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Rajasthan NEET Leak: बेटे के लिए 10 लाख रुपये में खरीदा पेपर, फिर भी आए सिर्फ 107 अंक

एजेंसियों का कहना है कि छात्रों और अभिभावकों से पैसे लेकर सौदे किए जाते थे. शुरुआती बातचीत और डील सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए होती थी. इस मामले ने एक बार फिर भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सीबीआई अब पेपर लीक के मुख्य स्रोत और इस नेटवर्क के प्रमुख आरोपियों की पहचान करने में जुटी हुई है.

Rajasthan NEET Leak: बेटे के लिए 10 लाख रुपये में खरीदा पेपर, फिर भी आए सिर्फ 107 अंक
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: File Image)

Rajasthan NEET Leak Case: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-यूजी (NEET-UG) 2026 पेपर लीक मामले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच में सामने आया है कि राजस्थान के सीकर जिले से जुड़े इस कथित रैकेट में आरोपी दिनेश बिवाल ने अपने बेटे ऋषि बिवाल के लिए कथित तौर पर करीब 10 लाख रुपये देकर लीक हुआ प्रश्नपत्र खरीदा था. हालांकि, जांच एजेंसियों के अनुसार पेपर पहले से मिलने के बावजूद ऋषि बिवाल परीक्षा में सिर्फ 107 अंकों के सवाल ही हल कर सका. NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में CBI की बड़ी कार्रवाई, मास्टरमाइंड गिरफ्तार

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब ऋषि बिवाल की मार्कशीट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. बताया जा रहा है कि उसने ग्रेस मार्क्स के सहारे परीक्षा पास की थी. जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, पूछताछ के दौरान दिनेश बिवाल ने स्वीकार किया कि उसने अपने बेटे के लिए लीक पेपर की व्यवस्था की थी. जांच एजेंसियों का दावा है कि इस सौदे में करीब 10 लाख रुपये खर्च किए गए थे, लेकिन उम्मीद के मुताबिक परिणाम नहीं मिला. सीबीआई की देशव्यापी परीक्षा घोटाले की जांच में यह पहला बड़ा खुलासा माना जा रहा है.

दिनेश बिवाल इससे पहले वर्ष 2025 में भी चर्चा में आया था, जब उसने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि उसके परिवार के पांच बच्चों ने NEET परीक्षा पास की है. अब जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि उस परीक्षा चक्र में भी कोई गड़बड़ी हुई थी या नहीं. सीबीआई को शक है कि उस समय भी लीक पेपर का इस्तेमाल कर एडमिशन हासिल किए गए थे. एजेंसी का मानना है कि यह पूरा नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ एक संगठित गिरोह था.

जांच एजेंसियों के अनुसार, लीक प्रश्नपत्र और उससे जुड़े पीडीएफ फाइल्स कथित तौर पर टेलीग्राम और व्हाट्सऐप ग्रुप्स के जरिए एजेंटों और बिचौलियों की मदद से फैलाए जाते थे. अधिकारियों ने सीकर में एक फ्लैट की भी पहचान की है, जिसे कथित तौर पर पेपर वितरण और अभ्यर्थियों से संपर्क के लिए समन्वय केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था. जांचकर्ताओं के मुताबिक, गिरोह के कुछ सदस्य कुरियर की भूमिका निभाते थे और लीक सामग्री सीधे छात्रों तक पहुंचाते थे. दिनेश बिवाल और उसके परिवार के कुछ सदस्यों पर भी इसी भूमिका में शामिल होने का शक है.

सीबीआई ने करीब 150 छात्रों की पहचान की है, जिनके इस नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका है. फिलहाल इन सभी की जांच की जा रही है. अधिकारियों ने अदालत को बताया कि मामले में डिजिटल सबूत नष्ट करने, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और अंदरूनी लोगों की संलिप्तता की भी आशंका है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह रैकेट सीकर, गुरुग्राम, नासिक और राजस्थान के कई अन्य हिस्सों में सक्रिय था. कुछ मामलों में छात्रों को परीक्षा में अनुचित फायदा दिलाने के लिए 500 से 600 “महत्वपूर्ण” सवालों का सेट भी दिया गया था.

एजेंसियों का कहना है कि छात्रों और अभिभावकों से पैसे लेकर सौदे किए जाते थे. शुरुआती बातचीत और डील सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के जरिए होती थी. इस मामले ने एक बार फिर भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सीबीआई अब पेपर लीक के मुख्य स्रोत और इस नेटवर्क के प्रमुख आरोपियों की पहचान करने में जुटी हुई है.

(The above story first appeared on LatestLY on May 15, 2026 10:29 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).