NEET-UG 2026 पेपर लीक मामला: अरविंद केजरीवाल ने 'Gen-Z' से की सड़कों पर उतरने की अपील, पूछा- ‘क्या हमारे युवा मंत्रियों को जेल नहीं भेज सकते?’ (Watch Video)
अरविंद केजरीवाल (Photo Credits: File Image)

नई दिल्ली, 13 मई: आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने बुधवार को NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द होने के मुद्दे पर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने देश की युवा पीढ़ी (Gen-Z) से अपील की कि वे पेपर लीक और धांधली के खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध दर्ज कराएं. उन्होंने आरोप लगाया कि साल 2014 के बाद से देश में 93 बार प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हुए हैं, जिससे लगभग 6 करोड़ युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है. यह भी पढ़ें: NEET-UG 2026 पेपर लीक: कौन है शुभम खैरनार? 10 लाख में खरीदा और 15 लाख में बेचा 'गेस पेपर'-पढ़ें पूरी रिपोर्ट

नेपाल और बांग्लादेश के युवाओं का दिया उदाहरण

केजरीवाल ने अपने संबोधन में नेपाल और बांग्लादेश के हालिया छात्र आंदोलनों का जिक्र किया, जिन्होंने वहां की सरकारों के तख्तापलट में बड़ी भूमिका निभाई थी. उन्होंने कहा, "अगर नेपाल और बांग्लादेश के युवा सड़कों पर निकलकर अपनी सरकारें बदल सकते हैं, तो क्या हमारे युवा पेपर लीक में शामिल मंत्रियों को जेल नहीं भेज सकते? मुझे आप पर पूरा भरोसा है." उन्होंने युवाओं से इस "घिनौने खेल" को बंद करने के लिए आंदोलन करने का आग्रह किया.

बीजेपी शासित राज्यों पर साधा निशाना

आप नेता ने पेपर लीक की घटनाओं को राजनीतिक मोड़ देते हुए कहा कि अधिकांश मामले राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात जैसे बीजेपी शासित राज्यों में हुए हैं. उन्होंने हालिया NEET पेपर लीक का मुख्य केंद्र राजस्थान को बताते हुए वरिष्ठ नेताओं की संलिप्तता पर संदेह जताया. केजरीवाल ने सवाल किया, "यदि सत्ताधारी नेता ही इसमें शामिल हैं, तो सीबीआई (CBI) क्या कर पाएगी?"

‘क्या हमारी Gen-Z मंत्रियों को जेल नहीं भेज सकती?’

CBI जांच और परीक्षा की स्थिति

NEET-UG 2026 परीक्षा, जो मूल रूप से 3 मई को आयोजित की गई थी, पेपर लीक की शिकायतों के बाद केंद्र सरकार द्वारा रद्द कर दी गई है. मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी जांच अब केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दी गई है.

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने स्पष्ट किया है कि जांच एजेंसियों से मिले इनपुट और परीक्षा की शुचिता पर उठे सवालों के कारण यह फैसला लिया गया. एजेंसी ने छात्रों को राहत देते हुए बताया कि री-टेस्ट (Re-test) के लिए पुराने पंजीकरण और डेटा ही मान्य होंगे. छात्रों को न तो दोबारा फॉर्म भरना होगा और न ही कोई अतिरिक्त फीस देनी होगी.