नई दिल्ली: नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ऐतिहासिक टोपी को लेकर नया विवाद सामने आया है. लाल किले के संग्रहालय में प्रदर्शित इस टोपी को लेकर नेताजी के परिवार ने दावा किया है कि यह असली नहीं है और इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए. नेताजी के ग्रैंड-नेफ्यू चंद्र कुमार बोस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि शोधकर्ताओं और उन लोगों को, जिन्होंने पहले इस टोपी को देखा था, लगता है कि यह वही असली टोपी नहीं है. उन्होंने सरकार से अपील की है कि इसकी जांच और प्रमाणिकता की पुष्टि की जाए. Subhash Chandra Bose Jayanti 2024 Quotes: सुभाष चंद्र बोस जयंती पर प्रियजनों संग शेयर करें नेताजी के ये 10 क्रांतिकारी विचार
पहले टोपी के गायब होने को लेकर उठा था विवाद
यह मामला तब शुरू हुआ जब चंद्र कुमार बोस ने पाया कि लाल किले के क्रांति मंदिर संग्रहालय में नेताजी की प्रसिद्ध टोपी अपने स्थान पर नहीं है. इसके बाद उन्होंने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाया और प्रधानमंत्री कार्यालय तक इसकी जानकारी पहुंचाई.
नेताजी सुभाष चंद्र बोस की टोपी एक छोटी वस्तु है और हो सकती है गुम- चंद्र कुमार बोस:
Kolkata, West Bengal: On Netaji Subhas Chandra Bose's Cap found Missing from Red Fort Museum, Grandnephew of Netaji Subhas Chandra Bose, Chandra Kumar Bose says, "Look, when we gave this cap, it was a very personal item of Netaji. The Prime Minister personally placed it inside a… pic.twitter.com/1R5ANwqUgz
— IANS (@ians_india) March 13, 2026
बाद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने स्पष्ट किया कि टोपी गायब नहीं हुई थी, बल्कि उसे अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के पोर्ट ब्लेयर में आयोजित एक प्रदर्शनी के लिए भेजा गया था. यह प्रदर्शनी वर्ष 1943 में नेताजी द्वारा भारतीय भूमि पर पहली बार तिरंगा फहराने की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित की गई थी.
नेताजी की टोपी असली नहीं है- चंद्र कुमार बोस:
Grateful to Hon'ble Prime Minister-Shri @narendramodi ji for taking prompt action on the #NetajiCap issue. It is his personal intervention that Netaji's cap has been placed back in the Netaji and INA museum at the Red Fort. However, Netaji researchers and those who had… https://t.co/tsz5WTyUvy pic.twitter.com/Hk5sEuzhi0
— Chandra Kumar Bose (@Chandrakbose) March 13, 2026
अब असलियत पर उठे सवाल
टोपी के दिल्ली लौटने और फिर से संग्रहालय में रखे जाने के बाद अब इसकी असलियत को लेकर सवाल उठने लगे हैं. चंद्र कुमार बोस का कहना है कि परिवार द्वारा दी गई मूल टोपी इससे अलग दिखती थी, इसलिए इसकी जांच कराकर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कहीं असली टोपी की जगह प्रतिकृति तो नहीं रख दी गई.
एएसआई ने स्पष्ट किया कि नेताजी की टोपी को एक प्रदर्शनी के लिए श्री विजया पुरम ले जाया गया था:
The original cap of Netaji housed at Red Fort, Delhi was taken to Sri Vijaya Puram from 19-25 January 2026, for an exhibition during Parakram Divas celebrations. After its return, an issue with the lock of display required the cap to be kept in safe custody. The lock has now been… https://t.co/Kc6VUjc1Mw pic.twitter.com/cI5IeZX56D
— Archaeological Survey of India (@ASIGoI) March 13, 2026
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने आरोपों से किया इनकार
वहीं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है. अधिकारियों के अनुसार जब भी किसी राष्ट्रीय धरोहर को प्रदर्शनी के लिए कहीं ले जाया जाता है तो उसके लिए सख्त प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है, जिसमें पूरी दस्तावेजी प्रक्रिया और सुरक्षित परिवहन शामिल होता है.
2019 में संग्रहालय को दी गई थी टोपी
यह टोपी नेताजी सुभाष चंद्र बोस संग्रहालय की प्रमुख धरोहरों में से एक है. इस संग्रहालय का उद्घाटन नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2019 में नेताजी की 122वीं जयंती के अवसर पर किया था. इस संग्रहालय में नेताजी की कुर्सी, वर्दी और पदक जैसी कई ऐतिहासिक वस्तुएं भी प्रदर्शित हैं, जिन्हें बोस परिवार ने सरकार को सौंपा था.
फिलहाल इस पूरे मामले ने राष्ट्रीय धरोहरों की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है.












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