Operation Heavenly Hind: NIA का बड़ा खुलासा, ‘ऑपरेशन हेवेनली हिंद’ के जरिए भारत में अराजकता फैलाने की थी साजिश, दिल्ली समेत कई इलाकों में धमाकों की थी तैयारी
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Operation Heavenly Hind: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने एक बड़े आतंकी मॉड्यूल का पर्दाफाश करते हुए ‘ऑपरेशन हेवेनली हिंद’ नाम की साजिश का खुलासा किया है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, फरीदाबाद मॉड्यूल देश के कई हिस्सों में सिलसिलेवार धमाके कर भारत में अराजकता फैलाने की योजना बना रहा था. इस मॉड्यूल ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में विस्फोट करने के लिए हजारों किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट जुटा लिया था, लेकिन समय रहते सुरक्षा एजेंसियों ने नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया. हालांकि, मॉड्यूल एक आत्मघाती हमला करने में सफल रहा था, जो लाल किले के पास किया गया था. यह भी पढ़ें: Pahalgam Terror Attack Anniversary: पहलगाम आतंकी हमले की बरसी पर Razdan Pass पर उमड़ी पर्यटकों की भीड़, जान गंवाने वाले पीड़ितों को दी श्रद्धांजलि; VIDEO

जांच में सामने आया कि आत्मघाती हमलावर उमर उन नबी ने फरीदाबाद मॉड्यूल का खुलासा होने के बाद जल्दबाजी में हमला किया था. एनआईए ने इस मामले में 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें पूरे मॉड्यूल की साजिश और गतिविधियों का विस्तार से जिक्र किया गया है.

जांच एजेंसियों के अनुसार, मॉड्यूल के सदस्य पहले विदेश जाकर कट्टरपंथी संगठनों और विदेशी हैंडलर्स से संपर्क करना चाहते थे. कई असफल कोशिशों के बाद उन्होंने जैश-ए-मोहम्मद का नाम इस्तेमाल करने और फिर जम्मू-कश्मीर में अल-कायदा से जुड़े संगठन अंसार गजवत-उल-हिंद को दोबारा सक्रिय करने की योजना बनाई.

चार्जशीट के मुताबिक, आतंकियों ने फैसला किया कि विदेश जाने के बजाय भारत में ही हमलों को अंजाम देना ज्यादा प्रभावी होगा. इसी योजना को उन्होंने ‘ऑपरेशन हेवेनली हिंद’ नाम दिया. शुरुआती योजना देश के अलग-अलग हिस्सों में धमाके करने की थी, ताकि इसका इस्तेमाल प्रचार सामग्री के रूप में कर जम्मू-कश्मीर में भर्ती अभियान चलाया जा सके.

जांच में यह भी सामने आया कि मॉड्यूल का बड़ा उद्देश्य अंसार गजवत-उल-हिंद को फिर से सक्रिय कर भारत सरकार को अस्थिर करना और शरिया कानून लागू करना था. एजेंसियों का कहना है कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में एक स्थानीय मॉड्यूल तैयार करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली थी.

फरीदाबाद मॉड्यूल का मानना था कि भारत के भीतर बने मॉड्यूल द्वारा किए गए धमाके जम्मू-कश्मीर के युवाओं को प्रभावित कर सकते हैं और बड़े पैमाने पर भर्ती अभियान को बढ़ावा दे सकते हैं. इसके बाद देश में लगातार हमले कर तनाव और अस्थिरता पैदा करने की योजना थी.

एनआईए के मुताबिक, मॉड्यूल ने जम्मू-कश्मीर, दिल्ली और उत्तर प्रदेश में हमलों की तैयारी की थी. मास्टरमाइंड उमर उन नबी ने हमास की तर्ज पर ड्रोन और रॉकेट हमले करने का सुझाव भी दिया था. मॉड्यूल अंतरराष्ट्रीय संपर्क और घरेलू नेटवर्क तैयार करने की कोशिश में जुटा हुआ था.

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पकड़े जाने से बचने के लिए मॉड्यूल के सदस्यों ने कई वर्षों तक छोटी-छोटी मात्रा में अमोनियम नाइट्रेट खरीदा. इसके साथ ही फंडिंग नेटवर्क भी तैयार किया गया था. चौंकाने वाली बात यह है कि कई आरोपी उच्च शिक्षित थे और कुछ पेशे से डॉक्टर भी थे, जिसकी वजह से उन्हें फंड जुटाने में ज्यादा संदेह का सामना नहीं करना पड़ा.

एनआईए को जांच में पता चला कि मॉड्यूल ने आंतरिक फंडिंग के जरिए करीब 26 लाख रुपये जुटाए थे. इसके अलावा, मॉड्यूल ने ओवरग्राउंड वर्कर्स और समर्थकों की एक टीम भी तैयार कर ली थी, जो मुख्य सदस्यों को छिपाने और सबूत मिटाने में मदद कर रही थी.

एनआईए ने बिलाल नसीर मल्ला, मोहम्मद सोयाब और यासिर अहमद डार को उन लोगों में शामिल बताया है, जिन्होंने मुख्य आरोपियों को संरक्षण दिया. जांच एजेंसी के मुताबिक, मॉड्यूल ने MMO एनोड्स, इलेक्ट्रिकल सर्किट और स्विच जैसे उपकरण ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यमों से खरीदे थे. फिलहाल इस मामले में 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी की जांच अभी भी जारी है.