आवारा कुत्तों का आतंक, नोएडा के 34 खतरनाक इलाकों की लिस्ट जारी, 5 महीने में 69000 से ज्यादा लोग हुए शिकार

नोएडा में कुत्तों के काटने की घटनाएँ बहुत तेज़ी से बढ़ गई हैं. स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग ने नोएडा जिले के 34 इलाकों को 'हॉटस्पॉट' यानी सबसे खतरनाक क्षेत्र घोषित कर दिया है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस साल जनवरी से मई के बीच ही 69,188 लोगों को कुत्तों ने काटा है.

इन खतरनाक इलाकों की पहचान इस आधार पर की गई है कि किस क्षेत्र में रेबीज से बचाने वाले इंजेक्शन (एंटी-रेबीज वैक्सीन) सबसे ज्यादा इस्तेमाल हुए हैं. जल्द ही इन सभी इलाकों की लिस्ट जिले के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर लगा दी जाएगी.

ये हैं नोएडा के कुछ प्रमुख 'डेंजर ज़ोन'

जिन इलाकों को सबसे ज़्यादा जोखिम भरा माना गया है, उनमें ये शामिल हैं:

  • नोएडा सेक्टर: 130, 110, 45, 5
  • गांव और कॉलोनियाँ: खोड़ा, नांगली वाजिदपुर, हल्दोनी, सदपुर, बरोला, हरौला (सेक्टर 5), जेजे कॉलोनी (सेक्टर 8 और 9), अट्टा फतेहपुर, जलपुरा, जहांगीरपुर, रबूपुरा आदि.
  • ग्रेटर नोएडा: ओमीक्रॉन सेक्टर 1, 2, 3

रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर इलाके भंगेल, बिसरख और दनकौर ब्लॉक में हैं, जहाँ आवारा कुत्तों की गतिविधियाँ काफी बढ़ गई हैं. अकेले मार्च महीने में 11,599 लोगों को आवारा कुत्तों ने काटा था.

क्या करें और क्या न करें?

नोएडा के डिप्टी चीफ मेडिकल ऑफिसर, डॉ. टीकम सिंह ने लोगों से आवारा कुत्तों से सावधान रहने और काटने पर तुरंत इलाज कराने की अपील की है. डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी कुत्ते की लार आपकी कटी-फटी त्वचा या मुँह-आँख के संपर्क में आती है, तो बिना देर किए रेबीज का टीका लगवाना बेहद जरूरी है. ज्यादा गंभीर मामलों में, टीके के साथ-साथ रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) भी दिया जाता है.

मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा

यह समस्या सिर्फ नोएडा तक ही सीमित नहीं है. दिल्ली में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई है. एक रिपोर्ट में rabies से एक बच्ची की मौत का जिक्र होने के बाद, कोर्ट ने इस मामले को जनहित याचिका (PIL) मानकर आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं.

इसके जवाब में, दिल्ली नगर निगम (MCD) ने आवारा कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण के लिए एक बड़ा अभियान शुरू करने की घोषणा की है.

सिर्फ कुत्ते ही नहीं, जिले में इस साल बंदरों के काटने के 2,193 और बिल्लियों के काटने के 697 मामले भी सामने आए हैं.