बेंगलुरु में 'मॉरल पुलिसिंग': छोटे कपड़ों को लेकर बुजुर्ग महिला ने इन्फ्लुएंसर श्रेयांशी को टोका, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस (Watch Video)
श्रीयांशी का एक बुज़ुर्ग महिला से आमना-सामना (Photo Credit: @inoutbengaluru)

बेंगलुरु: कर्नाटक (Karnataka) की राजधानी बेंगलुरु (Bengaluru) में एक बार फिर 'मॉरल पुलिसिंग' (नैतिक पहरेदारी) (Moral Policing) का मामला सामने आया है. सोशल मीडिया (Social Media) इन्फ्लुएंसर श्रेयांशी (Influencer Shriyanshi) के साथ हुई एक हालिया घटना ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और पारंपरिक सामाजिक मानदंडों के बीच चल रहे टकराव को उजागर कर दिया है. फोटोशूट के दौरान एक बुजुर्ग महिला (Elderly Woman) द्वारा श्रेयांशी को उनके पहनावे के लिए टोकने का वीडियो तेजी से वायरल (Viral Video) हुआ, जिसे कुछ ही घंटों में 14 लाख से अधिक व्यूज मिले. हालांकि, बढ़ती चर्चा और विवाद के बीच श्रेयांश ने अब अपने अकाउंट से यह वीडियो डिलीट कर दिया है. यह भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल: मिड-डे मील में छात्रों को परोसे गए गोलगप्पे; LPG संकट के चलते स्कूल ने निकाला अनोखा विकल्प (Watch Video)

छोटे कपड़ों पर बुजुर्ग महिला की आपत्ति

यह घटना तब हुई जब दिल्ली और बेंगलुरु के बीच रहने वाली मॉडल और इन्फ्लुएंसर श्रेयांशी शहर की सड़क पर एक वीडियो शूट करने की कोशिश कर रही थीं. उन्होंने सफेद टॉप, काले शॉर्ट्स और फरी बूट्स पहने थे. इससे पहले कि शूटिंग शुरू हो पाती, साड़ी पहने एक बुजुर्ग महिला उनके पास पहुंचीं और उनके कपड़ों पर लेक्चर देने लगीं.

स्थानीय भाषा में हुए इस संवाद के अनुवाद के अनुसार, महिला का कहना था कि 'महिलाओं पर छोटे कपड़े अच्छे नहीं लगते.' उन्होंने श्रेयांशी को सलाह दी कि उन्हें सार्वजनिक स्थानों पर चूड़ीदार या पतलून जैसे पारंपरिक कपड़े पहनने चाहिए. महिला ने स्पष्ट किया कि उन्हें फिल्मांकन से कोई समस्या नहीं है, लेकिन पहनावा उनकी नजर में "अनुचित" था.

श्रीयांशी का एक बुज़ुर्ग महिला से आमना-सामना - वीडियो देखें

इन्फ्लुएंसर के शांत व्यवहार की सराहना

सार्वजनिक रूप से टोके जाने के बावजूद, श्रेयांशी ने जिस संयम और परिपक्वता का परिचय दिया, उसकी सोशल मीडिया पर काफी सराहना हो रही है. वीडियो में देखा जा सकता है कि श्रेयांशी ने बहस करने के बजाय शांति से महिला की बात सुनी और बार-बार माफी मांगते हुए स्थिति को शांत करने की कोशिश की. नेटिज़न्स ने उनके इस व्यवहार को 'परिपक्व और गरिमापूर्ण' बताया है. हालांकि, कमेंट सेक्शन में बढ़ती तीखी बहस को देखते हुए श्रेयांशी ने बाद में पोस्ट हटाना ही बेहतर समझा.

मॉरल पुलिसिंग बनाम सामाजिक शिष्टाचार: बंटी इंटरनेट की राय

इस घटना ने सोशल मीडिया यूजर्स को अलग-अलग गुटों में बांट दिया है:

  • विरोध में: कई लोगों ने इसे 'मॉरल पुलिसिंग' का स्पष्ट उदाहरण बताया और तर्क दिया कि किसी को भी दूसरों की पसंद के कपड़ों में दखल देने का अधिकार नहीं है.
  • समर्थन में: एक वर्ग का मानना था कि महिला ने बिना आक्रामक हुए केवल अपनी राय व्यक्त की और वे सांस्कृतिक शालीनता की बात कर रही थीं.
  • कंटेंट कल्चर पर सवाल: कुछ यूजर्स ने इन्फ्लुएंसर्स पर ही आरोप लगाया कि वे जानबूझकर सार्वजनिक स्थानों पर विवाद पैदा करने के लिए ऐसे कपड़े पहनते हैं, ताकि वीडियो वायरल हो सके.

बेंगलुरु में बढ़ते मामले

बेंगलुरु में मॉरल पुलिसिंग की यह पहली घटना नहीं है. हाल ही में योग प्रशिक्षक तन्नी भट्टाचार्जी को भी शॉर्ट्स पहनने के कारण एक बुजुर्ग महिला द्वारा शर्मिंदा किया गया था. जैसे-जैसे डिजिटल कंटेंट क्रिएशन का चलन बढ़ रहा है, शहरी सार्वजनिक स्थलों पर आधुनिक जीवनशैली और पारंपरिक अपेक्षाओं के बीच इस तरह के टकराव अक्सर देखने को मिल रहे हैं.