साइबर ठगों पर CBI का बड़ा वार, फर्जी नोटिस की पहचान के लिए लॉन्च किया AI हेल्पबॉट ‘ABHAY’
(Photo Credits WC)

ABHAY AI-Notice Verification System: साइबर ठगी और डिजिटल अरेस्ट जैसे बढ़ते अपराधों पर लगाम लगाने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने ‘ABHAY’ नाम का AI आधारित हेल्पबॉट लॉन्च किया है. यह सिस्टम लोगों को रियल टाइम में यह जांचने में मदद करेगा कि उनके पास आया कोई नोटिस असली है या फर्जी. CBI के अनुसार, यह अपनी तरह का पहला सत्यापन सिस्टम है, जिसे खासतौर पर साइबर ठगों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे नकली सरकारी नोटिसों से लोगों को बचाने के लिए तैयार किया गया है. NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI की बड़ी कार्रवाई, मास्टरमाइंड गिरफ्तार

CBI ने बयान जारी कर कहा कि आम नागरिकों के लिए किसी आधिकारिक नोटिस की असलियत पहचानना मुश्किल हो जाता है. इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए ‘AI-Based Helpbot for Authentication of Your Notice’ यानी ABHAY विकसित किया गया है, ताकि हर नागरिक खुद नोटिस की जांच कर सके.

एजेंसी ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डीपफेक जैसी तकनीकों के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल ने साइबर अपराध को और खतरनाक बना दिया है. अब आम लोगों के लिए असली और नकली दस्तावेजों में फर्क करना कठिन होता जा रहा है. CBI के मुताबिक, नागरिक अब किसी भी समय एजेंसी की आधिकारिक वेबसाइट www.cbi.gov.in पर जाकर ABHAY का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके लिए सबसे पहले वेबसाइट के मुख्य पेज पर मौजूद ABHAY लोगो पर क्लिक करना होगा.

इसके बाद यूजर को अपने मोबाइल नंबर के जरिए OTP सत्यापन करना होगा और फिर मिले हुए नोटिस की स्कैन कॉपी अपलोड करनी होगी. इसके बाद ABHAY चैटबॉट यह बताएगा कि नोटिस असली है या संभावित रूप से फर्जी. CBI ने बताया कि ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी का एक ऐसा तरीका है, जिसमें अपराधी पीड़ित के मन में डर पैदा करते हैं.

इस ठगी की शुरुआत एक ऐसे फर्जी नोटिस से होती है, जो किसी सरकारी जांच एजेंसी या कानून प्रवर्तन संस्था का लगता है. इसमें पीड़ित पर झूठे आपराधिक आरोप लगाए जाते हैं. जब व्यक्ति डरकर उनकी बात मानने लगता है, तब ठग नकली कानूनी प्रक्रिया शुरू कर देते हैं और कई दिनों तक पीड़ित को तथाकथित ‘डिजिटल अरेस्ट’ में रखते हैं. CBI ने स्पष्ट किया कि भारतीय कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसी कोई कानूनी व्यवस्था मौजूद नहीं है.