Pitru Paksha 2020: क्या होता है पितृदोष? ये लक्षण बताते हैं कि आप हैं इस दोष से पीड़ित, जानें कैसे पाएं इससे मुक्ति
जन्म कुंडली के प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, पंचम, सप्तम, नवम व दशम भावों में से किसी एक भाव पर सूर्य-राहु अथवा सूर्य-शनि का योग हो तो जातक 'पितृदोष' से पीड़ित होता है. यह योग कुंडली के जिस भाव में होता है उससे ही अशुभ फल उत्पन्न होते हैं. इससे प्रभावित व्यक्ति धनाभाव, विवाह न हो पाना, गृह क्लेष, असाध्य रोग, मानसिक क्लेष जैसे तमाम कष्टों को भुगतता है.