grants) खोने का खतरा होगा.
2. डाक मतपत्र केवल चुनाव दिवस तक मान्य होंगे
ट्रंप के आदेश के अनुसार, डाक या अनुपस्थित मतपत्र (Mail-in or Absentee Ballots) केवल चुनाव दिवस तक प्राप्त होने पर ही मान्य होंगे.
फिलहाल, अमेरिका के 18 राज्यों में ऐसे नियम हैं, जिनमें चुनाव दिवस के बाद भी डाक द्वारा भेजे गए मतपत्रों को गिना जाता है, बशर्ते वे समय पर पोस्टमार्क किए गए हों. लेकिन ट्रंप के नए आदेश के तहत अब केवल चुनाव दिवस तक प्राप्त मतपत्र ही स्वीकार किए जाएंगे.
3. क्यूआर कोड आधारित मतपत्रों पर रोक
ट्रंप ने चुनाव सहायता आयोग (Election Assistance Commission) को निर्देश दिया है कि वह मतदान प्रणाली की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नए दिशानिर्देश जारी करे.
इसके तहत, मतगणना प्रक्रिया में बारकोड (Barcode) या क्यूआर कोड (QR Code) आधारित मतपत्रों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जाएगा. ट्रंप ने आयोग को छह महीने के भीतर नई चुनावी सुरक्षा प्रणाली की समीक्षा करने और जरूरत पड़ने पर चुनावी प्रणाली को पुनः प्रमाणित (Re-certify) करने का आदेश दिया है.
4. गैर-अमेरिकी नागरिकों द्वारा चुनावी चंदे पर प्रतिबंध
ट्रंप के कार्यकारी आदेश में यह भी कहा गया है कि विदेशी नागरिक अब अमेरिकी चुनावों में किसी भी प्रकार का वित्तीय योगदान नहीं कर पाएंगे.
उन्होंने कहा, "विदेशी नागरिकों और गैर-सरकारी संगठनों ने कानूनी खामियों का फायदा उठाकर, गुप्त दान और बैलट पहल से जुड़ी गतिविधियों में करोड़ों डॉलर खर्च किए हैं. इस तरह का विदेशी हस्तक्षेप हमारे चुनावी प्रणाली और अमेरिकी नागरिकों के मतदान अधिकारों को कमजोर करता है."
नए आदेश का प्रभाव और विवाद
डोनाल्ड ट्रंप के इस आदेश से अमेरिका की चुनावी प्रक्रिया में बड़े बदलाव होने की संभावना है. हालांकि, इस फैसले का डेमोक्रेटिक पार्टी और कई नागरिक अधिकार संगठनों ने विरोध किया है.
डेमोक्रेट्स का कहना है कि यह आदेश मुख्य रूप से रिपब्लिकन वोटरों को फायदा पहुंचाने और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कठिन बनाने के लिए लाया गया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में चुनाव सुधार की जरूरत तो है, लेकिन इसे राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. भारत और अन्य देशों के चुनावी मॉडल से सीख लेना सही हो सकता है, लेकिन अमेरिका का चुनावी तंत्र और कानूनी ढांचा पूरी तरह अलग है.
डोनाल्ड ट्रंप के इस आदेश से अमेरिका की चुनाव प्रणाली में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. नागरिकता प्रमाण की अनिवार्यता, डाक मतपत्रों पर नई सीमाएं, और विदेशी चंदे पर प्रतिबंध जैसे नियम चुनावों की पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में उठाए गए कदम माने जा सकते हैं.
लेकिन इस आदेश के राजनीतिक और कानूनी प्रभाव को देखते हुए आने वाले समय में इसे लेकर बड़ी बहस छिड़ सकती है. क्या यह आदेश अमेरिका में चुनावों को अधिक पारदर्शी बनाएगा या फिर राजनीतिक ध्रुवीकरण को और बढ़ाएगा? इसका जवाब आने वाले चुनावों में मिलेगा.













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