Gorakhpur Biryani Fact Check: गोरखपुर के मशहूर 'बिरयानी बे' रेस्टोरेंट से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में कुछ लोग यह दावा करते हुए दिख रहे हैं कि उन्हें वेज बिरयानी में मांस की हड्डी मिली है. उन्होंने इसे धार्मिक भावनाओं का अपमान बताया है, खासकर सावन के पवित्र महीने में. वीडियो में एक युवक गुस्से में चिल्ला रहा है और रेस्टोरेंट प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगा रहा है. सोशल मीडिया पर इसे लेकर धार्मिक भावनाएं भड़काने की कोशिश भी देखी गई. लेकिन जब फैक्ट चेक किया गया, तो पूरा मामला ही फर्जी निकला.
वेज बिरयानी में हड्डी मिलने का दावा फर्जी
गोरखपुर में वेज डिश मिला हड्डी का टुकड़ाःकस्टमर बोले- सावन में धर्म भ्रष्ट किया, रेस्टोरेंट मालिक ने कहा- बिल अधिक आने पर रचा ड्रामा,गोरखपुर में वेज खाने में हड्डी निकली, इस पर युवकों ने हंगामा शुरू कर दिया। हंगामा बढ़ता देख रेस्टोरेंट मालिक ने पुलिस बुला ली। पुलिस ने हंगामा कर… pic.twitter.com/FgejxTRyHO
— India News UP/UK (@IndiaNewsUP_UK) August 1, 2025
फैक्ट चेक में क्या निकला?
जब इस मामले की गहराई से पड़ताल की गई तो दैनिक भास्कर की वेबसाइट पर 3 अगस्त को प्रकाशित रिपोर्ट मिली. इसमें बताया गया कि रेस्टोरेंट के मालिक रवीकर सिंह ने CCTV फुटेज जारी किया है. फुटेज में स्पष्ट तौर पर देखा जा सकता है कि एक शख्स जानबूझकर नॉन-वेज थाली से हड्डी निकालकर दूसरी थाली में डाल देता है, जो वेज खाने का दावा कर रहे शख्स के सामने रखी थी.
NDTV की भी रिपोर्ट में भी यह खबर छपी है, जिसमें रेस्टोरेंट मालिक का कहना है कि यह सब सुनियोजित तरीके से किया गया, ताकि रेस्टोरेंट की छवि खराब की जा सके और शायद बिल से बचा जा सके. उन्होंने यह भी कहा कि उनके यहां वेज और नॉन-वेज भोजन को अलग-अलग किचन में तैयार किया जाता है, जिससे किसी भी तरह की मिलावट की संभावना नहीं होती.
पुलिस को दी गई शिकायत
घटना के बाद पुलिस को बुलाया गया और मामला दर्ज किया गया. हालांकि, पुलिस की तरफ से अभी तक कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है. लेकिन रेस्टोरेंट मालिक अब इन लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की तैयारी कर रहे हैं.
निष्कर्ष
फैक्ट चेक में साफ हुआ कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो भ्रामक है और सच्चाई इससे बिल्कुल अलग है. यह एक सोची-समझी साजिश थी, जिसमें धार्मिक भावनाओं के नाम पर झूठ फैलाया गया. ऐसे मामलों में बिना पूरी जानकारी के वायरल कंटेंट पर भरोसा करना नुकसानदायक हो सकता है.













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