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US Signal Chats Leak: ट्रंप प्रशासन की गलती से लीक हुई वॉर प्लान की सीक्रेट चैट, हूती विद्रोहियों पर हमले की गुप्त योजना का खुलासा

अमेरिकी ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों की सिग्नल चैट लीक होने से हूथी विद्रोहियों पर हमले की रणनीति उजागर हुई. इस लीक से अमेरिकी सैन्य अभियानों और मध्य पूर्व नीति पर सवाल उठ रहे हैं. गुप्त दस्तावेज सामने आने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद बढ़ सकता है.

US Signal Chats Leak: ट्रंप प्रशासन की गलती से लीक हुई वॉर प्लान की सीक्रेट चैट, हूती विद्रोहियों पर हमले की गुप्त योजना का खुलासा

अमेरिका की मशहूर पत्रिका द अटलांटिक ने हाल ही में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है. पत्रिका ने बताया कि ट्रंप प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने गलती से हूती विद्रोहियों पर अमेरिकी हवाई हमले की गोपनीय योजना का विवरण एक पत्रकार के साथ साझा कर दिया. इस लीक से यह स्पष्ट होता है कि अमेरिका, यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों पर हमला करने की तैयारी कर रहा था, लेकिन प्रशासन के भीतर इस पर मतभेद भी थे.

कैसे हुआ लीक?

यह मामला तब सामने आया जब द अटलांटिक के प्रधान संपादक जेफ्री गोल्डबर्ग को Signal ऐप पर "Houthi PC small group" नामक चैट ग्रुप में गलती से जोड़ दिया गया. इस ग्रुप में अमेरिका के कई शीर्ष अधिकारी शामिल थे, जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज, रक्षा सचिव पीट हेगसेथ, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और कई अन्य अधिकारी थे.

लीक हुई चैट के अनुसार, 15 मार्च को हूती विद्रोहियों पर अमेरिका द्वारा किए गए पहले हवाई हमले की पूरी योजना इस ग्रुप में बनाई गई थी.

ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों की बातचीत का खुलासा

लीक हुई चैट के अनुसार, 13 मार्च को दोपहर 4:28 बजे, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज ने ग्रुप में संदेश भेजा: "टीम, अगले 72 घंटों के लिए हूती मुद्दे पर समन्वय स्थापित करने के लिए एक मुख्य समूह बना रहे हैं. कृपया अपनी टीम से समन्वय के लिए सबसे अच्छे संपर्क व्यक्ति का नाम दें."

इसके बाद, मार्को रुबियो, टुलसी गैबार्ड, सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ, और अन्य अधिकारियों ने अपने प्रतिनिधियों के नाम दिए. अगले दिन, 14 मार्च की सुबह 8:05 बजे, वाल्ट्ज ने एक और संदेश भेजा: "राष्ट्रपति के निर्देश के अनुसार, आपको हाई-सिक्योरिटी इनबॉक्स में कार्य सूची मिल जाएगी. रक्षा विभाग और विदेश विभाग से समन्वय कर क्षेत्रीय सहयोगियों को सूचित करने की योजना बनाई गई है."

उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हमले पर जताई चिंता

जब समूह में अमेरिकी सेना की योजना को लेकर चर्चा हो रही थी, तब उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस मिशन को लेकर कुछ गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने लिखा: "अमेरिका के व्यापार का केवल 3% हिस्सा स्वेज नहर से होकर गुजरता है, जबकि यूरोप का 40% व्यापार इस मार्ग पर निर्भर है. जनता को यह समझाना मुश्किल होगा कि यह हमला क्यों जरूरी है." उन्होंने यह भी कहा कि यदि हमला किया जाता है, तो तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है.

रक्षा सचिव पीट हेगसेथ का समर्थन

रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने वेंस की चिंताओं को समझते हुए जवाब दिया: "हम जानते हैं कि जनता हूतियों को नहीं जानती. इसलिए हमें यह ध्यान केंद्रित करना होगा कि बाइडेन प्रशासन विफल रहा और ईरान इसका वित्तपोषण कर रहा है." उन्होंने कहा कि यदि हमला कुछ हफ्तों के लिए टाल दिया जाता है, तो इससे रणनीति में कोई बड़ा बदलाव नहीं आएगा, लेकिन इसके दो संभावित खतरे हैं-

  • अगर यह जानकारी लीक हो जाती है, तो अमेरिका की छवि कमजोर दिखेगी.
  • अगर इज़राइल पहले हमला कर देता है, तो अमेरिका की रणनीति प्रभावित होगी.

15 मार्च को हुआ हमला 

15 मार्च को दोपहर 11:44 बजे, हेगसेथ ने "TEAM UPDATE" शीर्षक से एक संदेश भेजा: "मौसम अनुकूल है. हमने सेंट्रल कमांड (CENTCOM) से पुष्टि कर ली है कि मिशन लॉन्च के लिए तैयार है."

इसके बाद, अमेरिकी सेना ने हूथी ठिकानों पर निम्नलिखित हमले किए:

  • 12:15 PM: पहली F-18 स्ट्राइक टीम ने उड़ान भरी.
  • 1:45 PM: टारगेट लोकेशन की पुष्टि होने के बाद पहला बम गिराया गया.
  • 2:10 PM: दूसरी स्ट्राइक टीम रवाना हुई.
  • 3:36 PM: टॉमहॉक मिसाइलों से हमला किया गया.

हमले के तुरंत बाद, वाल्ट्ज ने ग्रुप में लिखा: "VP, बिल्डिंग ध्वस्त हो गई. हमारे पास कई पॉजिटिव आईडी हैं. पीट, कुरीला और इंटेलिजेंस टीम ने शानदार काम किया."

इस लीक से क्या संकेत मिलते हैं?

  • ट्रंप प्रशासन के भीतर हूतियों पर हमले को लेकर मतभेद थे.
  • अमेरिका की मुख्य चिंता व्यापार मार्गों की सुरक्षा और ईरान समर्थित समूहों को रोकना था.
  • अमेरिका यूरोप की सुरक्षा को लेकर चिंतित था, लेकिन अधिकारियों को यूरोपीय देशों की निर्भरता पर नाराजगी भी थी.
  • हमला सार्वजनिक होने से पहले ही इसकी योजना लीक हो गई थी, जिससे अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हुआ.

यह लीक अमेरिकी सरकार की गोपनीयता को लेकर एक बड़ी चूक को उजागर करता है. सिग्नल चैट में हुई यह बातचीत साबित करती है कि ट्रंप प्रशासन में कुछ शीर्ष अधिकारी असहमति के बावजूद हमले की योजना पर आगे बढ़े. हालांकि, इस घटना से यह भी साफ है कि अमेरिका की आंतरिक रणनीति और निर्णय लेने की प्रक्रिया में अभी भी कई खामियां हैं, जिन्हें भविष्य में सुधारने की जरूरत है.

(The above story first appeared on LatestLY on Mar 27, 2025 11:50 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).