Netaji Cap Row: लाल किले के संग्रहालय में रखी नेताजी की टोपी पर विवाद, परिवार ने कहा– यह असली नहीं, जांच की मांग

नई दिल्ली: नेताजी सुभाष चंद्र बोस की ऐतिहासिक टोपी को लेकर नया विवाद सामने आया है. लाल किले के संग्रहालय में प्रदर्शित इस टोपी को लेकर नेताजी के परिवार ने दावा किया है कि यह असली नहीं है और इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए. नेताजी के ग्रैंड-नेफ्यू चंद्र कुमार बोस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि शोधकर्ताओं और उन लोगों को, जिन्होंने पहले इस टोपी को देखा था, लगता है कि यह वही असली टोपी नहीं है. उन्होंने सरकार से अपील की है कि इसकी जांच और प्रमाणिकता की पुष्टि की जाए. Subhash Chandra Bose Jayanti 2024 Quotes: सुभाष चंद्र बोस जयंती पर प्रियजनों संग शेयर करें नेताजी के ये 10 क्रांतिकारी विचार

पहले टोपी के गायब होने को लेकर उठा था विवाद

यह मामला तब शुरू हुआ जब चंद्र कुमार बोस ने पाया कि लाल किले के क्रांति मंदिर संग्रहालय में नेताजी की प्रसिद्ध टोपी अपने स्थान पर नहीं है. इसके बाद उन्होंने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाया और प्रधानमंत्री कार्यालय तक इसकी जानकारी पहुंचाई.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस की टोपी एक छोटी वस्तु है और हो सकती है गुम- चंद्र कुमार बोस:

बाद में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने स्पष्ट किया कि टोपी गायब नहीं हुई थी, बल्कि उसे अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह के पोर्ट ब्लेयर में आयोजित एक प्रदर्शनी के लिए भेजा गया था. यह प्रदर्शनी वर्ष 1943 में नेताजी द्वारा भारतीय भूमि पर पहली बार तिरंगा फहराने की 80वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित की गई थी.

नेताजी की टोपी असली नहीं है- चंद्र कुमार बोस:

अब असलियत पर उठे सवाल

टोपी के दिल्ली लौटने और फिर से संग्रहालय में रखे जाने के बाद अब इसकी असलियत को लेकर सवाल उठने लगे हैं. चंद्र कुमार बोस का कहना है कि परिवार द्वारा दी गई मूल टोपी इससे अलग दिखती थी, इसलिए इसकी जांच कराकर यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कहीं असली टोपी की जगह प्रतिकृति तो नहीं रख दी गई.

एएसआई ने स्पष्ट किया कि नेताजी की टोपी को एक प्रदर्शनी के लिए श्री विजया पुरम ले जाया गया था:

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने आरोपों से किया इनकार

वहीं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने किसी भी तरह की गड़बड़ी से इनकार किया है. अधिकारियों के अनुसार जब भी किसी राष्ट्रीय धरोहर को प्रदर्शनी के लिए कहीं ले जाया जाता है तो उसके लिए सख्त प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है, जिसमें पूरी दस्तावेजी प्रक्रिया और सुरक्षित परिवहन शामिल होता है.

2019 में संग्रहालय को दी गई थी टोपी

यह टोपी नेताजी सुभाष चंद्र बोस संग्रहालय की प्रमुख धरोहरों में से एक है. इस संग्रहालय का उद्घाटन नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2019 में नेताजी की 122वीं जयंती के अवसर पर किया था. इस संग्रहालय में नेताजी की कुर्सी, वर्दी और पदक जैसी कई ऐतिहासिक वस्तुएं भी प्रदर्शित हैं, जिन्हें बोस परिवार ने सरकार को सौंपा था.

फिलहाल इस पूरे मामले ने राष्ट्रीय धरोहरों की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर नई बहस छेड़ दी है.