कांग्रेस-बीजेपी की राजनीति के बीच कहां फिट बैठती है केजरीवाल की आम आदमी पार्टी?
देश के कई ऐसे राज्य हैं जहां चुनावी मैदान में बीजेपी और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होता है लेकिन बीते कुछ वर्षों में आम आदमी पार्टी की रणनीतियों के चलते ये मामला त्रिशंकु हो गया है। हांलाकि, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को छोड़ दें तो इसका फायदा आम आदमी पार्टी को अब तक उतना नहीं मिला है जितना कि वो उम्मीद करती रही है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, आम आदमी पार्टी के चुनाव लड़ने से सीधा फायदा अब तक बीजेपी को ही हुआ है क्योंकि जनता बीजेपी और कांग्रेस दोनों को ही मौका देकर देख चुकी है लेकिन चुनाव के दौरान वोटों के ध्रुविकरण के चलते इसके खामियाजा कांग्रेस को सबसे ज्यादा उठाना पड़ा। इस दौरान आप पर बीजेपी की बी पार्टी होने के आरोप भी लगे हैं लेकिन दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल इसे सिरे से खारिज चुके हैं।
बीते कुछ वर्षों में आप दिल्ली से बाहर निकली है और आस-पास के इलाकों में उसने अपना प्रभाव काफी बढ़ाया भी है। यही कारण है कि उसे चुनाव इसका अच्छा खासा फायदा मिला है। पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा, मध्य प्रदेश, गोवा ये वो राज्य हैं जहां आम आदमी पार्टी अब तक विधानसभा में अपनी किस्मत आजमा चुकी है लेकिन पंजाब को छोड़ अब तक उसे कोई ठोस सफलता मिलती नहीं दिखी।
इस मामले में राजनीतिक रणनीतिकार और भारतीय जन संचार नई दिल्ली के पूर्व छात्र बद्रीनाथ कहते हैं कि पंजाब विधानसभा के पिछले चुनाव में आम आदमी पार्टी को बड़ी सफलता मिल सकती थी लेकिन मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित नहीं करना उसकी हार का सबसे बड़ा कारण रहा।
चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की टीम का हिस्सा रहे बद्रीनाथ ने बताया कि लोवर क्लास और मिडिल क्लास ये दो अहम वर्ग हैं जो सबसे ज्यादा वोट करते हैं, केजरीवाल ने इन्हें ध्यान में रखकर फ्री बिजली और पानी की योजना दी है और यही वादा वे विभिन्न राज्यों में होने वाले चुनावों के दौरान करते हैं।
बद्री ने बताया कि, केजरीवाल दिल्ली मॉडल को स्मार्टली बेचते हैं। चुनाव में बिजली, पानी स्कूल की बात प्रमुखता से करते हैं लेकिन मुहल्ला क्लिनिक की बात पर वे चुप्पी साध लेते हैं। बीजेपी और कांग्रेस दोनों चुनाव जीतकर सरकार तो बना लेती है लेकिन उसके लिए स्थिर सरकार बनाना सबसे बड़ी चुनौती रही है इसका सबसे बड़ा उदाहरण उत्तराखंड है जहां बीजेपी के इस शासन में अब तक तीन-तीन मुख्यमंत्री बदल चुके हैं. वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हटाने की चर्चा बीते दिनों जोरो पर थी। वहीं मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता आई। कमलनाथ मुख्यमंत्री बनें लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया के बाघी होने से कई कांग्रेसी बीजेपी में ही शामिल हो गए।
बद्रीनाथ कहते हैं, बीजेपी हिंदुत्व, क्षेत्रीय दल जाति और कांग्रेस सेक्युलरवाद पर वोट मांगती है लेकिन आम आदमी पार्टी पॉलिटिक्स पर पूरा फोकस रखती है और मिडिल से लेकर निचले तबके के बीच लोकप्रिय कानून लेकर आती है। यही कारण है कि बीजेपी और कांग्रेस से इतर आम आदमी पार्टी एक नई उम्मीद बनकर उभरी है लेकिन देखना होगा कि आगामी विधानसभा चुनावों में उसकी रणनीतियां बीजेपी और कांग्रेसी की राजनीति के आगे कितनी सार्थक हो पाती है।
(The above story first appeared on LatestLY on Jul 14, 2021 10:48 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

