2006 Malegaon Blast Case: मालेगांव ब्लास्ट मामले में बॉम्बे HC का फैसला, 4 आरोपियों को किया बरी; कोर्ट ने रद्द किए सभी आरोप
बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2006 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में एक बड़ा फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को बरी कर दिया है. अदालत ने विशेष एनआईए अदालत द्वारा तय किए गए आरोपों को रद्द करते हुए उनके खिलाफ चल रहे ट्रायल को समाप्त कर दिया है.
2006 Malegaon Blast Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने आज, 22 अप्रैल 2026 को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए 2006 के मालेगांव बम विस्फोट मामले में नामजद चार आरोपियों-राजेंद्र चौधरी, धन सिंह, मनोहर राम सिंह नरवरिया और लोकेश शर्मा-को डिस्चार्ज (बरी) कर दिया है. मुख्य न्यायाधीश श्री चंद्रशेखर और न्यायमूर्ति श्याम चांडक की खंडपीठ ने विशेष एनआईए (NIA) अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें इन आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए गए थे. इस फैसले के साथ ही इन चार व्यक्तियों के खिलाफ चल रही कानूनी कार्यवाही और ट्रायल पूरी तरह समाप्त हो गया है.
ट्रायल कोर्ट के आदेश को दी थी चुनौती
अदालत ने यह फैसला आरोपियों द्वारा दायर उस अपील पर सुनाया है, जिसमें उन्होंने सितंबर 2025 के विशेष अदालत के आदेश को चुनौती दी थी. आरोपियों का तर्क था कि एनआईए उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत पेश करने में विफल रही है. इससे पहले, जनवरी 2026 में हाईकोर्ट ने अपील को स्वीकार करते हुए निचली अदालत की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी. आज के फैसले में कोर्ट ने माना कि आरोपियों के खिलाफ मामला चलाने के लिए प्रथम दृष्टया साक्ष्य अपर्याप्त हैं. यह भी पढ़े: Malegaon Blast Case Verdict: ‘मुझे 17 साल तक अपमानित किया गया’, मालेगांव विस्फोट मामले में बरी होने के बाद रो पड़ीं साध्वी प्रज्ञा ठाकुर
8 सितंबर 2006: मालेगांव में हुए थे सिलसिलेवार धमाके
8 सितंबर 2006 को नासिक जिले के पावरलूम शहर मालेगांव में शब-ए-बारात के दिन सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे. तीन विस्फोट हमीदिया मस्जिद और बड़ा कब्रिस्तान के परिसर में हुए थे, जबकि चौथा धमाका मुशावरत चौक पर हुआ था. इस भयावह घटना में 31 से ज्यादा निर्दोष लोगों की जान गई थी और 312 से अधिक लोग घायल हुए थे.
जांच का घटनाक्रम और दोहरी थ्योरी
इस मामले की जांच में समय के साथ कई मोड़ आए:
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ATS की जांच: शुरुआत में महाराष्ट्र एटीएस (ATS) ने इसकी जांच की और 9 मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया था. एटीएस का दावा था कि यह सिमी (SIMI) का काम है.
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NIA की जांच: बाद में मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को सौंपा गया. एनआईए ने पूर्व की थ्योरी को बदलते हुए दावा किया कि ये धमाके दक्षिणपंथी चरमपंथियों द्वारा किए गए थे. इसके बाद पूर्व में गिरफ्तार 9 मुस्लिम युवकों को अदालत ने आरोपमुक्त कर दिया था.
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वर्तमान आरोपियों की गिरफ्तारी: एनआईए ने राजेंद्र चौधरी, धन सिंह, मनोहर और लोकेश शर्मा को गिरफ्तार किया था, जिन्हें अब हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है.
अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणी
खंडपीठ ने अपील में हुई 49 दिनों की देरी को भी माफ किया और एनआईए अधिनियम की धारा 21 के तहत इसे वैधानिक अपील माना. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना ठोस सबूतों के ट्रायल को जारी रखना न्यायसंगत नहीं है. यह फैसला इस लंबे समय से चले आ रहे मामले में एक निर्णायक मोड़ साबित हो सकता है.
क्या होगा अगला कदम?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि एनआईए इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है. हालांकि, फिलहाल इन चारों आरोपियों के लिए यह बड़ी राहत है, क्योंकि वे लंबे समय से इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे. मालेगांव के पीड़ित परिवारों के लिए न्याय का इंतजार अब और भी जटिल होता नजर आ रहा है.
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 22, 2026 12:19 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

