जरुरी जानकारी | होटल कमरे का किराया 7,500 रुपये से अधिक होने पर रेस्तरां सेवाओं पर लगेगा 18 प्रतिशत जीएसटी

नयी दिल्ली, 27 मार्च केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने बृहस्पतिवार को कहा कि वित्त वर्ष में किसी भी समय कमरे का किराया 7,500 रुपये प्रतिदिन से अधिक वसूलने वाले होटल को अगले वित्त वर्ष के लिए ‘निर्दिष्ट परिसर’ माना जाएगा और ऐसे परिसरों के अंदर प्रदान की जाने वाली रेस्तरां सेवाओं पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के साथ 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा।

एक अप्रैल, 2025 से, ऐसे रेस्तरां जो होटलों के अंदर संचालित होते हैं, उनकी करयोग्यता आपूर्ति के मूल्य (लेन-देन मूल्य) के आधार पर होगी। यह ‘घोषित शुल्क’ की व्यवस्था की जगह लेगा।

सीबीआईसी ने ‘निर्दिष्ट परिसर में आपूर्ति की गई रेस्तरां सेवा’ विषय पर जारी अक्सर पूछे जाने वाले सवालों (एफएक्यू) में कहा है , ‘‘एक अप्रैल, 2025 से शुरू होने वाली अवधि के लिए, पिछले वित्त वर्ष में होटल आवास की आपूर्ति का मूल्य, यानी उक्त आपूर्ति के लिए लिया गया लेनदेन मूल्य, यह निर्धारित करने का आधार होगा कि होटल आवास सेवा प्रदान करने वाला परिसर चालू वित्त वर्ष में अनिवार्य रूप से ‘निर्दिष्ट परिसर’ की श्रेणी में आता है या नहीं।’’

सीबीआईसी ने ‘निर्दिष्ट परिसर’ को ऐसे परिसर के रूप में परिभाषित किया है, जहां से आपूर्तिकर्ता ने पिछले वित्त वर्ष में ‘होटल में रहने’ की सेवा प्रदान की है और जिसमें आवास की किसी भी इकाई की आपूर्ति का मूल्य 7,500 रुपये प्रति इकाई प्रति दिन या उससे अधिक है।

ऐसी होटल के अंदर रेस्तरां सेवाओं पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के साथ स्वत: रूप से 18 प्रतिशत जीएसटी लगेगा।

होटलों के अंदर रेस्तरां सेवाएं जिनके कमरे का किराया पिछले वित्त वर्ष में 7,500 रुपये प्रति दिन से अधिक नहीं रहा है, उन पर आईटीसी के बिना पांच प्रतिशत जीएसटी बना रहेगा।

साथ ही, जिस होटल की अगले वित्त वर्ष से कमरे का किराया 7,500 रुपये से अधिक वसूलने की योजना है, वे चालू वित्त वर्ष की एक जनवरी से 31 मार्च के बीच जीएसटी अधिकारियों के समक्ष ‘ऑप्ट इन’ यानी व्यवस्था में शामिल होने की घोषणा कर सकते हैं। साथ ही, नए पंजीकरण की मांग करने वाले होटलों को उक्त परिसर को ‘निर्दिष्ट परिसर’ घोषित करते हुए इसे प्राप्त करने के 15 दिन के भीतर इस व्यवस्था को अपनाने के बारे में जानकारी देनी होगी।

सीबीआईसी ने कहा कि निर्दिष्ट परिसर की परि में ‘घोषित टैरिफ’ की अवधारणा को ‘आपूर्ति के मूल्य’ (अर्थात लेनदेन मूल्य) से प्रतिस्थापित किया जा रहा है, क्योंकि होटल उद्योग बड़े पैमाने पर गतिशील मूल्य निर्धारण मॉडल की ओर बढ़ गया है।

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