Bengaluru Water Shortages: बेंगलुरु में पीने के पानी का अन्य काम में इस्तेमाल करते पाए जाने पर लगेगा मोटा जुर्माना, बढ़ते तामपान से भूजल स्तर में कमी
बैंगलोर जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड (BWSSB) ने गैर-ज़रूरी गतिविधियों के लिए पीने के पानी पर प्रतिबंध लगा दिया है. आधिकारिक घोषणा के अनुसार, यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब तापमान बढ़ रहा है और बारिश की कमी के कारण भूजल स्तर गिर रहा है. आदेश के अनुसार, पीने के पानी का इस्तेमाल वाहन धोने, बागवानी, निर्माण, फव्वारे या मनोरंजन के लिए नहीं किया जा सकता है...
Bengaluru Water Shortages: बैंगलोर जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड (BWSSB) ने गैर-ज़रूरी गतिविधियों के लिए पीने के पानी पर प्रतिबंध लगा दिया है. आधिकारिक घोषणा के अनुसार, यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब तापमान बढ़ रहा है और बारिश की कमी के कारण भूजल स्तर गिर रहा है. आदेश के अनुसार, पीने के पानी का इस्तेमाल वाहन धोने, बागवानी, निर्माण, फव्वारे या मनोरंजन के लिए नहीं किया जा सकता है. मॉल और सिनेमा हॉल को केवल पीने के लिए पानी का उपयोग करने की अनुमति है. यह भी पढ़ें: Pune Water Pipeline Leakage: गर्मी से पहले पुणे में पानी की बर्बादी! लाल बहादुर शास्त्री रोड पर पाइपलाइन फटी, हजारों लीटर पानी सड़क पर बहा, ट्रैफिक हुआ बाधित (Watch Video)
आदेश में आगे उल्लेख किया गया है कि इन नियमों का उल्लंघन करने वालों को पहली बार में 5,000 रुपये का जुर्माना देना होगा. अगर वे पानी की बर्बादी जारी रखते हैं, तो उन पर 5,000 रुपये और अनुपालन करने तक प्रतिदिन 500 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा. चूंकि बेंगलुरु में तापमान बढ़ रहा है और भूजल स्तर घट रहा है, इसलिए BWSSB ने इस बात पर जोर दिया कि इस स्थिति में पानी बचाना बहुत जरूरी है. नागरिकों से आग्रह है कि वे पानी का जिम्मेदारी से इस्तेमाल करें और किसी भी उल्लंघन की सूचना BWSSB हेल्पलाइन 1916 पर दें.
भारत में बढ़ता जल संकट
बेंगलुरु की स्थिति भारत को प्रभावित करने वाले एक बड़े जल संकट का हिस्सा है. रिपोर्ट के अनुसार, 600 मिलियन से अधिक लोग गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं, और दिल्ली, चेन्नई और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों में भूजल खत्म होने का खतरा है. हालांकि भारत में दुनिया की 18 प्रतिशत आबादी रहती है, लेकिन उसके पास वैश्विक मीठे जल संसाधनों का केवल 4 प्रतिशत ही है.
भारत में कृषि में लगभग 80 प्रतिशत पानी का उपयोग होता है, लेकिन अकुशल सिंचाई के कारण पानी बरबाद होता है. उद्योगों, सीवेज और कृषि से होने वाले प्रदूषण के कारण 70 प्रतिशत मीठा पानी दूषित हो जाता है. दुख की बात है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हालात और खराब हो रहे हैं, जिससे अप्रत्याशित मानसून, सूखा और बाढ़ जैसी समस्याएं पैदा हो रही हैं.
इस संकट से निपटने के लिए भारत को वर्षा जल संचयन (Rainwater Harvesting), दूषित जल को साफ़ करके (Wastewater Recycling) और ड्रिप सिंचाई जैसी बेहतर सिंचाई तकनीकों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है. जल शक्ति अभियान, अटल भूजल योजना और नमामि गंगे जैसे सरकारी कार्यक्रम जल संरक्षण को बेहतर बनाने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन इस संबंध में जन जागरूकता भी महत्वपूर्ण है.
(The above story first appeared on LatestLY on Feb 18, 2025 02:09 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

