Farmers Protest: गृहमंत्री अमित शाह के प्रस्ताव को प्रदर्शनकारी किसानों ने ठुकराया, बोले कोई शर्त मंजूर नहीं
किसानों का आंदोलन रविवार को चौथे दिन जारी है. केंद्र सरकार द्वारा लागू नये कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे किसान देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं. कृषि कानूनों (Farm Laws) का विरोध कर रहे किसान पीछे हटने को तैयार नहीं है. इस बीच उन्हें गृहमंत्री अमित शाह की अपील की थी. जिसे लेकर किसानों की बैठक हुई और किसानों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. सिंधु बॉर्डर पर चल रही किसानों की बैठक में यह फैसला लिया गया. किसानों के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि आंदोलन अब लंबा चलने वाला है. उसके साथ ही यही भी साफ हो गया कि अब दिल्ली- हरियाणा के सिंधु बॉर्डर से बुराडी के निराकारी समागम मैदान में किसान नहीं जाएंगे.
नई दिल्ली:- किसानों का आंदोलन रविवार को चौथे दिन जारी है. केंद्र सरकार द्वारा लागू नये कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग कर रहे किसान देश की राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं. कृषि कानूनों (Farm Laws) का विरोध कर रहे किसान पीछे हटने को तैयार नहीं है. इस बीच उन्हें गृहमंत्री अमित शाह की अपील की थी. जिसे लेकर किसानों की बैठक हुई और किसानों ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. सिंधु बॉर्डर पर चल रही किसानों की बैठक में यह फैसला लिया गया. किसानों के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि आंदोलन अब लंबा चलने वाला है. उसके साथ ही यही भी साफ हो गया कि अब दिल्ली- हरियाणा के सिंधु बॉर्डर से बुराडी के निराकारी समागम मैदान में किसान नहीं जाएंगे.
बता दें कि शनिवार के दिन किसानों के आंदोलन को लेकर गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि, अगर किसान चाहते हैं कि भारत सरकार जल्द बात करे, 3 दिसंबर से पहले बात करे, तो मेरा आपको आश्वासन है कि जैसी ही आप निर्धारित स्थान पर स्थानांतरित हो जाते हैं, उसके दूसरे ही दिन भारत सरकार आपकी समस्याओं और मांगों पर बातचीत के लिए तैयार है. लेकिन अमित शाह के इस ऑफर को किसानों ने रिजेक्ट कर दिया. पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने किसानों से कहा- गृहमंत्री अमित शाह की अपील को करें स्वीकार.
जानें क्या है किसानों की मांग
किसान नेता सरकार से नये कृषि कानून को वापस लेने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि नये कृषि कानून से किसानों के बजाय कॉरपोरेट को फायदा होगा. किसान नेता किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीद की गारंटी चाहते हैं और इसके लिए नया कानून बनाने की मांग कर रहे हैं. उनकी यह भी आशंका है कि नये कानून से राज्यों के एपीएमसी एक्ट के तहत संचालित मंडियां समाप्त हो जाएंगी जिसके बाद उनको अपनी उपज बेचने में कठिनाई आ सकती है. नये कानून में अनुबंध पर आधारित खेती के प्रावधानों को लेकर भी वे स्पष्टता चाहते हैं.
(The above story first appeared on LatestLY on Nov 29, 2020 02:49 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

