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Odisha : ओडिशा में बाघों की आबादी कम, पहली बार ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट विफल रहा

इसी के साथ ओडिशा में जंगली जानवरों की संख्या स्थिर हो गई है. ओडिशा में दो बाघ अभ्यारण्य (टाइगर रिजर्व) हैं. राज्य के मयूरभंज जिले में स्थित सिमिलिपाल और अंगुल जिले में सतकोसिया बाघ अभ्यारण्य हैं.

Odisha : ओडिशा में बाघों की आबादी कम, पहली बार ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट विफल रहा
बाघ (Photo Credits: Twitter)

भुवनेश्वर, 8 अप्रैल: ऐसा लगता है कि प्रकृति से भरपूर ओडिशा बाघों के लिए सुरक्षित जगह नहीं है. जबकि भारत में बड़ी बिल्लियों (बाघों) की आबादी में 2006 से 2018 के बीच ड्रमैटिक वृद्धि देखी गई है. इसी के साथ ओडिशा में जंगली जानवरों की संख्या स्थिर हो गई है. ओडिशा में दो बाघ अभ्यारण्य (टाइगर रिजर्व) हैं. राज्य के मयूरभंज जिले में स्थित सिमिलिपाल और अंगुल जिले में सतकोसिया बाघ अभ्यारण्य हैं. यह भी पढ़ें: बाघों की संख्या 10-15 हजार पर ले जाने के लिए वैज्ञानिक योजना की जरूरत: उल्लास कारंथ

दो टाइगर रिजर्व के अलावा, बरगढ़ वन डिवीजन, क्योंझर वन्यजीव डिवीजन, कुलडीहा वन्यजीव अभयारण्य, राउरकेला वन डिवीजन, सुनाबेदा वन्यजीव अभयारण्य और सुंदरगढ़ वन डिवीजन ने भी अतीत में बड़े बाघों की उपस्थिति की सूचना दी थी. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की रिपोटरें के अनुसार, भारत में बाघों की संख्या 2006 में 1,441 से बढ़कर 2018 में 2,967 हो गई है. वहीं 2006 में ओडिशा में 45 वाघ थे, जो 2010 में घटकर 32 रह गए.

जब एनटीसीए ने 2014 में एक और जनगणना की, तो उसे राज्य में केवल 28 बाघ मिले, जो 2018 में हुई पिछली जनगणना में समान थे. इसलिए, पूर्वी राज्य में 12 वर्षों के दौरान बाघों की आबादी में लगभग 40 प्रतिशत की गिरावट देखी गई है. हालांकि, ओडिशा सरकार ने 2016 की एनटीसीए रिपोर्ट पर आकलन पद्धति पर सवाल खड़े किए थे. ओडिशा सरकार द्वारा की गई जनगणना के अनुसार, साल 2004 के दौरान राज्य में 192 बाघों का अनुमान लगाया गया था, जो 2016 में घटकर 40 हो गया.

2004 से 2016 तक, नर बाघों की संख्या 57 से घटकर 13 हो गई, जबकि मादा बाघों की संख्या 75 से घटकर 24 हो गई. राज्य में 2004 के दौरान 60 बाघ शावक पाए गए थे. आश्चर्यजनक रूप से, 2016 में राज्य सरकार द्वारा किए गए आकलन के दौरान केवल तीन बाघ शावक पाए गए थे। यह राज्य सरकार के बाघों की रक्षा करने में विफलता को दर्शाता है.

बाघों की आबादी बढ़ाने के प्रयास में, ओडिशा सरकार ने एनटीसीए और मध्य प्रदेश सरकार के सहयोग से राज्य में तीन जोड़ी बाघों के स्थानांतरण का फैसला किया था. इस प्रकार, भारत की पहली अंतर-राज्यीय स्थानांतरण परियोजना 2018 में शुरू की गई थी. इस परियोजना के तहत, बाघों की एक जोड़ी (महावीर और सुंदरी) को मध्य प्रदेश से ओडिशा में स्थानांतरित किया गया था.

अधिकारियों ने जून 2018 में महावीर को कान्हा टाइगर रिजर्व और सुंदरी को बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से लाया गया था और सतकोसिया टाइगर रिजर्व (एसटीआर) में छोड़ दिया गया था. वन विभाग को उम्मीद थी कि बाघ संभोग कर सकते हैं. लेकिन पांच महीने बाद ही एसटीआर में महावीर मृत पाया गया. शिकारियों द्वारा बिछाए गए धातु के फंदे के कारण बाघ की मौत हो गई, जिससे उसकी गर्दन पर गहरे घाव हो गए. एनटीसीए की जांच में पाया गया कि महावीर को शिकारियों ने मार डाला था.

सुंदरी ने सतकोसिया के जंगल में घूमने के बाद आसपास के गांवों के स्थानीय ग्रामीणों पर हमला कर दिया। उसने दो लोगों की हत्या कर दी, जिससे स्थानीय लोगों में विरोध और आक्रोश फैल गया. बाद में, वह फिर से मध्य प्रदेश में अपने मूल स्थान पर लौट आई. इसके साथ ही बाघों का अब तक का पहला अंतर्राज्यीय स्थानांतरण विफल हो गया. ओडिशा में बाघों के रहने और फलने-फूलने के लिए उत्कृष्ट आवास और विशाल जंगल हैं. हालांकि, बड़े पैमाने पर अवैध शिकार उनकी आबादी पर भारी पड़ रहा है.

पर्यावरणविद जयकृष्ण पाणिग्रही कहते हैं कि वन विभाग सिमलीपाल और सतकोसिया जैसे टाइगर रिजर्व में भी अवैध शिकार को नियंत्रित करने में बुरी तरह विफल रहा है. उन्होंने आगे कहा कि स्थानीय समुदाय और वन क्षेत्रों के अंदर और आसपास रहने वाले लोगों की भागीदारी के बिना किसी भी जानवर या जंगलों का संरक्षण सफल नहीं हो सकता है. हालांकि, जब बाघों की सुरक्षा की बात आती है तो सरकार ऐसा करने में विफल रही है. आगे बताया कि वन अधिकारियों के रवैये के कारण बाघ ट्रांसलोकेशन प्रोजेक्ट भी विफल हो गया.

एक अधिकारी ने कहा कि वन विभाग ने सतकोसिया और डेब्रीगढ़ टाइगर रिजर्व में स्रोत आबादी को फिर से स्थापित करने और सिमिलीपाल टाइगर रिजर्व में जनसंख्या और जीन पूल को बढ़ाने के लिए बाघ संरक्षण कार्यक्रम शुरू करने के संबंध में राज्य सरकार को सलाह देने के लिए एक नौ सदस्यीय सलाहकार समिति का गठन किया है. उन्होंने कहा कि सरकार पैनल की सिफारिश के अनुसार पहल करेगी.

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 08, 2023 03:53 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).