प्रधानमंत्री के संबोधन में मजदूर-गरीब को निरर्थक निबंध सुनने को मिला : अखिलेश
अखिलेश ने ट्वीट किया, ''देश के मज़दूर-ग़रीब अपनी विपदाओं के लिए प्रबंध की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन उन्हें सुनने को मिला केवल निरर्थक निबंध। क्या आधे घंटे से भी ज़्यादा समय में सड़कों पर भटकते मज़दूरों के लिए एक-आध शब्द की संवेदना की भी गुंजाइश नहीं थी। हर कोई सोचे। असंवेदनशील-दुर्भाग्यपूर्ण।''