Delhi Air Pollution: सुप्रीम कोर्ट ने कसा तंज- TV डिबेट किसी भी चीज की तुलना में अधिक वायु प्रदूषण पैदा कर रही है
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अदालत से जुड़े मामलों को लेकर टेलीविजन पर बहस के कंटेन्ट पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि टीवी पर बहस किसी भी चीज की तुलना में अधिक वायु प्रदूषण पैदा कर रही है.
नई दिल्ली, 17 नवंबर: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को अदालत से जुड़े मामलों को लेकर टेलीविजन पर बहस के कंटेन्ट पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि टीवी पर बहस किसी भी चीज की तुलना में अधिक वायु प्रदूषण पैदा कर रही है. प्रदूषण पर लगाम लगाएंगे, लेकिन लॉकडाउन के पक्ष में नहीं: योगी आदित्यनाथ सरकार
सुनवाई की शुरूआत में, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश एनवी रमणा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया कि केंद्र सरकार ने अदालत को पराली जलाने, सर्दियों में 4 प्रतिशत और गर्मियों में 7 प्रतिशत के सटीक योगदान पर गुमराह नहीं किया और रिपोर्ट में डेटा वार्षिक औसत पर आधारित था। मेहता ने कहा कि पराली जलाने से संबंधित आंकड़ों के संबंध में टीवी स्टूडियो में बहस के दौरान कुछ भद्दे बयान दिए गए.
जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़ और सूर्यकांत की पीठ ने हालांकि स्पष्ट किया कि इसे गुमराह नहीं किया गया है. पीठ ने कहा, "हमें बिल्कुल भी गुमराह नहीं किया गया था. आपने 10 प्रतिशत कहा था लेकिन हलफनामे में यह बताया गया था कि यह 30 से 40 प्रतिशत (अनुबंध में) था."मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "इस तरह की आलोचनाएं होती रहती हैं. हमारी अंतरात्मा साफ है और हम जनहित के लिए काम करते हैं."
उन्होंने आगे कहा कि "टीवी पर बहस बाकी सभी की तुलना में अधिक प्रदूषण पैदा कर रही है, हमें एक संकल्प पर काम करने पर ध्यान देना चाहिए."दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने राष्ट्रीय राजधानी में वायु प्रदूषण के संबंध में किसानों द्वारा पराली जलाने के केंद्र के आंकड़ों पर तर्क दिया.
सिंघवी ने कहा कि वायु प्रदूषण में पराली जलाने के योगदान पर केंद्र के आंकड़े कहते हैं कि यह 0 से 58 प्रतिशत के बीच है.उन्होंने कहा, "संभवत: श्री मेहता ने चार या छह महीने का औसत (वार्षिक आंकड़ों पर पहुंचने के लिए) लिया है."मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि शीर्ष अदालत वायु प्रदूषण को कम करने के कदमों पर ध्यान केंद्रित कर रही है और सिंघवी से कहा कि वे बार-बार पराली जलाने के मुद्दे को न उठाएं, बल्कि उन कदमों पर ध्यान केंद्रित करें, जो दिल्ली सरकार वायु प्रदूषण को रोकने के लिए प्रस्तावित करती है.
सिंघवी ने कहा, "हम किसी को दोष नहीं दे रहे हैं, दोनों केंद्र के आंकड़े हैं."पीठ ने दोहराया कि वह किसानों को दंडित करने का इच्छुक नहीं है और राज्य सरकारों को उन्हें पराली जलाने से रोकने के लिए राजी करना चाहिए. पीठ ने कहा कि किसानों की दुर्दशा को कोई नहीं समझता. शीर्ष अदालत दिल्ली और आसपास के इलाकों में पराली जलाने के कारण वायु प्रदूषण से संबंधित 17 वर्षीय दिल्ली के एक छात्र द्वारा दायर एक मामले की सुनवाई कर रही है.
(The above story first appeared on LatestLY on Nov 17, 2021 02:10 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

